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ISSN: 2278 – 2168

Milestone Education Review


(The Journal of Ideas on Educational & Social
Transformation)
Year 08, No.02 (October, 2017)

Special Issue on Philosophy, Man


and His World

Chief-Editor:
Desh Raj Sirswal
Guest-Editor:
Devdas Saket

1
Milestone Education Review (2278-2168)

Milestone Education Review (The Journal of Ideas on Educational & Social


Transformation) is an online peer-reviewed bi-annual journal of Milestone
Education Society (Regd.) Pehowa (Kurukshetra). For us education refers to any act
or experience that has a formative effect on the mind, character, or physical ability
of an individual. The role of education must be as an instrument of social change and
social transformation. Social transformation refers to large scale of social change as
in cultural reforms and transformations. The first occurs with the individual, the
second with the social system. This journal offers an opportunity to all academicians
including educationist, social-scientists, philosophers and social activities to share
their views. Each issue contains about 100 pages.

© Milestone Education Society (Regd.), Pehowa (Kurukshetra)

Chief-Editor: Dr. Desh Raj Sirswal, Assistant Professor (Philosophy), P.G .Govt.
College for Girls, Sector-11, Chandigarh.

Guest-Editor: Mr. Devdas Saket, Research Scholar, Department of Philosophy,


Vikram University, Ujjain (M.P.).

Associate Editors: Dr. Merina Islam, Dr. Poonama Verma

Editorial Advisory Board:

Prof. K.K. Sharma (Former-Pro-Vice-Chancellor, NEHU, Shillong).

Prof. (Dr.) Sohan Raj Tater (Former Vice Chancellor, Singhania University, Rajasthan).

Dr. Dinesh Chahal (Department of Education, Central University of Haryana).

Dr. Manoj Kumar, (P.G. Department of Sociology, P.G.Govt. College for Girls, Sector-11, Chandigarh.)

Dr. Sudhir Baweja (University School of Open Learning,, Panjab University, Chandigarh).

Dr. K. Victor Babu (Department of Philosophy and Religious Studies, Andhra University,
Visakhapatnam).

Dr. Nidhi Verma (Department of Psychology, C.R.S. University, Jind (Haryana).

Dr. Jayadev Sahoo (Jr. Lecturer in Logic & Philosophy, GM Jr. College, Sambalpur, Odisha).

Declaration: The opinions expressed in the articles of this journal are those of the individual authors, and
not necessary of those of the Society or the Editor. Front page picture is downloaded from the Internet.

2
In this issue………..

Title & Author Page No.


दर्शन, सज
ृ नात्मकता और मानवीय सम्बन्ध 04-13
दे र्राज ससरसवाऱ
14-16

17-21

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CONTRIBUTORS OF THIS ISSUE 78-79

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दर्शन, सृजनात्मकता और मानवीय सम्बन्ध
देर्राज ससरसवाल

साराांर्

मानवीय-सम्बन्ध सददयों से दर्शन और सासहत्य के ाऄध्ययन का मुख्य सवषय रहा है. जब भी हम


मानवीय सम्बन्धों के सववेचन पर जाते है तब हम ाआनकी प्रकृ सत, व्यसिगत और सामासजक सम्बन्धों की
प्रमासणकता के सम्बन्ध म बात करते ह और हम के वल दार्शसनक सवचारों तक ही सीसमत नह रहते
बसकक हम मनोसवज्ञासनकों, समाजर्ासियों, राजनीसतक सवचारकों के साथ-साथ सासहत्यकारों द्वारा दी
गयी व्याख्याओं का भी ाऄध्ययन करना पड़ता है कयूांदक यह ाऄन्तरश सवषयी ाऄध्ययन का सवषय है. जब
भी मानवीय सम्बन्धों का दार्शसनक ाऄध्ययन करते ह तो हम मानवीय प्रकृ सत, नैसतक मूकयों, ज्ञान
का क्षेत्र, राजनीसतक-स्वतन्त्रता और ाऄसनवायशता ाआत्यादद दर्शन के सवसभन्न पहलुओं को भी समझना
पड़ता है. प्रेम की प्रकृ सत (the nature of love), समत्रता (friendship), ाअत्मासभरुसच एवम ाऄन्य
(self-interest and others), दूसरों से सम्बन्ध (relationships with strangers) और
सामासजक-सहभासगता (social participation) ाआत्यादद ाआस ाऄध्ययन की सवषयवस्तु म ससम्मसलत है.
ाआस र्ोध-पत्र का मुख्य ाईद्देश्य दर्शन और सृजनात्मकता म सम्बन्ध और मानवीय सम्बन्धों म ाआनकी
ाईपयोसगता का ाऄध्ययन करना है.

दर्शन का ाऄथश और पररभाषा

प्रोफ. दयाकृ ष्ण ने "ज्ञान मीमाांसा" दकताब म भारत म दर्शन की सस्थसत का वणशन करते हुए सलखा है ,
"दर्शन के नाम पर भारत म एक ऐसी ाऄबौसिकता का प्रचार दकया जाता है सजसे ाऄध्यात्म नाम देकर
बुसि के ाऄनांत ाअक्षेपों से बचाया जाता है। बात र्ब्द की नही है यदद दर्शन का ाऄथश वही है जो ये लोग
देते ह; तो हमे ाईसके सलए कोाइ नया नाम खोजना पड़ेगा सजसका बुसि ही क्षेत्र है और तकश सजसका
प्राण है। र्ायद 'दफकस्फा' ाईसके सलए ाऄसधक ाईपुि र्ब्द हो।… जहााँ बुसि की बात नह है वहाां दर्शन
की बात करना दफजूल है। ध्यान लगााआए , घड्ताल बजााआए , प्राणायाम कीसजये ,योग सासधये, यह
सब खुर्ी से कीसजये ,पर कम से कम ाआनको दर्शन की सांज्ञा मत दीसजये। ाऄलग- ाऄलग चीजों को एक
नाम से पुकारने से कोाइ लाभ नही है ।"1 दर्शन की कोाइ सनसित पररभाषा देना काफी करिन है लेदकन
दफर भी सबना पररभाषा के दकसी भी सवज्ञान या समाज सवज्ञान के ाऄथश को नही समझा जा सकता।
यहााँ पर हम दर्शन की एक पररभाषा का सवश्लेषण करगे।

दर्शन की एक सम्भासवत पररभाषा यह हो सकती है, "ाऄनवरत और प्रयत्नर्ील चचतन की बौसिक


व्याख्या और ाईसके मूकयाङ्कन का प्रयास दर्शन कहलाता है।"2 लेदकन ाऄगर हम ाआस पररभाषा का
सवस्श्लेष्ण कर तो सनम्नसलसखत करिनााआयााँ हम प्रतीत होती ह. ाआस पररभाषा के सवसभन्न घटकों को देख
:

4
 ाऄनवरत र्ब्द का ाऄथश है, लगातार /परम्परा से। लेदकन यहााँ पर ाऄपवाद है की जब कोाइ
दार्शसनक जब सोचता है, तो यह ाईम्मीद और भावना रहती ह की र्ायद वह कु छ नया प्रस्तुत

करे । ाऄत: यह र्ब्द साथशक तो है, लेदकन पररभाषा म ाऄनावश्यक है।

 प्रयत्नर्ील चचतन :
चचतन दो प्रकार का है:
 स्वाभासवक चचतन (thinking without efforts) जैस-े मन म ख्यालों का चलना।

 प्रयत्नर्ील सचन्तन ( thinking with efforts) - कोसर्र् द्वारा ाऄथाशत सजसमे


क्रमानुसार प्रदक्रया होती है। लेदकन ऐसा चचतन बौसिक ही है। ाऄत: ाआसको ाऄलग से
कहने की ाअवश्यकता नह है। साथ ही के वल दर्शन ही नह ाऄन्य सवज्ञानों म भी
प्रयत्नर्ील सचन्तन होता है और साथ म व्यावहाररक जीवन म हम हर कम करने के
सलए भी ाआसका ाआस्तेमाल करते है, लेदकन यह दर्शन नह है। जैसे यात्रा से पहले समय
सारणी व कायशक्रम बनाना। सचन्तन के ाआस भेद को महत्वपूणश माना गया है। ाआसे
तार्ककक (logical) या प्रत्ययात्मक (conceptual) भेद कहा जाता है।

 दकसी भी पररभाषा को दो दोषों से रसहत होना चासहए –


 ाऄसतव्यासि दोष
 ाऄव्यासिदोष
पररभाषा ाईस वस्तु के लक्षणों को प्रकट करती है सजसका हम मुख्यत: वणशन कर रहे ह .
 ाऄसतव्यासि दोष ाईसे कहते ह, सजसम लक्षण ाईस वस्तु के ाऄलावा ाऄन्य म भी रहते ह जैसे 'गाय'

ाईसे कहते ही, सजसके चार थन होते ही, ाआसम ाऄसतव्यासि दोष है, कयोंदक भस ाआत्यादद के भी
ऐसा होता है।
 ाऄव्यासि दोष ाईसे कहते है, सजसम लक्षण ाऄव्याि होता है, यासन ाऄपूणश होता है, जैसे 'गाय' ाईसे

कहते है, जो सफ़े द होती है। यह लक्षण भी पयाशि नह है, कयोंदक गाय काली, भूरी ाआत्यादद हो
सकती है। लेदकन ाईपरोि पररभाषा की कसमयों को हम देखना होगा।

ाईपरोि पररभाषा म प्रयत्नर्ील सचन्तन ाऄन्य सवज्ञानों म भी ही। ाऄत: ाऄसतव्यासि दोष है और
साथ ही यह बौसिक का व्याख्या का ही एक ाऄांग ह. साथ ही जो लक्षण दो वस्तुओं म भेद को प्रकट
कर, ाईन्ह स्पष्ट करता है वह व्यव्छेद्क धमश (differentiating characteristic) कहलाता है। वह
पररभाषा म होना चासहए । जैसे वैर्ेसषक दर्शन म 'कमश' के सलए 'गसत' व्यावतशक धमश है, कयोंदक यह ाईसे
ाऄन्यों से भेद ददखलाती है कयोंदक जहााँ भी कमश है, वहाां गसत है, जैसे हाथ सहलाना।

5
दर्शन की पररभाषा के सलए एक और गुण है, जो बहुत ाअवश्यक है, सजससे वह ाऄन्य बौसिक व्याख्याओं
या सवज्ञानों से ाईसे ाऄलग करता है, यह है- ाआसन्ियानुभाव सनरपेक्ष होना यासन ाआसन्ियानुभाव से परे
होना। लेदकन यहााँ पर प्रश्न ाईिता है की ाआसन्ियानुभाव सनरपेक्ष होना गसणत और तकश र्ाि म भी पाया
जाता है, दफर यहााँ ाऄांतर कया रह जाता है ? ाआसका सम्भाव्य ाईत्तर यह ददया जा सकता है की दर्शन
मानव-जीवन के सवसवध पक्षों को लेकर चलता है, जबदक गसणत ाआससे बहुत सभन्न होता है। ाऄग्रवती
गसणत (advanced mathematics) के वल ाऄवधारणाओं से भरा है, ाऄनुभूसत का कोाइ स्थान नह ।
ाऄत: दर्शन की पररभाषा सनम्न दी जा सकती है:
 "मानव-जीवन के सवसवध पक्षों का बौसिक - ाऄवधारणात्मक सचन्तन या ऐसे सचन्तन का

ाअलोचनात्मक मूकयाांकन दर्शन है।" (Pure rational-conceptual thought regarding

different aspects of human life or a critical thought over such kind of

thoughts may be called as philosophy.)

दर्शन की ाऄन्य सवर्ेषता यह है की यह ाअत्मालोचक (self- critical ) है। कहने का भाव यही है की
दर्शन ही एक मात्र ऐसा सवषय है, जो ाऄपने स्वरूप के बारे म सोचता है। जैसे : ाआसतहास कया है?,
सवज्ञानां कया है?, गसणत कया है?, सवसध कया है? दर्शन ही एक मात्र सवषय है, जो ाआसके बारे सचन्तन
करता है, यह सभी के स्वरूप की ाऄवधारणाओं का ाऄध्ययन करता है। ाऄन्य सवषय ऐसा नह करते।
परन्तु ाअसस्तत्ववादी दार्शसनक ाआससे सभन्न सवचार रखते है, वे कहते है दक बुसि या तकश से जब हम
मानव जीवन से सम्बसन्धत जैसे प्यार, नैसतकता, धमश ाआत्यादद ाऄवधारणाओं को समझने की कोसर्र्
करते ह तो ाईनकी ाअत्मा का हनन कर देते ह. यह वास्तव म ाअसस्तत्व नह रखते , लेदकन ाआनको
समझने के सलए हम ाआन्ह जीना होगा। यदद ऐसा ही होता तो सासहत्य और दर्शन म समानता है और
दफर ाआन दोनों म ाऄांतर कया रह जाता है ? यह समझ नह ाअता। ाईपरोि सवचार ाऄकबटश कामू,
काफ़्का,सात्रश ाआत्यादद ाअसस्तत्वादी दार्शसनकों के ह।

दर्शन पर वतशमान ाअक्षेप:

दर्शन और दर्शनर्ाि की ाईपयोसगता पर बहस का ाआसतहास बहुत पुराना है, सवसभन्न समय म
दार्शसनकों ने तत्कालीन परसस्थसतयों के ाऄनुसार दर्शन का सवश्लेष्ण और मुकयाांकन दकया है और
पररणामस्वरूप ाऄलग ाऄलग दर्शन की र्ाखाओं और नवीन समस्याओं का ाईद्भव हुाअ है. लेदकन
सपछले साल एक भौसतकी के वैज्ञासनक ने ऐसी रटप्पणी की है सजस पर दुसनया भर म हांगामा मचना
तय है। एक काांफ्रस म महान वैज्ञासनक स्टीफन हॉककग ने कहा दक ‘दर्शनर्ाि मृत हो चुका है।’ वह
सोचते ह दक दर्शन खत्म हो चुका है, कयोंदक ाआस क्षेत्र म नाइ बात नह ाअ रही ह। हॉककग मानते ह दक
दर्शन (दफलॉसफी) वह युवा है, जो कॉकटेल पाटी म तब ददखता है, जब सारे ाऄसतसथ जा चुके होते ह।
सवाल ाईिता है दक सबसे बुसिमान जीसवत ाआांसानों म से एक हॉककग ने यह ाअपसत्तजनक रटप्पणी कयों

6
की? जासहर तौर पर ाआसका कारण है: ‘दर्शनर्ािी।’ हॉककग ने कहा, ‘ाआनका ाअधुसनक सवकास से कोाइ
वास्ता नह , खास तौर से भौसतकी से।’ ाईनके ाऄनुसार,साांसाररक सच्चााआयों की जानकारी भौसतकर्ािी
के पास है।

हॉककग द्वारा र्ुरू की गाइ यह बहस न ससफश गलत बुसनयाद पर रटकी है, बसकक गलत ददर्ा म भी बढ़
गाइ है। जासहर है वे एक स्थासपत भौसतकर्ािी ह और ाईनकी कही गाइ एक-एक बात पर सवचार दकया
जाता है। वैसे सजस गांभीरता से ाईन्होंने ाऄब तक काम दकया है, ाईनके ाआस बयान को बगैर सोचे-समझे
ददया गया बयान नह माना जा सकता है। यह समझने की जरूरत है दक ाअज भी सवश्वसवद्यालयों म
दफलॉसफी की पढ़ााइ होती है और दुसनया के साथ मानव ाऄसस्तत्व पर दर्शनर्ािी सवसभन्न दृसष्टकोणों
से दकताब सलख रहे ह। ाआससलए यह सवाल ज्यादा सटीक है दक कौन-से दर्शनर्ाि मृत हो चुके ह? ाआस
सवषय से जुड़े सवाल नए नह ह। हॉककग की यह व्याख्या काफी हद तक सही है। ाईन्ह की बात का
समथशन दुसनया भर के और वैज्ञासनकों ने भी दकया है। लेदकन सवाल ाईिता है की दर्शन के बारे ाआस तरह
की बात वतशमान म कयों ाईि रही है ? ाआसका एकमात्र जवाब यह हो सकता है की दार्शसनकों को ाऄपने
सचन्तन को वतशमान सामासजक और राजसनसतक समस्याओं पर लाना होगा जोदक सीधे मानव जीवन
से जुडी ह और लगातार ाईसे प्रभासवत करती रहती है. भारत म दार्शसनकों को एक सवर्ेष एसकटसवज्म
की जरूरत है और ाआसके सलए ाईन्ह सांककप लेना होगा और दर्शन की जीवन्तता को ददखाना होगा. 3
ाआस तरह हम कह सकते ह की ाऄगर दार्शसनक ाऄपनी भूसमका को नह पहचान पाते तो दर्शन पर ाआस
तरह के ाअक्षेप सम्भाव्य ह.

सजशनात्मकता कया है?

सजशनात्मकता ाऄथवा रचनात्मकता दकसी वस्तु, सवचार, कला, सासहत्य से सांबि दकसी समस्या का
समाधान सनकालने ाअदद के क्षेत्र म कु छ नया रचने, ाअसवष्कृ त करने या पुनसृशसजत करने की प्रदक्रया है।
यह एक मानससक सांदक्रया है जो भौसतक पररवतशनों को जन्म देती है। सृजनात्मकता के सांदभश म
वैयसिक क्षमता और प्रसर्क्षण का ाअनुपासतक सांबन्ध है। रासधका मेनन के ाऄनुसार “सृजनर्ीलता का
कोाइ एक ाअसधकाररक पररप्रेक्ष्य या पररभाषा नह है और ददलचस्प बात तो यह है दक सृजनर्ीलता के
सलहाज से मनोसवज्ञान द्वारा ाऄध्ययन की गाइ दूसरी बातों के सवपरीत खुद सृजन-र्ीलता को मापने को
कोाइ सवश-स्वीकृ सत तकनीक भी नह है। सांसश्लष्ट सिटेसनका सवश्वकोष ने सृजनात्मकता की पररभाषा देते
हुए ाईसे एक नया सवचार या सोच, ककपनार्ील हुनर के जररए कोाइ नह चीज सनर्ममत करने की
क्षमता, दकसी समस्या का कोाइ नया हल, नया तरीका या युसि या कोाइ नाइ कलात्मक वस्तु या रूप
बताया है। सवश्लेषण, क्रसमक, सवकास व सुधारों और नाइ खोजों के मानकों पर ाअगे बढने को भी
सृजनर्ीलता समझा जाता है। ाआस पररभाषा को लेने पर ाऄांतदृसश ष्ट दकसी खास क्षेत्र की बपौती नह रह
जाती।“4

सृजनात्मकता के ाऄगर र्ासब्दक ाऄथश की बात दकया जाये तो “create”का र्ासब्दक ाऄथश है – सृजन
करना, ाईत्पन्न करना ाअदद. “Creativity” से ाऄथश है, सवचारों और वस्तुओं म नये सबांध देखना. ाऄब

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प्रश्न ाईिता है की कया नवीनता का होना सृजनात्मकता के सलए ाअवश्यक है? कु छ सवद्वानों ने
सृजनात्मकता की पररभाषाय प्रस्तुत की ह सजनमे नवीनता को सृजनात्मकता का मुख्य चबदु माना
गया है :

 िेव्द्हल (Drevdhal) के ाऄनुसार, “ सृजनात्मकता व्यसि की वह योग्यता है सजसके द्वारा वह

कोाइ नवीन रचना करता है ाऄथवा नवीन सवचार प्रस्तुत करता है. ” ( Creativity is the

ability of individual by which he creates something new and presents novel

ideas.) According to Drevdahl, "Creativity is the capacity of a person to

produce compositions or ideas which are essentially new."

 सस्कनर (Skinner) के ाऄनुसार , “सृजनात्मकता से ाऄथश है दक वू=यसि की भसवष्यवासणयाां


नाइ, मौसलक तथा ाऄसाधारण होती ह. सृजनर्ील व्यसि वह है जो नये क्षेत्रों की खोज करता
है, नये ाऄवलोकन करता है, नाइ भसवष्यवासनयााँ करता है तथा नए सनष्कषश सनकालता ह”.
(Creativity thinking means that the predictions for the individual are new,

original and unusual. The creative thinker is one who explores new areas

and makes new observations, new predictions, new in references.)

According to Skinner, "Creative thinker is one who explores new areas,

makes new observations, predictions and inferences."

 स्टेगनर एवम् कावोस्की (Stagner and Karwoski) के ाऄनुसार, “ दकसी नाइ वस्तु का पूणश

या ाअचर्क ाईत्पादन सृजनात्मकता है.” (Creativity implies the production of the

totality or partiality novel identity.) According to Stagner, "Creativity implies

the production of a totally or partially novel identity.

 ाअाआजैक (Eysneck ) के ाऄनुसार, “ सृजनात्मकता वह योग्यता है सजसके द्वारा नए सांबांधों


का ज्ञान होता है तथा ाआसकी ाईत्पसत्त के परम्परागत प्रसतमानों से हटकर ाऄसाधारण सवचार
ाईत्पन्न होते ह.” (Creativity is the ability to see new relationship, to produce

unusual ideas and to deviate from traditional patterns of thinking.) 5

ाईपरोि पररभाषाओं के ाअधारपर हम सृजनात्मकता की सवर्ेषताओं का सनम्नसलसखत रूप से ाईकलेख


कर सकते ह :

 सृजनात्मकता सावशभौसमक होती है ाऄथवा सृजनात्मकता सभी प्रासणयों म होती है, दकसी म
ाऄसधक और दकसी म कम.
 सृजनात्मक योग्यता प्रसर्क्षण तथा सर्क्षा द्वारा सवकससत की जा सकती है .

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 सृजनात्मकता ाऄसभव्यसि द्वारा दकसी नाइ वस्तु को ाईत्पन्न दकया जाता है, परन्तु यह जरूरी
नह दक वह वस्तु पूणशरूप से नाइ हो.
 सृजनात्मकता प्रक्रम से जो ाईत्पादन होता है वह मौसलक होता है.
 सृजनात्मकता और बुसि म ाऄसधक सम्बन्ध नह है .
 सगकफोडश ने ाऄपने ाऄनुसांधानों के ाअधार और यह सनष्कषश सनकला की सृजनात्मक सचन्तन म
सनम्नसलसखत योग्यताएां र्ासमल होती है:
a) समस्याओं के प्रसत सांवेदनर्ीलता (Sensitivity of Problems)

b) लचीलापन (Flexibility)

c) सवस्तण (Elaboration)

d) प्रवाह(Fluency)

e) पुन: पररभासषत करना (Re-definition)

f) ाऄमूतश एवम् सांक्षेपण करने की क्षमता (Abstracting ability)

g) व्यवसस्थत एवम वगीकरण करने की क्षमता (Ability to arrange)

h) सांगरित एवम् सुगरित करने की क्षमता (Ability to coherence and

organization)

i) सांसश्लष्ठ एवम् सुबि करने की क्षमता (Ability to synthesize and closure)


ाऄत: हम यह कह सकते ह दक सृजनर्ीलता वह मानससक प्रदक्रया है सजसके द्वारा मनुष्य ाऄपने
वातावरण को ाआस प्रकार बल देना चाहता है दक ाईसम वह नए सवचार नमूने ाऄथवा सम्बन्ध ाईत्पन्न कर
सके . सृजनर्ीलता मौसलक कायश करने की क्षमता है या सजससे हम पुराने ाऄनुभवों को पुनाः सनर्ममत
करके नाइ रचना करने की ाईपयोगी योग्यता कह सकते ह.6

दर्शन, सृजनात्मकता और मानवीय सम्बन्ध

ाऄभी हमने दर्शन के स्वरूप और सृजनात्मकता के बारे पढ़ा. दर्शन और सृजनात्मकता म कया सम्बन्ध
है? दर्शन सृजनात्मकता को सवषयवस्तु प्रदान करता है ाऄथवा दृसष्टकोण? मानवीय सम्बन्ध दकसे कहते
ह? बेहतर और बदतर मानवीय सम्बन्ध सृजनात्मकता को दकस प्रकार प्रभासवत करते ह? दर्शन का ाआन
सबम कया योगदान है? ये कु छ प्रश्न है सजनका ाईत्तर हम खोजना होगा तभी हमारी खोज दकसी
साथशकता की तरफ ाऄग्रसर होगी. प्रो. देवराज के ाऄनुसार, “मनुष्य की सृजनात्मक प्रदक्रया का दर्शन
हम प्राकृ सतक व्यवस्था को बदलने म तथा ाईसकी सौन्दयाशत्मक ाऄसभरूसच म होता है। मनुष्य बाह्य
घटनाओं के प्रसत ाऄपनी प्रसतदक्रया सवसभन्न ढांगों से व्यि करता है।“ डॉ. कलाम के ाऄनुसार, “सवोत्तम
सर्क्षा वह होती है जब सर्क्षक ाऄपने छात्र को सृजनात्मक ाऄध्ययन की ाअदत डाल दे, सजससे
जीवनपयंत ज्ञान की सपपासा जगी रहे। सर्क्षक न के वल ाऄपने सर्क्षण से छात्रों पर प्रभाव डालता है

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ाऄसपतु सनस्वाथश ज्ञान के प्रसतपादन जैसे मानवीय मूकयों से भी ाईनको प्रभासवत करता है।“ ाआस तरह के
काफी सवचार पढने को समलते है और यह सब हमारे ाआस ाऄध्ययन को साथशक बनता है.

जब कोाइ व्यसि कला की बात करता है तो भावनाएां, ाऄसभव्यसि और सृजनात्मकता ाआत्यादद र्ब्दों से
हमारा सामना होता है. सृजनात्मक र्ब्द का प्रयोग हर कला, सासहत्य और ज्ञान की हर र्ाखा म करते
ह लेदकन ससफश कला से जोड़ कर ाआसको देखना सांकुसचत दृसष्टकोण होता है. दर्शन के क्षेत्र म ाऄगर हम
देख तो हम सृजनात्मकता के ाऄध्ययन बारे ज्यादा सवस्तृत चचाश नह समलती लेदकन हम महान
दार्शसनकों के लेखन म ाआसका वणशन ाअसानी से देख सकते ह. प्लेटो के ाऄनुसार प्रेरणा एक तरह का
पागलपन ही है तथा कान्त सृजनात्मकता को ककपना से जोड़ते ह. दोनों ही दार्शसनकों ने स्व्छन्द्तावाद
को प्रभासवत दकया और सृजनात्मकता की महत्वपूणश ाऄवधारणाएाँ ह. यह ाअियश का सवषय है की दर्शन
के क्षेत्र म ाआस पर 1950-2000 के बीचम बहुत कम काम हुाअ है. कला दर्शन म भी ाऄगर हम देख तो
व्याख्या, कला की पररभाषा,सौन्दयश की ाऄवधारणा ाआत्यादद पर ज्यादा काम हुाअ है बजाये
सृजनात्मकता के . सवषय की गहनता और ाईपरोि ाईिाये गये महत्वपूणश प्रश्नों के कणश दर्शन म यह भी
मुख्य सवषय होना चासहए. मनोसवज्ञान म जरूर ाआस सवषय पर काफी काम हुाअ है दकन्तु यह मात्र
सौंदयशर्ाि का सवषय न रहकर सवज्ञान, कला, तकनीकी, सांगिनात्मक जीवन, और रोजमराश की
गसतसवसधयों म भी पाया जाता है. जब भी हम दर्शन म सृजनात्मकता की बात करते ह तो के वल कला
दर्शन का ाऄलावा मनोदर्शन, सवज्ञान और ज्ञानमीमाांसा जैसे ाऄन्य सवषयों की तरफ भी हम जाना
पड़ेगा.

बेयशस गौट (Berys Gaut) ाऄपने लेख “द दफलोसोफी और दक्रएरटसवटी”7 म सृजनात्मकता को दर्शन के
सन्दभश म ाऄध्ययन करते समय सृजनात्मकता और ककपना म कया सम्बन्ध है, कया सृजनात्मक प्रदक्रया
बौसद्भक होती है, ज्ञान का सृजनात्मकता से कया सम्बन्ध है, कया सृजनात्मकता की व्याख्या की जा
सकती है ाआत्यादद प्रश्नों को ाईिाते ह. ाआसके साथ ही वह सृजनात्मक दर्शन के सनम्नसलसखत महत्वपूणश
सवषयों पर भी चचाश करते ह :

1. पहला प्रश्न है की कया सृजनात्मकता एक सद्गुण है? ाअजकल ज्ञान की हर र्ाखा म सद्गुणों
की चचाश हो रही है तो तब यह प्रश्न ाऄसधक महत्वपूणश हो जाता है की कया सृजनात्मकता एक
सद्गुण है ?
2. दूसरा महत्वपूणश प्रश्न यह है की सृजनात्मकता और बौसिकता एक दुसरे को कै से प्रभासवत
करती है?
3. तीसरा महत्वपूणश प्रश्न है की कया सृजनात्मकता परम्परा से सवपरीत होती है? कु छ दार्शसनक
ऐसा मानते ह की सृजनात्मकता म कु छ तत्व परम्परा का भी होता है. ाऄगर ऐसा ही है तो
परम्परा के सलए समाज की जरूरत होती है तो सृजनात्मकता भी ाऄसनवायशताः सामासजक हो
जाती है. ाअजकल सृजनात्मकता सम्बन्धी मनोसवज्ञान की सामासजक साांस्कृ सतक ससिाांत म
हम ाआस तरह के दार्शसनक पक्ष देखने को समलते ह तो ाआस तरह यह ससिाांत भी दार्शसनकों के
ाऄध्ययन का सवषय होना चासहए.

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4. चौथी महत्वपूणश बात यह है की डार्मवन के सृजनात्मकता के ससिाांत पर भी दार्शसनकों को
ाऄपना ध्यान लगाना चासहए. कयूांदक ाआस पर ज्यादा काम मनोसवज्ञासनकों ने ही सृजनात्मकता
के क्षेत्र म दकया है जबदक दार्शसनकों के के सलए भी यह बहुत मूकयवान है.8
ाईपरोि के ाऄलावा गौट कु छ महत्वपूणश दार्शसनक प्रश्न भी ाईिाते ह की कया सृजनात्मकता की व्याख्या
की जा सकती है ? बहुत से दार्शसनक ाआसकी प्राकृ सतक व्याख्या देने से परहेज नह करते. जैसा की प्लेटो
के ाऄनुसार सृजनात्मकता हमारे ाऄांदर रहने वाले देवताओं का काम है. कान्त के ाऄनुसार व्याख्याएां
सनधाशररत सनयमों के ाअधार पर दी जा सकती ह और सुद ां र कला के ाआस तरह के कोाइ सनधाशरक सनयम
नह है कयोंदक यह बुसि (genius) का काम है जबदक बुसि स्वयम भी यह नह जानती की ये सवचार
कहााँ से ाअते ह. ाआस तरह वह वतशमान समय की ाऄवधारणों के बात करते हुए कहते ह की सृजनात्मकता
के कम्प्यूटेर्नल ाऄवधारणों से भी ाऄद्ययन करने की ाअवश्यकता है. दार्शसनक ाआस सवषय को भी ाईिा
सकते है की कया सवसभन्न ज्ञान की र्ाखाओं म सृजनात्मकता एक जैसे काम करती है या ाऄलग ाऄलग हो
सकती है? वह ाअगे कहते ह की दार्शसनकों के सलए यह प्रश्न भी महत्वपूणश बन जाता है की कया
सृजनात्मकता कला म कलात्मक मूकय रखती है? ाईपरोि सवषयों म वह हम यही ददखाना चाहते ह की
सृजनात्मकता के ाऄद्ययन म दार्शसनक भी ाऄपनी महत्वपूणश भूसमका सनभा सकते ह कयोंदक
सृजनात्मकता से सम्बन्धी जो प्रश्न मनोसवज्ञान से जुड़े है वह वास्तव म दर्शन के क्षेत्र म भी ाअते ह
ाआससलए ाआनका दार्शसनक ाऄद्ययन महत्वपूणश हो जाता है .9

ाऄब हमारे सलए प्रश्न ाईिता है की मानवीय सम्बन्धों का दर्शन और सृजनात्मकता से कया सम्बन्ध है.
ाआस प्रश्न का सीधा ाईत्तर है की दर्शन मानवीय सम्बधों को पररभाषा देता है और सृजनात्मकता ाईसम
प्राण फूां कती है. दकसी भी व्यसि की सृजनर्ीलता का जन्म मानव मूकयों के प्रसत सांवेदनर्ीलता के
ाऄनुसार ही होता है और यही सृजनर्ीलता दर्शन की सीमा म ाअती है. सृजनात्मकता के सलए
सकारात्मक प्रेरणा की जरूरत होती है ाऄगर हमे सही प्रेरणा और सहयोग समलता है तो हम ाऄपनी
सृजनर्ीलता को बड़ा सकते ह ाऄन्यथा नकारात्मक सम्बन्ध हमारे स्वासभमान को िे स पहुांचाते ह और
ाआसी कारण हमारे द्वारा दकये गये कायों म वह गुणवत्ता नह समलती. ाऄत: हम यह मान सकते ह व्यसि
के सृजनर्ील होने म ाईसके सम्बन्धों और सामासजकता की बहुत बड़ी भूसमका है. समासजकता
मानवीय सम्बन्धों पर ाअधाररत होती है ाआस सलए दर्शन, सृजनर्ीलता और मानवीय सम्बन्धों म ाऄटूट
सम्बन्ध है.

सृजनर्ीलता और सामासजकता म कया सम्बन्ध ाआस पर रासधका मेनन जी के यह सवचार बहुत


महत्वपूणश हो जाते ह, “सजस तरह सृजनर्ीलता पररभासषत की जाती है, सजस तरह वह ाईभरती है
और सजन क्षेत्रों म ाईभरती है, यह सब सामासजक तौर पर तय होता है। सृजनात्मकता भी सामासजक
सनर्ममत है। दकस तरह के सृजनर्ील सवचार दकन क्षेत्रों म दकसे समलगे, यह ाईनकी सामासजक भूसमकाएां
तय करती ह। ाऄगर िी या पुरुष के काम कु छ सीसमत दायरों म बांद दकए जाएांगे तो हम ाईनसे दूसरे
क्षेत्रों म ाईत्कृ ष्ट प्रदर्शन करने, वहाां पैदा होने वाली समस्याओं से सनपटने और ाईनम सृजनात्मक भरने
की ाऄपेक्षा कै से कर सकते ह?

ाअर्मथक व्यवस्थाओं का चररत्र, सामासजक चलन और राजनैसतक सत्ता दकस दकस्म की है, ाआससे भी
सृजनर्ीलता का मूकय तय होता है।...सृजनर्ीलता समाज सनरपक्ष नह है, बसकक सजस समय म हम

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रहते ह, वह कै सा है, वहाां दकस दकस्म के सत्ता सवभाजन मौजूद ह, सफलता कै से पररभासषत होती है,
दकसे मूकयवान कहा जाता है, ऐसी बात ाईस पर गहरा ाऄसर डालती ह और वह दकसी ाऄसाधारण
मसस्तष्क की हद म कै द नह रहती, बसकक वह ाऄनेक ाअयामों वाली है और खुद को सवसभन्न तरीकों से
ाऄसभव्यि करती है, जो ाआस पर सनभशर ह दक कोाइ दकस दकस्म के कामों से जुडा है ाआससलए
सर्क्षाकर्ममयों के रूप म सृजनर्ीलता की सांकीणश पररभाषाएां हमारी मदद नह करती। ाईनका
सामासजक सांदभश ाऄपररहायश महत्व रखती ह।... हम यह ध्यान देने की जरूरत है दक सृजनर्ीलता के
ाऄनेक स्वरूप ह, वह ाऄनेक क्षेत्रों म ाऄसभव्यि होती है और वह दकसी म भी ाऄसभव्यि हो सकती है,
बर्ते ाईन्ह गहरााइ के साथ ाईससे रूबरू होने, ददलचस्पी के सवसभन्न क्षेत्रों को खोजने के ाऄवसर सभी को
ाईपलब्ध हों। सृजनर्ीलता के सामासजक सांदभश और क्षमताओं पर िप्पा लगाने या भावी क्षमताओं को
सवकससत व प्रसर्सक्षत दकए जाने के पहले ाईनको वगीकृ त करने से बचने की बात पर ध्यान देना भी
महत्वपूणश है। मुझे लगता है दक हमारी सर्क्षा व्यवस्था जो सामासजक सवभेदों को ददनोंददन िोस करती
जा रही है और गारां टी कर रही है दक गरीब छात्रों को दररि सुसवधाओं, दररि ाअधारभूत ढाांचों और
सीखने के दररि ाऄवसरों वाले दररि स्कू ल नसीब हों, जबदक ाऄसभजनों र्सिर्ाली लोगों, ाऄमीरों और
ाईसे पाने की समथश रखने वालों को ऐसे भव्य स्कू ल ाईपलब्ध हों जो बच्चों की प्रसतभा को बहुसवध क्षेत्रों
की ओर सवकससत कर और बच्चों को सवोत्तम सर्क्षार्ािीय पिसतयों से रूबरू कराएां।10

सार रूप म हम कह सकते ह की दर्शन को पररभासषत करते समय सुझाये गये सबन्दुओं पर ध्यान देना
चासहए. दर्शन और सृजनात्मकता म बहुत महत्वपूणश सम्बन्ध है. दार्शसनकों को चासहए की ाआसके सवसवध
पक्षों का ाऄध्ययन कर और ज्ञान की दूसरी र्ाखाओं द्वारा ददए गये सवचारों और ससिाांतों को ध्यान म
रखते हुए ाऄपने सवचार दे. ाआस सन्दभश म गौट का लेख बहुत महत्वपूणश कड़ी बन जाता है.
सृजनात्मकता सामासजकता से जुड़ा हुाअ है और मानवीय सम्बन्ध ाआसम महत्वपूणश भूसमका सनभाते ह .
ाऄत: तीनों का ाऄध्ययन एक महत्वपूणश सवषय है.

सन्दभश एवम रटप्पसणयााँ:

1. प्रो. दया कृ ष्ण, ज्ञान मीमाांसा, ाऄध्याय प्रथम,राजस्थान चहदी ग्रन्थ ाऄकादमी, जयपुर.
2. प्रस्तुत पररभाषा सवश्लेष्ण मेरे ाऄध्यापक स्व. प्रो. नरदर नाथ गुिा जी और मेरे ाअपसी
बातचीत का पररणाम है.
3. कया ‘दर्शन’ मर गया है?” नया ाआांसडया , http://www.nayaindia.com/buniyad/kya-

darshan-mar-gaya-hain-77955.html

4. रासधका मेनन, “सामासजक सांदभश म सृजनात्मकता”, देर्बन्धु, माचश 2011

http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/5259/9/0#.VL51Z3I5CP813.

5. सृजनात्मकता की यह पररभाषाएां ाआस लेख से ली गयी है: ससथल कु मार द्वारा सलसखत, “वाय
र्ुड ाआांसडसवजुाऄल सडफरसेस बी डेवलप्ड?

12
http://www.publishyourarticles.net/knowledge-hub/education/why-should-

individual-differences-be-developed.html.

6. प्रोसमला ओबरॉय, ाऄसधगमकताश, ाऄसधगम एवम् ज्ञान का मनोसवज्ञान, लक्ष्मी बुक सडपो,

सभवानी (हररयाणा) 2014, पृष्ठ 294-295.

7. बेयशस गौट (Berys Gaut) ाऄपने लेख “दी दफलोसोफी और दक्रएरटसवटी”, दफलोसोफी

कम्पास, 5/12 (2010): 1034–1046, 10.1111/j.1747-9991.2010.00351.x

8. वही.
9. वही.
10. रासधका मेनन, “सामासजक सांदभश म सृजनात्मकता”, देर्बन्धु, माचश 2011

http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/5259/9/0#.VL51Z3I5CP813.

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16
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lxq.k gS ;k fuxqZ.k\ /;krO; gS fd ;g iz'u lkekU; psru ds lEcU/k esa ugha gSA ;g iz'u HkrkZ&
HkksDrk egs'oj vUr;kZeh ds lEcU/k esa gSA
tc f}t laU;klkJe esa inkiZ.k djrk gS] rc vfXulk/; ;K deZ vkSj nsork Kku dks
vkRek esa gh vkjksfir djds vkRe&;kth gks tkrk gSA osnkuqlkj eUokfn us bl fo"k; dk lfo'ks"k
izfriknu fd;k gS&

17
czãkfn xzUFkksa esa ftu eU=ksa dk ;Kkfn ijd O;k[;ku feyrk gS] os mifu"knksa esa v/;kRe
vFkZ esa fy, tkrs gSaA blds vfrfjDr ^nso* ^bUnz* bR;kfn 'kCnksa dk vFkZ mifu"knksa esa
izdj.kkuqlkj ^bfUnz;* ^vkRek* bR;kfn gksrk gSA ;gh ugha ^vf=* ^Hkj}kt* ^fo'okfe=* ^tenfXu*
bR;kfn _f"k uke rd dk fuoZpu v/;kRe vFkZ esa xzg.k fd;k tkrk gSA rSÙkjh;ksifu"kn~ ds
f'k{kk/;k; uked izFkeoYyh esa Kku ds ik¡p vf/kdj.kks& a vf/kyksd] vf/kT;ksfr"k] vf/kfo|k]
vf/kizK vkSj v/;kRe dk egklafgrk ls izfriknu feyrk gSA lcdk vfUre y{; v/;kRe gh gSA
tc fdlh oLrq dk v/;kRe :i ls izfriknu vHkh"V gksrk gS rks mlls ;g vfHkizk; ugha
gksrk fd mldh HkkSfrd o ,sfrgkfld bR;kfn lÙkk gqbZ ;k ugha fdUrq vfHkizk; ;g ugha gksrk fd
HkkSfrd o ,sfrgkfld vfuR; ¼O;kogkfjd½ lÙkk dk Hkh ije y{; o rkRi;Z fuR; ¼ijekFkZ½
vk/;kfRed lÙkk dk izdk'k djuk gh gSA dky fo'ks"k vkSj ns'k fo'ks"k esa lEcU/k fo'ks"kksa ls gksus
okys vorkjkfn blh ns'k dky oLrq ifjPNsn jfgr ijekFkZ rRo dks izdkf'kr djus ds fy, gh
gksrs gSaA tSls ukVd LFkwy o HkkSfrd :i ls fofHkUu ik=ksa ds dk;ksZa dk lkewfgd izn'kZu ek= dk
mu ik=ksa dh izR;{k dFkk ek= gSA ijUrq oLrqr% ;s ik= lw{e o vk/;kfRed :i esa izse] ohjrk]
Øks/k] okRlY;] nq%[k bR;kfn eukso`fÙk;ksa dh thrh tkxrh ewfrZ;k¡ gh gSaA ;s LFkwy ewfrZ;k¡ vFkkZr~
ik= rks ns'kdkykfn ls ifjfPNUu gSa] ijUrq os euksHkko ftudh ;s ewfrZ;k¡ gSa] buds vfrfjDr
ns'kdkykfn esa ¼vU; Hkwr vkSj Hkkoh yksxksa esa½ Hkh jgrs gSaA tc ;s lc u"V gks tkrs gSa] rc ml
egs'oj dh ek;k :i LokfHkUu izd`fr ds xq.kksa esa yhu jgrs gSa vkSj l`f"V dh voLFkk esa iqu% mlh
ls izxV gks tkrs gSaA
}kijkUr esa czt esa vorh.kZ gksus okys d`".k vkSj czt fuoklh yksx Hkh vius fuR; Lo:i
esa cSdq.B ;k xksyksd esa jgrs gSa] ,slk o.kZu feyrk gSA ijUrq ijekFkZr% d`".k ;k fo".kq lef"V7
vkSj O;f"V txr~~ ds vkRek ¼fo'okRek Hkxoku~~ gfj%½ gSa&

vkSj czt xksyksd o oSdq.B lef"V esa ml vkRek dh Loefgek] rFkk O;f"V esa 'kq)kUr%dj.k] ,oa
czt fuoklh mlh vkRek ds vuqdwy eukso`fÙk;k¡ gSaA l`f"V lR; ugha gS] vkHkkl ek= gS] bldk
vfHkUu fufeÙkksiknu dkj.k tks lÙkk gS] og fpUek= gSA og v}; lÙkk fujkdkj] fufoZdkj]
fu/kZed
Z ] fufoZ'ks"k] fuxqZ.k gS] vr% fu"iz;kstu gS] D;ksafd iz;kstu lnk O;fDr dk gksrk gSA ml
v}; lÙkk esa O;Dr&vO;Dr nksuksa dfYir gSa] vr% O;fDr Hkh mlesa LoIuor~ Hkk"krs gSaA og lÙkk
u fdlh dk iz;kstu gS] u mldk dksbZ iz;kstu gS vkSj u mlls fdlh ds fdlh iz;kstu dh
iwfrZ gksrh] D;ksafd mlesa nwljk gS gh ughaA

18
Jqfr] 'kkL= vkSj lUrksa dh leLr ok.kh liz;kstu gSA ;g O;fDr ds fy, gSA iz;kstu gh
O;fDr dk gksrk gSSA Jqfr] 'kkL=] lUr] ok.kh dk iz;kstu ugha ekusx
a s rks og O;FkZ gks tk;xhA
iz;kstu vf/kdkjh ds vuqlkj gksrk gS] vr% ;g ok.kh Hkh vf/kdkjh ds fy, mlds vf/kdkj ds
vuq:i lk/ku dk funsZ'k djrh gSA
vf/kdkjh dk vk/kkj gS vUr%dj.kA vr% leLr ok.kh lc lk/ku lk/; dk fu:i.k
vUr%dj.koku iq#"k ds fy, gSA
lkekU; psru vFkkZr~ czã rks vUr%dj.k Hkh gS vkSj mldk izdk'kd HkhA og ok.kh dk]
eu cqf) dk Hkh fo"k; gh ugha gSA og gS mldk tks izfriknu Jqfr 'kkL= esa gS og Hkh liz;kstu
gS vkSj og izfriknu fu"ks/k eq[k ls gh gSA
og lkekU; psru fdfpr~ lfo'ks"k gqvk fcuk fdlh dk iz;kstu ugha curk vkSj u mlls
fdlh iz;kstu dh iwfrZ gksrhA vr% mldk tks Jqfr 'kkL= esa izfriknu gS og mls fdfŒpr
lfo'ks"k cukdj gh gSA og fufoZ'ks"k gS] fuxqZ.k gS] ;g dguk Hkh mls lxq.k lfo'ks"k ls dq N
fHkUurk] fo'ks"krk nsrk gSA
iz;kstu vUr%dj.koku~ iq#"k dk gS vkSj og iz;kstu gS vUr%dj.k ls lnk ds fy, eqDr
gksuk D;ksafd leLr vk/;kfRed lk/kuksa dk mn~ns'; nq%[k dh vkR;fUrd fuo`fÙk rFkk 'kk'or lq[k
dh izkfIr gh gS vkSj ;g iz;kstu vUr%dj.k la;qDr jgrs iwjk gks ugha ldrkA vUr%dj.k
f=xq.kkfRedk izd`fr dk dk;Z gSA vr% mlesa dksbZ ,d xq.k fuR; tkx`r ugha jg ldrkA mlesa
rks dHkh lRoxq.k] dHkh jtksxq.k rFkk dHkh reksxq.k dk izkcY; gksxk ghA vr% nq[k dh vkR;fUrd
fuo`fÙk dk vFkZ gh gS vUr%dj.k dh vUR;sf"VA
lkekU; psru fu"iz;kstu Hkys gh gks] fdUrq tc og o`R;k:<+ gksrk gS] rc vUr%dj.kk:<+
psru ls mldk rknkRE; gks tkrk gSA bl rknkRE; dks gh czãdkj o`fÙk dgrs gSa vkSj ;gh eqfDr
dk gsrq gS] D;ksafd lkekU; ls ,dRo dk cks/k gksus ij vUr%dj.k dk cks/k gks tkrk gSA rc
vkdk'k dh uhfyek ds leku mldh izrhfr Hkys cuh jgs] fdUrq mlesa O;ogkj lEHko ugha gSA
izrhfr ls rknkRE; gksdj gh O;ogkj gksrk gSA jTtq esa liZ dh izrhfr gS] rHkh rd mlls Hk;]
Hkkxuk( cpuk ;k mls ekjus dk iz;Ru gSA mldh izrhfr Hkys liZdkj cuh jgs] og jTtq gS] ;g
tkurs gh mlds lkFk liZor~ O;ogkj lekIr gks tkrk gSA
o`R;k:<+ lkekU; psru O;ogkj dk fuorZu gSA ,d ckj ,d {k.k ds fy, gh jTtq ds
Bhd Lo:i dk cks/k gks tkus ij mldks ckj&ckj ns[kuk vko';d ugha jgrk vkSj u mlds
lkFk liZ dk O;ogkj gh jg tkrkA ,sls gh vUr%dj.k dk cks/k gks tkus ij mlds lkFk O;ogkj
ugha jg tkrk vkSj vUr%dj.k fcuk psru ds rknkRE; ds dksbZ oLrq ugha gS fd og Lo;a laf{kIr
jgsxk] tSls xxu dh uhfyek Lo;a dqN dj ugha ldrhA
'kjhj dh vR;Ur lkekU; vko';d fØ;k Hkh vUr%dj.k ds lkFk fdfŒpr~ rknkRE; gksus
ls gh gksrh gSA blfy, lIre Hkwfedk esa mudh Hkh fuo`fÙk ekurs gSaA ;g vlEHko gS fd
vUr%dj.k dk cks/k Hkh gks tk; vkSj og jkx}s"kkfn lcds fy, lfØ; Hkh jgsA vr% tgk¡ Hkh ,slk
gksrk gS] v}; rRo cks/k dk dsoy ckSf)d foykl gS vkSj og fdlh dks eqDr ugha djrk( D;ksfa d
lkekU; psru esa cU/ku Fkk gh ugha vkSj ftlesa cU/ku Fkk] og vUr%dj.k ls rknkRE; rksM+dj

19
cU/ku eqDr gqvk gh ughaA rknkRE; VwV x;k gksrk rks vkHkkl ek= vUr%dj.k esa lfØ;rk lekIr
gks tkrhA
;g psru dk o`R;k:<+ gksuk D;k gS\ ;g ,d dfYir fLFkfr gSA tSls LoIu dk jksx
LoIu dh gh vkS"kf/k ls feVrk gS] oSls gh l`f"V dh dYiuk ds dkj.k tks vUr%dj.k dh dYiuk
djds mlls dfYir :i ls rknkRE;kiUu gks x;k gS] og ml dfYir vUr%dj.k dh dfYir
o`fÙk esa dfYir czã dh dYiuk djds bl rknkRE; ls eqDr gksrk gSA czã dYiuk dk fo"k;
curk ugha] vr% o`fÙk esa vk;k czã dfYir gh gksrk gS] fdUrq ;g dfYir czãkdkj o`fÙk ldy
vuFkZ dh fuofrZdk gSA
Jqfr 'kkL= lUrok.kh ek= liz;kstu gSaA ;g iz;kstu l`f"V esa lalkj esa gS vkSj lizk.k
ekuo ds fy, 'kjhj/kkjh ds fy, gSA bl Lrj ij l`f"V] 'kjhj] lalkj& bu lcdks lR; ekudj
gh lk/kd dks pyuk iM+rk gSA vU;Fkk iz;kstu iwfrZ ds i'pkr~ rks tSls 'kjhj rFkk lalkj dk
cks/k gksrk gS( 'kkL= dk Hkh cks/k gks tkrk gSA
bl 'kjhj ,oa lalkj dks lR; ekudj gh ge vuUrdky ls O;ogkj dj jgs gSaA blh esa
tUe ej.k gSA blh esa lq[k&nq%[k gS vkSj blh ds lq[k&nq%[k] tUe&ej.k ds cU/ku ls NqVdkjs
dk lk/ku crykrs gSaA vc lkekU; psru dks NksM+ nsa rks blesa nks psru vkSj Li"V gSa ,d 'kjhj
esa vUr%dj.k esa vfHkeku djus okyk tho psruA ;gh tUe ej.k ds pDdj esa iM+k gSA ;gh
lq[k&nq[k dk HkksDrk gS vkSj blh dks lk/ku djds eqDr gksuk gSA

bl l`f"V dk lapkyd ,d psru gSA og l`f"V esa O;kid jgrk Hkh blls ijs gS vkSj bl
'kjhj esa vUr%dj.k esa gh og vUr;kZeh :i ls fLFkr gSA og egs'oj minz"Vk gS] vuqeUrk gSA
oLrqr% ogh drkZ vkSj HkksDrk Hkh gSA
og vUr;kZeh vUr%dj.k esa gksdj Hkh dsoy minz"Vk gSA og vUr%dj.k dk eq[; nz"Vk
ugha gS vkSj vUr%dj.k esa rknkRE;kiUu gksdj drkZ Hkh ugha cuk gSA drkZ rks gS izd`frA
vUr%dj.k vkSj ofg%dj.k ¼bfUnz;k¡½ nksuksa izd`fr ds dk;Z gSaA vr% bfUnz;ksa ls ;k eu ls tks dqN
gksrk gS] lc dk;Z izd`fr ds xq.kksa ls gh gksrk gS&

20
oLrqr% tho fdlh dk;Z dk drkZ ugha gS] fdUrq vgadkj ls ewfNZrizk; gksdj izd`fr ds
xq.kksa ls gq, dk;Z dks og vius esa vkjksfir djds vius dks drkZ eku ysrk gSA ;g eku ysus ds
dkj.k gh deZ ds 'kqHkk'kqHk Qy dk og HkksDrk gks tkrk gSA
tks egs'oj gS] izd`fr dk lapkyd gS] ogh okLrfod HkksDrk gSA ysfdu og blh
'kjhjkfHkekuh tho dk HkrkZ gS bldk Hkj.k&iks"k.k ogh djrk gS] vr% tc vKkuh tho vius dks
drkZ eku ysrk gS rc og bldh ekU;rk dk vuqeksnu dj nsrk gSA og vuqeUrk cuk jgrk gSA

1- v"Vkn'k iqjk.k n'kZu i`"B&11


2- fu#Dr 2@16@2
3- fu#Dr 1@20@1
4- xhrk & 15&16] 17
5- euqLe`fr & 6-25
6- euqLe`fr & 6-83
7- Hkkxor 12-5-1
8- Hkkxor & 4&29&50] 51
9- xhrk & 13&20] 21] 22
10- xhrk & 3-27

21
21 oha lnha ekuo bfrgkl ds fy, cgqr gh ifjorZudkjh ;qx ekuk tkrk gSA vkt ftl
xfr ls ifjorZu gksrk gSA mldh folaxfr;ksa vkSj okSpfjd la?k"kZ blds fy, mÙkjnk;h gSaA bl
xfr ls blls igys dHkh Hkh ifjorZu ugha gqvk gSA bUgha ifjoZruksa ds ifj.kkeLo:Ik lekt dks
vusd leL;kvksa dks lkeuk djuk iM+rk gSSAa lkekftd izxfr ds fy, bu leL;kvksa dk lek/kku
vko”;d gSA
O;fDr dh Lora=rk ds fy, /keZfuisZ{khdj.k dh izfØ;k dks ekuokf/kdkj dh vksj izsfjr
djrh gSA blds uke ls Li’V gksrk gS fd bl izdkj dh oká izfØ;kvksa ds ek/;e ls loZ/keZ
&leHkko dh Hkkouk mÌsf'kr gksrh gSA /keZfuisZ{khdj.k dh Lora=rk dks Lohdkj djus ds fy, gesa
izkIr Lora=rk dk guu u gksus dh n'kk esa ge lR; :ih /keZ dks Lohdkj djrs gSaA blh izdkj
ge /keZ dh /kkj.kk dks le> ysrs gSaA Þfo;uk ?kks"k.kk ds vuqlkj] fyax vk/kkfjr fgalk] lHkh
izdkj dk ySafxd mRihM+u rFkk 'kks"k.k ftlesa lkaLÑfrd iwoZxzg ,oa efgykvksa dk vUrjkZ"Vªh;
voS/k&O;kikj Hkh lfEefyr gS tks ekuo O;fDr dh xfjek ,oa ewY; ls vlaxr gS] vo'; lekIr
gksuk pkfg, rFkk ;g jk"Vªh; dk;Zokgh }kjk dkuwuh mik;ksa rFkk vkfFkZd] lkekftd fodkl]
f'k{kk] lqjf{kr izlwfr ,oa LokLF; lko/kkuh rFkk lkekftd leFkZu ls fd;k tk ldrk gSaAÞ1
Hkkjr ds lafo/kku esa vusd izdkj ds ewyHkwr vf/kdkjksa dks Hkh laofs 'kr djus dk izko/kku gSA
Hkkjrh; lafo/kku /keZfujis{krk ds vk/kkj ij tkfr] Hkk’kk] /keZ] fyax jkT; bR;kfn ds lkFk HksnHkko
ugha djsxkA bl izdkj dh fopkj/kkjk ekuoh; fgrksa dh j{kk ds fy, izR;sd a ukxfjd lerk
iznku djrh gSA pkgs dksbZ Hkh ukxfjd xjhc gks ;k iw¡thifr gks] i<k+fy[kk gks ;k vui<+ gks bl
izdkj lHkh ds fy, lerk iw.kZ fopkj/kkjk ns'k ds lafo/kku esa izkIr gSA ftls izR;sd ekuo gksus ds
ukrs mls leku vf/kdkj izkIr gksrk gSA Hkkjr esa ges'kk /keZfujis{k jkT; dh laKk ls foHkwf"kr
fd;k tkrk jgk gSA ;|fi ;g “kCn gekjs Hkkjrh; lafo/kku esa dgh ugha mYysf[kr gSA ftl
izdkj ls lasdqyj “kCn dk fgUnh :ikUrj.k cgq/kk /keZfujis{k dh ckr djrs gSaA

'kks/k i= /keZfujisZ{krk ,oa ekuokf/kdkj dh vo/kkj.kk ,d izdkj dk f}rh;d lkexzh


ladyu dk fo"k; gSA ftlesa la'ys"k.kkRed v/;;u i)fr dks pquk x;k gSA 'kks/k izfof/k esa
vkRelk{kkRdkj] fo}kuksa dk ekxZn'khZ ifj.kke] i= if=dkvksa bR;kfn ds }kjk v/;;u dk vk/kkj
cuk;k x;k gSA f’k{kk ds ek/;e ls /keZfuisZ{khdj.k dks izksRlkfgr djuk vkSj blds ykHkksa dk
Kku izkIr djkukA LoPN jktuhfr dk vk/kkj iznku djrk gSA ftlds vk/kkj ij fopkj i)fr
dk fu:i.k gh /keZfuisZ{krk vkSj ekuokf/kdkj dh Lora=rk iznku djrk gSA blds lkFk&lkFk
lUnHkZ xzUFkksa gsrq iqLrdky;ksa] bUVjusV] i=] if=dkvksa dks Hkh 'kks/k fuekZ.k dk iz;ksx fof/k lEEkr
cukus dk iz;kl djrk gSaA

22
'kks/k i= dk mÌs'; /keZfujis{krk ,oa ekuokf/kdkj dh vo/kkj.kk dks le>us dk iz;kl
ekuo dks lqeqfpr vf/kdkj dh ckr ekuokf/kdkj vk;ksx djrk gSA ftlls izR;sd O;fDr lq[kh
vkSj fujksx jgsaA thou vusd ifj.kkeksa ds vk/kkj ij /keZfujis{krk ,d ekuo dk vk/kkj iznku
djrh gSA ftlls ekuoh; thou ds ewY;kas dh fn'kk r; gks tkrh gSA ;s lHkh fl)kUr ekuo
dY;k.k dh n`f"V ls fu:fir fd;s x;s gSa] ftlesa ekuokf/kdkjksa dks lajpukRed vkSj
vfHkO;DrkRed nksuksa n`f"V;ksa ls ns[kk tk ldsA ßO;fDr 'kCn dk iz;ksx ml O;fDr ds lUnHkZ esa
fd;k x;k gS] ftlds dCts ;k 'kfDr esa fdlh nLrkost vFkok pht ds gksus dk fo'okl gSA bl
:i eas bl /kkjk dh Hkk"kk bruh lkekU; gS fd blesa izFke n`"V~;k O;fDr* dks lfEefyr ugha
fd;k x;k gSAÞ2 laoS/kkfud n`f"V ls ekuokf/kdkjksa dks izk;% O;fDr ds thou esa izkIr gksus ckys
vusd vf/kdkjksa ds laxBu ds :i ns[kk x;k gSA blds lkFk&lkFk ekuokf/kdkjksa ds bl foosd
ds igyw dks /;ku esa j[kdj ekuo dks vf/kdkj izkIr gksA f'k{kk ds vusd ek/;eksa ls
/keZfuisZ{khdj.k dks iYyfor djus ds fy, vusd izdkj ds ykHkksa dks izkIr djus dk dkj.k ekuk
tkrk gSA
1- lkEiznkf;drk ds lkFk&lkFk /keZfujis{krk esa lgk;d fl) gks tkrh gSA
2- ckSf)d {kerk ds fodkl ls ladqfpr fopkjksa dks vyx fd;k tk ldrk gSA
3- fo'ocU/kqRo dh Hkkouk ls vksr&izksr gksdj ns'k izse dh Hkkouk ls izlkj&izlkj fd;k
tkuk pkfg,A ftlls lerk vkSj Lora=rk dk guu ugha gksrk gSA
4- vU/kfo'oklh ijEijkvksa vkSj :f<+oknh fopkj/kkjkvksa dks [kRe dj lqfprk iw.kZ thou thus
ds fy, ekuo dks vxzlj gksuk pkfg,A

ekuo dh Lora=rk esa ekuokf/kdkj dh vo/kkj.kk fufgr gSA ftlds ihNs ekuoh; thou
ds izR;sd leL;k,sa vkSj fopkj/kkj,sa lkfey gSA ßvkfFkZd] lkekftd ,oa lkaLÑfrd vf/kdkjksa dh
izlafonk rFkk flfoy ,oa jktuhfrd vf/kdkjksa dh izlafonk esa eq[; vUrj ;g gS fd igys okyk
vFkkZr~ vkfFkZd izlafonk esa izorZu dk ra= vkfFkZd ,oa lkekftd ifj"kn~ gS tcfd nwljh vFkok
jktuhfrd izlafonk ;g dk;Z ekuo vf/kdkj lfefr }kjk fd;k tkrk gSAÞ3 gekjs orZeku
iz;kstuksa ds fy, ekuokf/kdkj dh 'kfDr;ksa ds }kjk ekuo fgr dks /;ku esa j[kus dk iz;kl gSA
blls 1858 ls ihNs tkus dh vko';drk ugha gSA blls fczfV'k ljdkj ds v/khu gksus okys
Hkkjrh; izHkqlÙkk ds }kjk bZLV bafM;k dEiuh ds ls ysdj vius fczfV'k ikyZeaVs us fczVsu dh
ljdkj }kjk lh/ks iz'kkfud dk;Z iz.kkyh dks Hkkjrh; 'kklu dk igyk dkuwu cuk;k x;k FkkA
Hkkjrh; iz'kklfud iz.kkyh Hkkjrh; dkuwu vf/kfu;e usa ekuo dks laj{k.k dh fopkj/kkjk dks
lapkfyr djrk gSaA ;g vf/kfu;e gekjs Hkkjrh; losZ{k.k dk vk/kkj Hkh laoS/kkfud LFky jgk gSaA
blesa ekuokf/kdk ds lezkV ds vkR;fUrd fu;a=.k dk izeq[k fl)kUr FkkA blesa ns'k ds iz'kklu
esa Hkkjrh; uxfjd vkSj tuer dks fo'ks"k LFkku jgk gSA lafo/kku dk izk:i tSlk fopfjr fd;k
tkrk gSA ;g ns'k dsoy 'kklu ds oSpkfjd ra=ksa ds miyC/k gksuk pkfg,A ;g lÙkk esa fdlh
LFkkuh; vkSj fo'ks"k ny dks LFkkfir djus dh iz;qfDr fof/k gSA dqN ns'kksa esa ;g lÙkk ifjofrZr

23
dk vkogku fd;k x;kA lÙkk esa dkSu gks] bls turk ds fuf'pr djrh gSA tSlk fd gksuk gh
pkfg,] ;fn bl ra= dks yksdra= ds ijh{k.k ij [kjk mrjrk gSA lafo/kku ds rS;kj gksus rd]
bl vf/kfue;eksa ds iwoZ dk bfrgkl jktkvksa ds v/khu FkkA ftldsa dkj.k jktkvksa ds nkxh
eaf=;ksa ds dkj.k mUgsa u tkus fdrus d"V Hkksxus iM+rs FksA Hkkjrh; lkekftd ijEijk esa tc
lafo/kku dh dk;Ziz.kkyh rS;kj gqbZ ml le; lekt dks leqfpr U;k; izkIr gksus yxrk gSA ogk¡
ls jktk ds mÙkjnkf;Ro jkT; ls gV tkrk gSA og izfØ;k la?kh; jkT; 'kklu ds gkFk esa vkdj
lafo/kku ds v/khu gks tkrh gSA bl vf/kfu;e ds ykxw gksus ij] jktk dh 'kfDr;ksa dk iz;ksx
[kRe gks tkrk gSA Hkkjr 'kklu vf/kfu;e esa izkarh; lfefr;ksa vkSj fo/kkueaMyksa dks ^^LFkkuh;
Lo'kklu** dh ckrksa ij fo/kku ifj"kn dh vf/kfu;fer djus okyh 'kfDRk Hkh iznku dh x;h FkhA
rc ;gk¡ /keZ fujis{krk ds lEcU/k esa /kkfeZd dk;ksZa ds izfr fof'k"B vfHko`f) dh Lora=rk dh ckr
vkrh gSA ftlesa dgk x;k gS fd ßfdlh Hkh O;fDr dks ,sls djksa dk lank; djus ds fy, ck/;
ugha fd;k tk,xk ftuds vkxe fdlh fof'k"V /keZ ;k /kkfeZd laiznk; dh vfHko`f) ;k iks"k.k esa
O;; djus ds fy, fofufnZ"V :i ls fofu;ksftr fd, tkrs gSaAÞ4
ftlls /keZfujis{krk vkSj ekuokf/kdkj dh jkT; i{k/kj ds :i esa ekuokf/kdkj vk;ksx dks
Hkstrh gSA ftllsa bu fjiksZVksa esa vkus okyh dfBukbZ;ksa ds lUnHkZ esa fdlh Hkh lfefr dks ck/kd
ugha cuk;k tk ldrk gSA ftl ihf<+r ds fy, jkT; vk;ksx i{k/kj ds :i eas dk;Z djrk jgrk
gSA mlesa lEcU/k esa jkT; ekuokf/kdkj vk;ksx ds dqN fn'kk funsZ'kd jkT; i{kdj ds fjiksZV ij
fopkj foek'kZ dj fu;Z.k izfroknh dks lqukrs gSaA bl gsrq fo|eku vf/kfu;eksa ls Lora= Hkkjr ds
lafo/kku esa fofufnZ"V gSA ftuds os izfrfuf/k&'kklu dh ,d bdkbZ ds :i esa jkT;ksa esa LFkkfir
gSA bu LFkkuh; fudk;ksa ds dk;Z dh fuxjkuh vkSj ihf<+r dks U;k; fnykus ds fglkc ls fd;k
tkrk gSA
euokf/kdkj fdlh Hkh ukxfjd ds lkFk gksus okys vU;k; dks U;k; fnykus dh ?kks"k.k
djrk gSA blds lUnHkZ esa pkgs og iq:"k gks ;k efgyk nksuksa dks leku :i ls vf/kdkj dh ckrs
djrs gSaA vk/kqfud ;qx esa efgykvksa ds izfr laons uk dks fu:fir djus ds fy, efgykvksa ds
vf/kdkjksa dks vUnksyu ds ek/;e ls Hkh rhoz xfr dh fn'kk nsus ds i{k esa dkjxj fn[kkbZ nsrk
gSA ß1925 esa esfDldks flVh esa gq;s efgykvksa ij izFke fo'o lEesyu ls ysdj nks n'kdksa dh
efgykvksa ds fy, iq:"kksa ds leku vf/kdkjksa ds vkUnksyu ls egRoiw.kZ ifjorZu rFkk mUufr gqbZ
gSA bl nkSjku vUrjkZ"Vªh; laf/k;k¡ gqbZ gSA rFkk jkT; ljdkjksa us vusd dkuwu ikfjr fd;s gSaAÞ 5
blds lkFk&lkFk ,d egRoiw.kZ iz'u mBrk gS fd efgykvksa ds fy, vusd dkuwu cus gSaA fdUrq
lqjf{kr fdruh gSaA cgqr gh fopkj.kh; iz'u gksrk tk jgk gSA bu lHkh ds mUur thou esa D;k
efgykvksa ds thou esa lq/kkj gqvk gS] fd ughaA fdUrq vusd ckrksa ds vkus ls dqN egRoiw.kZ
iz'u mRiUu gksrs gSaA ftlds dkj.k oSpkfjd ifj.kkeksa ds vk/kkj ij efgykvksa dk lkFkZd lq>ko
feys gaSA tcfd iw.kZ :i ls ;g Hkh ugha dgk tk ldrk gS fd efgykvksa dks iw.kZ U;k; izkIr gq,
Hkh gS ;k ughaA tcfd ;g dgk tkrk gSA jktuhfrd n`f"V gks ;k lkekftd] vkfFkZd vkSj
lkaLÑfrd {ks=ksa esa Hkh efgykvksa ds lkFk HksnHkko vkSj vi;l dh uhfr viukbZ tkrh jgh gSA
ftldk eq[; dkj.k vf'k{kk] xjhch] vkfFkZd vlekurk] lwpuk ds ek/;eksa dk fu:i.k vkSj muds
rd tkudkjh dk vHkko vkfn dkj.kksa ls ihNs gaSA ßdqN {ks=ksa esa fLFkfr cM+h gh xEHkhj gSaA ,d
vuqeku ds vuqlkj] fo'o dh nks&frgkbZ efgyk;sa vf'kf{kr gSa rFkk f'k{kk ds {ks= esa mudh izxfr

24
iq:"kksa dh vis{kk dkQh eUn gSaA vkSlru iq:"kksa dh vis{kk efgykvksa ds osru leku dk;Z ds fy,
30 ls 40 izfr'kr de gSaAÞ6 blls vleuk ds Lrj vkSj c<+s tk jgs gSA fdUrq dqN gn rd
ekuokf/kdkj vk;ksx dh ftEesnkfj;ksa vkSj 'kfDr;ksa ds dkj.k mUgsa vf/kdkj izkIr gks jgs gSaA

/keZfujis{krk O;fDr ds vkRe fpUru dk fo"k; ekuk tkrk gSA tcfd ekuokf/kdkj ekuo
ds vkUrjfjd vkSj oá laj{k.k ds fy, thou vkSj 'kjhj dk leUo; djrk gSA gSA bUgha xq.kksa ls
euq"; esa thou ds izfr n.M vkSj U;k; dh izfØ;k dk fodkl djrk gSA /keZfujis{krk euq"; dh
gh rjg lekt ds vusd xq.kksa dk leUo; ek= ekuk tkrk gSA blh gsrq oSKkfud folaxfr;ksa dk
fu:i.k gksus ls lkekU; /keksZa dks NksM+dj djuk iM+rk gSA buds nks"k ds Hkh mik; crk;s x;s
gSA7 D;kasfd /keZ ls gh laLdkj mRiUu gksrs gSA bUgha laLdkjksa ds dkj.k U;k; dj ikuk ;k
vU;k; u djuk Hkh O;fDr lh[krk gSA ftllsa ekuokf/kdkj dh xfjek Hkh lqfuf'pr gksrh gSA
blh esa lekt vkSj jk"Vª dk fuekZ.k Hkh fufgr gSA

1- MkW- ';ke fd'kksj diwj] ekuo vf/kdkj] lsUVªy ykW ,tsUlh] bykgkckn] 2008] i`"B 73
2- MkW- eqjyh/kj prqosZnh] n.M izfØ;k lafgrk] bykgkckn ykW ,tsUlh ifCyds'kUl~] bykgkckn]
prqnZl laLdj.k] i`"B 81
3- MkW- ';ke fd'kksj diwj] ekuo vf/kdkj] lsUVªy ykW ,tsUlh] bykgkckn] 2008] i`"B 53
4- ih-ds- Hkë] Hkkjr dk lafo/kku] vkn'kZ fof/k izdk'ku] fcykliqj ¼N-x-½ 2016] i`"B 10
5- MkW- ';ke fd'kksj diwj] ekuo vf/kdkj] lsUVªy ykW ,tsUlh] bykgkckn] 2008] i`"B 79
6- ogh] i`"B 79
7- MkW- jktcyh ik.Ms;] fgUnw /keZdks'k] mÙkj izns'k fgUnh laLFkku] y[kuÅ ¼m-iz-½] 2003]
i`"B 340

25
oSf'od leL;kvksa ds funku esa dY;k.kdkjh jkT; ds fy, /keZ dh egrh vko';drk
jk"Vªh; ,oa vUrjkZ"Vªh; Lrj ij bl fo"k; esa 'kks/k i= dh vg~e izklafxdrk gksxhA vkpk;Z
pk.kD; jkT; ds fuekZ.k esa vFkZ vkSj /keZ dks egRoiw.kZ ekurs gSaA

/keZ ,oa dk;Z nksuksa gh vFkZey


w d izrhr gksrs gSaA bUgha dks dk;Z ds vFkZ dk ewy dkj.k
ekuk tkrk gSA blh izdkj ls cqf) iwoZd FkksMsa+ dk;Z djus ij flf) dh izkfIr gksrh gSA iwoZ
iz;Ru ds }kjk fd;k gqvk dksbZ Hkh dk;Z vlg~t ugha gksrk gSA lHkh dk;Z ljy vkSj dY;k.kdkjh
gksrs gSaA /keZ gh lR; gS mlds fcuk euq"; dk thou O;FkZ gSA euq"; /keZ dks vkfRed :i ls
/kkj.k djrk gS] mls gh ¼lR;½ /keZ dgrs gSaA tc O;fDr cká :i esa /kkj.k djrs gSaA og /keZ
:ih pknj gSA ftldksa vaxzsth esa ^fjyhtu* dgk tkrk gSA /keZ ls rRi;Z lR;fu"Bk ls vkpk;Z
pk.kD; /keZ ds }kjk jkT; dks dY;k.kdkjh izHkqrk laiUu cukrk gSA mlh izdkj egkRek fonqj
egkHkkjr esa dkSjoksa vkSj ik.Moksa ds chp jktuhfrd ruko ds lEcU/k esa dgrs gaS fd vkidk ;g
/keZ ugha dgrk gS] vius HkkbZ&ifjokjksa dks fgLlk u nsA vkidk /keZ gS fd vids HkkbZ ik.Moksa dks
jkT; dk fgLlk fn;k tkuk pkfg,A gesa yxrk gS fd dksbZ Hkh dky jgk gks mlus HkkbZ&HkkbZ esa
fookn] jkT; dks ysdj la?k"kZ] fL=;ksa dks ysdj vlekurk gks ;k la?k"kZA fdUrq tc ge nk'kZfud
rkSj ij bl fopkj/kkjk dks ij[kus dk iz;kl djrs gSaA rc ;g la?k"kZ /keZ lEer jgk fn[kkbZ nsrk
gSA /keZ vkSj v/keZ ;ss nksuksa ,d flDds ds igyw gSa tgk¡ /keZ mHkj dj lkeus vkrk gS ogk¡ nwljk
i{k vius&vki no ¼ihNs gV tkrk gS½ tkrk gSA blh lEcU/k esa egkRek fonqj us ik.Moksa ls /keZ]
vFkZ] dke esa Js"Brk dh ppkZ djrs gSaA buesa lcls Js"B dkSu gS] egkRek fonqj ds dgrs gSa fd
/keZ lcls Js"B gSA blds lEcU/k esa vtqZu ls iwNk x;kA vtZqu dgrs gSa fd vFkZ gh Js"B gSA
vFkZ ls /keZ fØ;k dks fd;k tk ldrk gSA vFkZ ls dkeukvksa dh izkfIr dh tk ldrh gSA mlh
izdkj udqy vkSj lgnso Hkh dgrs gSa fd vFkZ vkSj dke Js"B gSA blds fcuk ekuo fodkl dh
dYiuk ugha dh tk ldrh gSA Hkhe dgrs gSa fd dke ds fcuk dqN Hkh laHko ugha gSaA ;gk¡ rd
dkeukvksa dh iwfrZ gsrq vkpk;Z eqfu] _f"k;ksa us vius thou dks [kik;k gSaA o"kksZa&o"kksZa rd riL;k
fd;k gSA dkeuk ds fcuk u dksbZ /ku izkIr djrk gS vkSj u /keZ ds ckjs esa gh fpUru djrk gSA
mnkgj.k Lo:i ngh ls eD[ku dk fuekZ.k gksukA mlh izdkj dke gh Js"B gSA fdUrq /keZ] vFkZ]
dke rhuksa dks cjkoj lsou tks ugha djrk og lcls cM+k fuÑ"B gSA blds lEcU/k esa /keZjkt
;qf)f"Bj dgrs gSa fd O;fDr dks vuklDr gksuk pkfg,A2 ftlls og eqDr gks ldsA blls ;g
fu"d"kZ fudyrk gSA ftl o.kZ lekt] jkT; esa /ku ugha gSA og O;FkZ gSA mlh izdkj 'kwnz oxZ
vFkZ ls oafpr gksus ds dkj.k /keZ dh iz/kkurk rks Hkjh gqbZ gSA fdUrq og lQy ugha gqvk gSA

26
D;ksafd mlesa /keZ loZJs"B le>rk jgkA ftlus vFkZ dks Js"B le>k gS vkt vk/kqfud le; esa
Hkh mPp vkSj izxfr dh vksj c<+rk tk jgk gSA ftlus /keZ dks igpkuk mldk vfLrRo gh ugha
fn[kkbZ nsrk gSA ;s dSlh folaxfr gSa ;g vk/kqfud ekuo ds lkeus ,d pqukSrhiw.kZ iz'u gS\
vkpk;Z 'kqØkpk;Z dh ckr djsa rks gesa jk"Vª ds ekuo dY;k.k vkSj jkT; ds dY;k.k esa 'kqØ
vlqjksa ds xq: gksrs gq, Hkh mUgksaus vius /keZ dks ugha NksM+kA vlqjksa dks ewY; f'k{kk uSfrd :i
ls iznku fd;sA ,d xq: dk izse lEiw.kZ jk"Vª dks txk nsus okyh ftKklk og gSA ftlesa
e`rlathouh fo|k ds }kjk dp dks ftUnk djuk ,d lPps fu"Bkoku xq: dk ije~ /keZ gSA fQj
Hkh og /keZ dks ugha Hkwys ;g ,d ekuoh; /keZ dh dYiuk FkhA vxj ge orZeku thou dh ckrs
djsa rc vjktdrk] pksjh] cykRdkj >wBs vkjksi] vuSfrdrk Hkjs] jkT; esa ,d fodB fLFkr iui
jgh gSA bldk dgha&u&dgha O;fDr /keZ dks ugha igpku ik jgk gSA blfy, uSfrd ewYw ;ksa vkSj
/keZ ls HkVdrk tk jgk gSA
blh lEcU/k esa vUrjk"Vªh; Lrj ij ns[krs gSa rks vkpk;Z c`gLifr nsoxq: gksrs gq, Hkh /keZ
dh fo'ks"krk dks crk;k fd /keZ ds fcuk O;fDr dk dksbZ vfLrRo ugha gSA jktk Hkr`gfj us Hkh
Hkksxfoykl thou ls tc /keZ dk Kku izkIr gksrk gSA rc Hkr`gfj vius thou dks oSjkX; iw.kZ
thou O;rhr djus ds fy, fudy tkrs gSaA ftl Hkh fo}ku us v/keZ dk lgkjk jkT; ds
dY;k.k esa fy;k gS] mldk loZuk'k gqvk gSA vkpk;Z dqy dh ckr djsa rc xq:nzk.s kkpk;Z tSls
egku Kkuh ,d f'k"; ls Ny djds vxwBk ek¡xaAs vius iq= v'oLFkkek dks nw/k fiykus dss fy,
dkSjoksa dh ikB'kkyk esa v/;kid cusA ogk¡ ij v/keZ ds lkFk pyus ds dkj.k mUgsa vius iq=
vkSj Lo;a dks [kksuk iM+kA ftldksa loZJs"B /kuq/kZj cuk;k mlh ds }kjk e`R;q dks Hkh izkIr gq,A
;g vtqZu ds fy, /keZ lEer dk;Z jgk gksxk] D;ksafd lR; ges'a kk ls lR; jgk gSA /keZ ;g ugha
ns[krk fd fdruk uqd'kku gksxk vkSj esjk ijk;k dkSu gS\ v/keZ ls lHkh dkyksa esa lagkj gqvk gSA
/keZ dh ges'kk fot; gqbZ gSA blhfy, ;qf)f"Bj dks /keZjkt ds lEcks/ku ls lEcksf/kr fd;s x;sA
fdUrq ,d i{k ij /;ku fn;k tk;A rc yxrk gS fd /keZjkTk ;qf)f"Bj dk /keZ f}rh; i{k dh
n``f"V esa ugha dgk tk ldrk] fd iRuh dks tq,as tSls ?k`f.kr [ksy esa nko ij yxkuk pkfg,\
,sls ÑR;ksa dk ifj.kke vfu"Bdkjd gksrs gSaA blh lEcU/k esa pk.kD; dgrs gSa fd e)iku vkSj
tq,sa v/keZ dk lgkjk ysus oky O;fDr vkfn gks mlds pfj= ghu gksus esa ld ugha djuk pkfg,A
bl izdkj ds O;fDr vf/kdre :ikas esa Hkz"V gksxasA og vius v/khu djus ds fy, tq;sa tSls [ksy
[ksy [ksyrs gSaA jktk fl)ks/ku ds iq= fl)kFkZ ,d jktk ds iq= gksrs gq, firk dh bruh lqfo/kk
djus ds ckotwn Hkh og jkT; ds dY;.kdkjh Lo:i dks ns[kk] ftlesa nq%[k gh nq%[k fn[kkbZ nsrk
gSA rc fl)kFkZ dk eu gh fopfyr gks tkrk gSA rr~{k.k og oSjkX; dks /kkj.k dj ysrs gSaA Kku
izkIr djus dh ijkdk"Bk ds }kjk cq)Ro dk Kku izkIr gksrk gSA uSfrd O;oLFkk dks _Xosn esa
_r~ dgk x;k gSA ,d i{k ij ns[kk tk;s rks osnksa vkSj mifu"knksa ls gesa jkT; dY;k.k ds /keZ
lEer vkpkj.k dk Kku _r~ ls Hkh izkIr gksrk gSA bl izÑfr ds pfØ;dj.k dh izfØ;k Lo:i
/keZ dk fuekZ.k gh _r~ ls gksrk gSA ßizfl) nk'kZfud gsjkYM gkSQMhax dk er gS fd ßeuq"; ds
vPNs ;k cqjs deksZa dk Qy u"V ugha gksrkAÞ3 blh ds rkjrE; esa lEiw.kZ Hkkjrh; n'kZu dk /keZ
ds LkkFk xgjk lECkU/k gSA euq"; ds lkjs drZO; deZ Qy ij gh fuHkZj djrk gSA

27
orZeku le; ds ftl dY;k.kdkjh jkT; dh dYiuk dh tk jgh gSA ogk¡ oSpkfjd
Øk¡fr;k¡ meM+ jgha gks] ftldk lek/kku dsoy /keZ dj ldrk gSA vusdkas iz'u [kM+s gksrs gSa fd
tc /keZ Lo;a ladV eas gks rc ,slh leL;kvksa dk lek/kku dkSu djsx a k\ D;k euq"; dh
ftthfolk {kh.k gks xbZ gS\ D;k lkspus dh {kerk [kRe gks xbZ gS\ D;k dY;k.kdkjh jkT; dh
dYiuk ek= ls euq"; dh oSpkfjd leL;k dk gy fd;k tk ldrk gS\ gesa yxrk gS fd blds
fy, gekjh Hkkjrh; lkaLÑfrd ijEijk,sa bl ij ,dtqV gksdj fopkj djrh gSA /keZ ds lR;
:ih cwn ls izR;sd O;fDr ftKklkoku gks dj dY;k.kdkjh jkT; dh uSfrdrk ds :iksa dks lkspus
ds fy, n`<+ ladfYir gksA ,sls /keZ :ih izdk'k ds ;'k ls lkjk fo'o izdk'koku gksxkA ,slk
'kks/kkFkhZ }kjk bl 'kks/ki= ds ek/;e ls vdka{kk lEiw.kZ jk"Vª ds dY;k.k fgr esa izklkafxd dk
pquko fd;k x;k gSA ftldh lQyrk dh vk'kk jk"Vª ds izR;sd ekuo ds dY;k.k ij fuHkZj gSA
oSf'od leL;kvksa dks ysdj lEiw.kZ lalkj O;kdqy gSA bldk ewy dkj.k XykscyokfeZax
dk QSyrk izdksi ftlesa fo'kSyh xSlksa ds dkj.k vkt ekSle xeZ gksdj cgqr gh ifjofrZr gks
x;k gSA ftl izdkj ls QSDVªh ds fudyus okys /kq;s] ey] fÝt] ,-lh- vkSj vU; vof'k"V inkFkksZ
ds dkj.k cgqr gh ladV fn[kkbZ ns jgk gSA oSKkfudksa dk ekuuk gS fd bl XykscyokfeZx ds xeZ
gksus ij ihus okys ikuh] lw[kk] ck<+] egkekfj;k¡ bR;kfn ladV mRiUu gksus dh laHkkouk,¡ fn[kkbZ
ns jgh gSA blh ok;qe.My ds iznwf"kr gksus ls ekuo ij iM+us okys gkfudkjd vlj ls euq"; dh
psruk dh fLFkfr dk Lo:i Hkh cny tk jgk gSA bUgh ifjorZuksa ds dkj.k orZeku ifjn`'; esa
vuSfrdrk dk cgqrk;r esa cksyckyk ns[kus dks fey jgk gSA euq"; dh psruk Hkax gksus ij
vk/;kfRed ijEijkvksa ls HkVd dj] O;fHkpkj] nqjkpkj] pksjh] uSfrd ewY; foghu dk;Z dks vatke
nsus yxk gSA fo'o ds lkeus orZeku le; esa ekuoh; ewY;ksa dk Hkh ladV oSf'od Lrj ij
fn[kkbZ ns jgk gSA bl ok;qe.My ds xeZ gksus ls vusdksa tho&tUrqvksa dh iztkfr;k¡ foyqIr gks
x;s gSa vkSj foyqIr ds dxkj esa gSA i;kZoj.k dk laUrqyu Hkh Hk;kokg gSA ikS/kksa dks lajf{kr djus
ls ok;qe.My dks B.Mk djus okyh LoPN gok ds fy, LoPN ikS/kksa dh furkar vko';drk gksrh
gS] ftllsa ekuo dks thounk;uh vueksy vkDlhtu izkIr gksrh gSA fdUrq vkt ml rjg ds
ikS/kksa dh vfu;af=r dVkbZ lsa vkDlhtu dh Hkh leL;k,sa bl le; Hk;kokg gSA euq"; us bu
vPNs ikS/kksa ls cktkjhdj.k djuk 'kq: dj fn;k gSA ml cktkjhdj.k esa ikS?kksa ls ,slksa vkje dh
oLrqvksa dk fuekZ.k djds /ku dks izkIr fd;s tk jgs gSaA fQj iz'u [kM+k gksrk gS fd oSf'od
leL;k O;fDr ds cká vkoj.k ls gS tcfd v/;kRe dk lEcU/k ekuo ds vkUrfjd psr uk ls gSA
vk/;kfRed psruk dks osnkUr ds ifjizs{; esa rks egRoiw.kZ ekuk tkrk gSA blds lkFk&lkFk ;g Hkh
dgk tkrk gS fd izÑfr gh ekuo thou dk laj{k.k iznku djrh gSA vk/;kfRed ri gks ;k
ckSf)d ri gks] ;k jktuhfrd ri] vkfFkZd ri gks ftruk gh izÑfr dks lajf{kr fd;k tk;sxk]
mruk gh ekuo lqjf{kr gksxkA ysfdu oSf'od leL;k vkSj v/;kRe dk nk'kZfud fpUru dSlk
gksuk pkfg,\ vkt ds vk/kqfud ifjos'k es iyus okyk O;fDr oSKkfud v/;;u ij fo'okl djrk
gSA vk/;kfRed psruk D;k gS\ ;g dSls dke djrh gS\ uSfrdrk vk/kkfjr] /kkfeZd vkSj
lkaLÑfrd psruk] lkekftd psruk] jktuhfrd psruk] vkfFkZd psruk dks v/;kRe ds }kjk iqf"ir
vkSj iYyfor gksrs ns[kk tkrk gSaA vk/;kfRed psruk ds }kjk XykscyokfeZx ds iznwf"kr okrkoj.k
dks LoPN djus ds fy, izkphu dky esa vfXu esa gou djus ij ok;qe.My esa QSyus okys /kq,s ls
LoPN djus dh dYiuk dh tkrh FkhA ml gou esa fefJr lkekxzh tkS] xq<]+ ?kh] diwj] pUnu]

28
[kSj] cjk] ukfj;y bR;kfn izkÑfrd rRoksa ls ok;qe.My dks LoPN cuk;k tkrk FkkA fdUrq
orZeku vk/kqfudrk us bu ijEijkvksa ls O;fDr dks dkslksa nwj dj fn;k gSA Hkkx&nkSM+ dh ftUnxh
us ekuo&ekuo ls bu leL;kvksa esa ckr djus ds fy, le; gh ugha gSA bu leL;kvksa ij ckr
djus ds fy, og iSlksa dh ek¡x ds lkFk gh ml ij viuh izfrfØ;k nsuk pkgrk gSA nk'kZfud
n`f"V ls n”kZu }kjk izLrqr fl)kUr dHkh Hkh lekIr ugha gksrs] D;ksfa d n”kZu dk dk;Z fpUru
ds lEcU/k esa fpUru djuk gSA ftl izdkj ge oSKkfud iz.kkyh es izR;{k ,oa iz;ksx ds vk/kkj
ij [kkst djrs gSa fdUrq n”kZu esa fo”ys’k.kkRed iz.kkyh dk iz;ksx fd;k tkrk gSA oSls oSf'od
leL;k dk lek/kku v/;kfRed psruk ds }kjk lR; dh [kkst djuk gSA n”kZu pkgs
fOk”ys’k.kkRed i)fr gks] la'ys"k.kkRed ;k }U} U;k; i)fr gks ;s vkiuh&vkiuh txg ij
lR; dh [kkst djrs gaSA vk/;kfRed psruk ,d fpUru dk fo"k; gSA tks vk/;kfRed Kku ds
}kjk lR;kUos"k.k iz.kkyh dks fodflr djrk gSSA n'kZu es ,d i{k ij /;ku fn;k tk; rks tc
rd fpUru u fd;k tk;A rF; lgh vkSj izekf.kr ugha ekuk tk ldrkA

,sls O;fDr tks vfrfFk;kssa dk Lokxr lRdkj lPps eu ls djrs gSa] muds ?kj esa fdlh Hkh
oLrqvksa dh deh ugha gksrh gSA lPpfj=rk ds lkFk lHkh dk;Z iw.kZ gks tkrs gSaA blh izdkj O;fDr
dks fdlh Hkh n'kk esa nku iq.;] ;K] gou ds ckjs esa ges'kk lksprs jguk pkfg,A uhfroku O;fDr
ds ?kjksa esa vUu] ty] Hkwfe] lR;opu dHkh Hkh lekIr ugha gksrs gSaA vr% ges'kk gh lc ds fy,
lqfopkfjr gksrs gq, d"V dks lg ldrk gSA ijUrq og vfrfFk;ksa ls vlR; opu dk lgkjk ugha
ysrk gSA dgk x;k gS fd lkS gkFkksa ls /ku ,dëk djksa vkSj gtkj gkFkksa ls nku djksAa ;Fkk'kfDr
nku djuk pkfg,A blesa ladksp ugha djuk pkfg,A oSf'oddj.k dh nqfu;k esa O;fDr vf/kd
izkIr djuk pkgrk gS] ;g vk/kqfud ekuo gtkj gkFkksa ls /ku gh bdÎk djuk pkgrk gSA
blhfy, orZeku ifjn`'; ?kwltSls egktky ls xqtj jgk gSA egkRek fonqj dk dFku Lo;a
oSf'od leL;kvksa ds funku esa O;fDr dh vk/;kfRed psruk ln~pfj=iw.kZ dk;Z djrh gSA blh
izdkj /keZ D;k ugha gS\ tc ,sls iz'u O;fDr ds eu esa mRiUu gksrs gSaA ftl izdkj ls O;fDr ds
psruk eas tc lkQ&lkQ fn[kkbZ ugha nsrk rc og xyr dne dh vksj c<+ tkrk gSA ftl
izdkj ls ,d xUnh f[kM+dh ds dk¡p dks lkQ djds ns[kus ds ckn ogk¡ gj oLrq lkQ&lkQ
fn[kkbZ nsus yxrh gSA mlh izdkj O;fDr dks vius vk/;kfRed fpUru ds vk/kkj ij vkREk rRo
:ih eu dks lkQ djds ns[kus ls gj oLrq lkQ vkSj LoPN fn[kkbZ nsrh gSA
Þfdlh O;fDr dks lqurs le; vkidks tks dqN dgk tkrk gS mls Lohdkj u djsa
ijUrq vki lR; dh [kkst ds fy, lquAsa ;fn vki vius fy, ,d ckj ;g le> ysrs gSa fd /keZ
D;k ugha gS rc nqfu;k dh dksbZ iqLrd] dksbZ /keZxq: vkidksa thou esa dHkh /kks[kk ugha ns
ldrsAÞ5
oSf'od leL;k ds ckjs esa fpUru djrs gSa rc orZeku esa >wB] cykRdkj] ;kSu mRihM+u]
ngst izFkk] /keZ ifjorZu vkfn leL;k;sa oLrqr% vk/;kfRed psruk ls vyx gksus dh n'kk dks
dgk tk ldrk gSA tc O;fDr dh psruk Hkax gksrh gSA og fugk;r ikxy gksxk] ;k fdlh xyr
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29
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fy, nks jksVh gh dkQh vPNh yxrh gSA og O;fDr Hkq[kejh ls th jgk gSA ijUrq og lR; vkSj
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gks lR; ges'kk vlR; ls vyx jgrk gSA

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vk/;kfRed psruk dh vko';drk izrhr gksrh gSA ,slh gh lekt O;oLFkk] ftl izdkj ls euq";
ds Lo/keZ :ih dk;Z dks djrk gSA mlds vuqdwy f'kf{kr djrk gSA vkSj O;fDr pkjksa iq:"kkFkksZa
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bu dkeksZa ds vuqdwy dk;Z djus ls gh oSf'od leL;kvksa dk funku Mw<+k tk ldrk gSA /keZ dk
lEcU/k euq"; ds vkUrfjdrk ls gSA /keZ ds tqM+us ls euq"; ds lkekftd thou dh fn'kk dk
ekxZ izlLr gksrs k gSA /keZ dks /kkj.k djus okys euq"; gh gSA vxj /keZ u gks rks euq"; ds ÑR;
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30
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mBkrk gSSA u fd mlh esa foyhu gksus s dh lykg nsrk gSaA O;fDr ds ikl bruk cM+k g`n; bZ'oj
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bldks er ekfj;sAa blh izdkj lkekftd U;k; dh izfØ;k esa tc ifr&iRuh ds chp ?kjsyw fookn
gksrk gSA rc ogk¡ ds cqtqZx lEHkzkar O;fDr nksuksa i{k dks le>krs gaSA tc ogk¡ ls >xM+k 'kk¡r
ugha gksrkA rc U;k; iz.kkyh dh rjQ c<+rk gSA fpUru fdlh nqfo/kk Hkjs iz'u dks U;k; laxr
n`f"Vdks.k ls lqy>kus dk lcls ljy rjhdk gSA izkphu dky ls ysdj orZeku le; rd tks
lar] egkiq:"k vk;s] os vius vk/;kfRed psruk ds lkFk&lkFk O;fDrxr fpUru vkSj ekuoh;
ewY;ksa ds cy ij] uhfr ds ekxZ dk vuqlj.k djds egkurk dks izkIr fd;kA 'kkfUriw.kZ fLFkj eu
ls vk/;kfRed psruk ds }kjk leL;k ij fpUru] euu fd;sA leL;kvksa dh Hk;kokg fLFkr ls
NqVdkjk ikus ls vPNk gSA mu ifjfLFkfr;ksa dk lkeuk djukA O;fDr dk uSfrd drO;Z gSA
orZEkku esa O;fDr fdruh mnk'khurk] ijs'kkuh vkSj nq%[kh v'kkfUr] Hk;Hkhr tSlk yx jgk gSA
bldk ewyr% dkj.k O;fDr us vk/;kfREkd psruk dks dgh&u&dgha ij NksM+ fn;k gSA blhdkj.k
FkksM+h lh leL;k vkSj ladV vkus ij O;fDr tYn gh ?kcjk tkrk gSA 'kk;n ;g Hkwy tkrk gSA
vk/;kfRed ijkdk"Bk ds }kjk izÑfr ds le; pØ ges'kk O;fDr dh fn'kk vkSj n'kk ij fuxjkuh
j[krs gSaA mlds fn;s gq, d"V dks lgu u dj ikuk] ;k vkius xSj iq#"kkFkhZ /ku ds cy ij]
vuSfrd dks tUe nsuk ekuo dk drZO; ugha gSA ekuo thou esa vk/;kfRedrk vkSj uSfrdrk dks
Bqdjk;k ugh tk ldrkA mldks vulquk ugha fd;k tk ldrkA mldk lgh funku rks
okLrfod uSfrd ewY; gS] ftlds cy ij mldks izÑfr }kjk fn;s x;s d"Vksa dks lgu djuk gh
iM+sxkA O;fDr ds uSfrd fpUru dks ln~xq.k] vkn'kZ lfgr lk{kkr~ Kku dh ckrsa uSfrd cy
iznku djrh gSA blfy, O;fDr dks viuk le; v/;kfRed fpUru ls vkn'kZ] vkSj ijksidkj]
tSls ln~xq.k izkIr gksrs gSA lRlax ls cqf) dk fuekZ.k gksrk gSA O;fDr dk vkRefo'okl ,oa
vkRecy c<+rk gSA oSf'od leL;k O;fDr dh vk/;kfRed psruk ds vk/kkj ij gh funku fd;k
tk ldrk gSA oSf'od uSfrdrk vkSj varjkZ"Vªh; fodkl ds ekuoh; ewY; ij O;fDr v/;kfRed
psruk ls thou dks thus esa ,d [kq'kgky eg'kwl dj ik;sxkA blls lEiw.kZ fo'o eas lq[k vkSj
'kkfUr LFkkfir gksxhA O;fDr ds thou esa ewY;kas ds izfr ln~fopkj mRiUu gksxsA euq";&euq"; ls
f?kz.kk ugha djsxkA lc lkSgknzZiw.kZ thou ds izfr lpsr jgsxAsa ;gh ls oSf'od leL;k dks
vk/;kRe ds }kjk dqN de fn;k tk ldrk gSA D;ksafd tc ge uhfr dks Lohdkj djrs gSA
vuSfrd dk;Z dks vatke ugha nsrs gSA ftl izdkj ls o`{kkjksi.k] ikuh dks laxzg.k djus ds fy,
rkykc] izn"w k.k eqDr oLrqvksa dk iz;ksx bR;kfn esa uSfrdrk dks /;ku esa O;fDr j[ks rks leL;k ls
gy iznku fd;k tk ldrk gSA

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32
egkjk"Vª izkar ds jRukfxfj tuin esa MkW- vEcsMdj dk iqLrSuh xk¡o vkackokM+s gSA xk¡o esa
muds ifjokj dk egRoiw.kZ LFkku Fkk vkSj mUgsa xk¡o dh nsoh dh ikydh j[kusa dk lEeku izkIr
FkkA bl dkj.k mudk ?kj vkl&ikl ds xk¡oksa esa vkd"kZ.k dk dsUnz FkkA
MkW- vEcsMdj ds firk th jketh ldiky ¼1848&1913½ fczfV'k QkSt esa FksA 1966 esa
lqcsnkj estj y{e.k eqM+ckMdj dh deku esa HkrhZ gq, Fks] mUgsa lqcns kj in ij rjDdh feyh vkSj
os lsuk ds ,d ukeZy Ldwy esa gsMekLVj jgsA Hkhe dh ek¡ HkhekckbZ ¼1854&1896½ eqM+ckMdj
ifjokj ls Fkha tks vNwr fgUnw Fks eqEcbZ LVsV ds Bk.ks tuin ds eqM+ckj xk¡o dk ;g /kuh lSfud
ifjokj Fkk og xksjs jax dh pkSM+s ekFks] ?kq?kjkys cky rFkk NksVh ukd okyh efgyk FkhA
ekrk firk dh 14oha larku ds :i esa Hkkjr dh /kjrh esa fo'o ds egkure~ fo}oku MkW-
Hkhejko vEcsMdj dk tUe 14 vizSy 1891 dks rM+ds fefyVªh gsM DokVZj vkWQ okj ¼egw½ esa gqvk
FkkA1
Hkkjr jRu MkW- Hkhejko vEcsMdj us egkjk"Vª dh ohj egkj tkfr esa tUe fy;k FkkA
egkj tkfr ds lkgfld dkjukeksa dk bfrgkl xokg gSA mUUkhloha lrkCnh esa cEcbZ izslhMsUlh
QkslZ dk xBu egkj ls gh fd;k x;k Fkk] ;gh ugh N=ifr f'kokth vkSj is'kokoksa dh lsuk esa
Hkh mudk fo'ks"k LFkku jgk gSA Hkkjr dh lkekftd O;oLFkk ds vuqlkj 'kwnzkas ls Hkh
uhp o.kZ ekuk tkrk Fkk] bl o.kZ ds yksxksa dk eafnj izos'k fu"ks/k FkkA izkIr lk{;ksa ds vk/kkj ij
;g tkfr igys ls gh Lo;a dks Hkwfe dk Lokeh ekurh Fkh vkSj blh vk/kkj ij tc dHkh tehu
dks ysdj dgha fookn gksrk rks egkj dks cqyk;k tkrk FkkA blh lekt ds yksx tehuh >xM+ksa
dk fof/kor fuIkVkjk djrs Fks bl lekt ds yksxksa dks ,d vU; dk;Z Hkh fn;k x;k Fkk ftlds
vuqlkj ;s yksx xk¡o dh lhek] nhokj Hkh cukrs FksA blds vfrfjDr bl tkfr dk eq[; O;olk;
'elku ?kkVksa esa ydM+h igq¡pkuk ejs gq, i'kqvksa dks xk¡o ls mBokuk vkSj xk¡o dh lqj{kk djuk
FkkA xk¡o dh pkSdhnkjh dk dke blh tkfr ds yksx djrs Fks vkSj vxj dksbZ ?kks"k.kk vFkok
lans'k turk esa izpkfjr djuk gksrk rc blh egkj tkfr }kjk <ks<+h fiVokdj lkoZtfud ?kks"k.kk
dh tkrh Fkh brus ij Hkh fcMEcuk ;g Fkh fd ;g tkfr vNwr u Nwus ;ksX; vkSj ?k`f.kr Fkh
fgUnw lekt esa budk Lrj bruk fuEu Fkk fd buls vU; tkfr ds yksx ckr djrs gq;s ,d
fuf'pr nwjh ij [kM+s gksrs FksA muds xys esa iqjkus twrksa dh ekyk iguk nh tkrh Fkh rFkk ,d
gkFk esa >kMw Fkek nsrs Fks rFkk nwljs gkFk esa eksVks fn;k tkrk Fkk ftl ij fy[kk gksrk Fkk nksf"k;ksa
dks tkfr Nqikus rFkk mPp tkfr;ksa dks Nwus dh ltk nh xbZ gSA2
egkj tkfr ds iwoZt lroh] t[kkbZ] HkslkbZ uked nsorkvksa dh iwtk djrs Fks lkFk gh
csrky] egklk] ckgjh] Hkknch eksjk;;h vkfn ds Hkh iqtkjh Fks] buds eB xk¡o ds fdlh dksus esa
nsoky;ksa ds :i esa LFkkfir gksrs tgk¡ budh vjk/kuk mikluk dh tkrh FkhA egkjksa ds thou ij

33
uked lar dk izHkko iM+k ;s egkj tkfr ds mPpdksfV ds lUr Fks muds }kjk
fyf[kr HkfDr&Hktuksa dk egkj tkfr esa cgqr izpyu FkkA lUr th us tc fuekZ.k
izkIr fd;k rks iq.Mjiqj esa budk lekf/k eB LFkkfir fd;k x;k ftl ij vkt Hkh J)kyqvksa dh
vikj J)k gSA

MkW- Hkhejko vEcsMdj dk lkekftd ,oa jktuhfrd fpUru bl 'kks/ki= esa fo'ys"k.kkRed
v/;;u i)fr dks viuk;k x;k gSA blds lkFk&lkFk f}rh;d L=ksrksa ds vk/kkj ij lkekftd
vkSj jktuhfrd vf/kdkjksa ds izfr ekuo dks vkf/kdkj iznku gksxAsa bl gsrq fo}kuksa ds xzUFk
Vhdkvks]a lekpkj i=&if=dkvksa ,oa bUVjusV ls izkIr lkexzh }kjk 'kks/ki= dk fuekZ.k fd;k x;k
gSA

'kks/k i= dk fo"k; MkW- Hkhejko vEcsMdj dk lkekftd ,oa jktuhfrd fpUru ;s ekuo
dks lkekftd U;k; dh n`f"V ls fd;s x;s gSaA lafo/kku ds jpukdkj MkW- Hkhejko vEcsMdj us bu
O;fDr;ksa dks ekSfyd vf/kdkjksa iznku fd;s gSA ftlds cy ij lkekftd O;oLFkk ds cs'kqekj
tqYeksa ds f'kdkj] dne&dne ij tkfr&ik¡r okyh O;oLFkk }kjk viekfur] thou ds gj {ks= esa
izfrca/k dk lkeuk djus okys thou esa fdlh Hkh izdkj dk fodkl djus dh vk'kk lnSo ds fy,
ftuls Nhu yh tk; tks tqcku gksrs gq;s cstqcku] tks euq"; gksrs gq;s Hkh ekuoh; vf/kdkjksa ls
oafpr] tks is'ks ilan ugh mudks djus ds fy, ckf/kr jgus dk tks <ax mudks ilan ugh og
thou fcrkus ds fy, etcwj] ftudks ikuh ihus rd dh Lora=rk izkIr u gks] ftuds lHkh
vjeku tkr&ik¡r okyh O;oLFkk us dqpy Mkys gks]a xjhch] ykpkjh ftuds thou dh laifÙk cu
xbZ gks ftudh fgek;r djus okyk dksbZ u gks] ,sls detksj] cslgkjk] xjhc o ykpkj lekt esa
14 vizSy 1891 bZ- dks fujk'kk dks vk'kk esa cnyus okys] xw¡xksa dks tqcku nsus okys] fucZyksa dks
'kfDr iSnk djus okys] vgadkj dks [kkd esa feyk nsus okys] tkfr vfHkeku dks /kwy pVkus okys
vkSj lfn;ksa tkr&ik¡r okyh O;oLFkk ls n%q[kh vNwr&'kksf"kr&nfyr o ukjh lekt dks vktknh
fnykus okys Hkhejko jkethjko dk tUe egw xk¡o] bUnkSj Nkouh esa gqvkA os vkxs pydj
cksf/klRo ckck lkgsc MkW- Hkhejko vEcsMdj ds uke ls lalkj esa fo[;kr gq;sA
MkW- Hkhejko vEcsMdj dk tUe egkjk"Vª
ds egw uked LFkku ij 14 vizSy 1891 dks gqvk tks egkjk"Vª ds jRukfxjh ftys dk ,d xk¡o Fkk
vEcsMdj ds firk lqcsnkj estj jketh ldiky vkSj ekrk Jherh HkhekckbZ dks Hkhejko vEcsMdj
lfgr 14 larkuksa dh lq[k izkIr gqvk] egkjk"Vª dh ijEijk ds vuqlkj budk ukedj.k dj Hkhe
ldiky j[kk x;k os tc ek= 6 o"kZ ds Fks rHkh mudh ekrk HkhekckbZ dk nq[kn fu/ku gks x;k
ml le; os vius firk ds lkFk lrkjk esa jg jgs FksA3 buds firk jketh ekyksth vEcsMdj
fczfV'k lsuk esa nwljh xzsuksfM;j jsthesaV ds lwcns kj estj FksA muds izrkih rFkk lkgfld
dkjukeksa dk izHkko ckyd ldiky ij iM+k rks ldiky us mPp f'k{kk izkIr dj Hkkjr ds
bfrgkl esa u flQZ viuk cfYd] viuh tkfr o lekt dk Hkh uke jks'ku fd;kA

34
lkekftd U;k; ls vFkZ gS] fd lekt esa jgus okys izR;sd O;fDr dks fcuk mlds /keZ o
tkfr;ksa dk /;ku esa j[ks] thou dh ewyHkwr vfuok;Z vko';drkvksa dks] tSls&Hkkstu] diM+k vkSj
edku dh iwfrZ gks] izR;sd O;fDRk dks lkekftd ,oa vkfFkZd fodkl dk leqfpr volj iznku gks]
ekuo dk ekuo }kjk 'kks"k.k u fd;k tkos vkSj vkfFkZd lÙkk dk fodsUnzhdj.k gksA jktuhfrd
'kfDr esa lHkh dh Hkkxhnkjh gksA nwljs 'kCnksa esa lkekftd U;k; ,d O;kid vo/kkj.kk gSA blls
lkekftd vkSj vkfFkZd #i ls fiNM+s yksxksa ij fo'ks"k /;ku nsus] fofHkUu {ks=ksa esa mfpr volj
iSnk djus vkSj gj izdkj dh lekurk fn, tkus dh ckr fufgr gSA lkekftd U;k; dk mÌs';
gS] fd lkekftd vkSj vkfFkZd #i ls fiNM+s oxZ dks tks gj izdkj ls fodkl ds volj ls oafpr
gS] mUgsa fo'ks"k volj vkSj lqfo/kk iznku dj vU; oxksZa ds cjkcj ykuk vkSj lkekftd O;oLFkk
dks vf/kd ekuoh; vkSj U;k;laxr vk/kkj iznku djuk gSA4
izkjfEHkd dky esa ;k ml le; dsoy mijksDr pkj o.kZ gh Fks ysfdu rRi'pkr~ ;s pkj
tkfr;k¡ cu xbZ vkSj fQj bu pkj tkfr;ksa dh gtkjksa tkfr;k¡ cu xbZA ,slk dgk tkrk gS fd
vkt dh tkfr O;oLFkk izkphu o.kZ O;oLFkk dk fodkl gS vlkekftd rRoksa usa gtkjksa lky ls
cSfnd O;oLFkk dk :i deZ.kk ls cnydj tUe.kk dj fn;k vkSj lekt dh mÙke ls mÙke lsok
ds dke dks vkSj esgur ds dke dks uhp tkfr dk ntkZ nsdj vius fy, Å¡ph tkfr vkSj Å¡ps
ckSf)d dky dks vkjf{kr djk fy;k rkfd v;ksX; gksdj Hkh egkif.Mr dgyk ldsa vkSj fcuk
esgur ds ih<+h nj ih<+h mUgsa mÙke Hkkstu] mÙke lEeku vkSj mÙke lsok fey ldsA tkfr
O;oLFkk usa eqV~Bh Hkj Å¡ph tkfr esa tUe ysusa ek= ls Å¡pk cu tkus okys dks vikj lkekftd
lÙkk ,oa lEeku ns fn;k vkSj ckadh ds mRiknd vko';d Je djus okyksa dks in nfyr cukdj
NksM+ fn;kA
Hkkjr ds e/;dkyhu 'kklu dky esa Hkh 'kwnzkas vkSj vNwrksa dks f'k{kk lekurk vkSj
Lora=rk ds ekuoh; vf/kdkj izkIr ugha FksA ckck lkgc Hkhejko vEcsMdj ds le; esa tkfr
O;oLFkk bruh tfVy Fkh fd czkã.k] {kf=;] oS'; tks rFkkdfFkr fgUnw /keZ xzUFkksa ds vuqlkj mPp
dgykrs Fks os 'kwnz tkfr;ksa dks Li'kZ ugh dj ldrs gS ,slk ;fn Hkwy o'k dgha gks tkrk rks os
vius vkidks vifo= ekurs Fks vkSj Luku djus ds ckn gh os vius ?kj esa izos'k djrs FksA 'kwnz
tkfr;ksa ls bruk ?k`f.kr orkZc fd;k tkrk Fkk fd og vius vki dks tkuojksa ls Hkh x;k chrk
le>rk FkkA Lora=rk iwoZd ckrsa djuk] mPp tkfr;ksa ds lkFk esa pyuk ,oa muds cxy esa
cSBuk iw.kZr;k izfrcaf/kr Fkk lkFk gh n.Muh; Hkh FkkA fgUnw /keZ ds dbZ /kkfeZd xzUFk ftudh
vkt Hkh lekt esa ekU;rk gS muesa tkfr O;oLFkk ds ckjs esa dfBu jhfr vkSj uhfr dk fu/kkZj.k
fd;k x;k gSA euqLe`fr] iqjk.k] rqylhnkl] jkek;.k esa lkekftd fLFkfr esa cgqr gh Li"V :i ls
Å¡p ,oa uhp tkfr;ksa ds lac/a k esa ys[k fd;k x;k gSA

Hkkjrh; lekt ls lacaf/kr MkW- Hkhejko vEcsMdj dk egRoiw.kZ ;ksxnku FkkA Hkkjrh;
lekt esa dqN tkfr;k¡ vius dks mPp ekurh Fkh vkSj lÙkk] lEifÙk] vf/kdkj f'k{k.k iqjksfgr]
ljdkjh ukSdfj;k¡] vFkZ O;kikj] m|ksx vkSj [ksrh ij viuk dBksj vU;k;dkjh rFkk vR;kpkjh

35
fu;a=.k j[krh FkhA blds ifj.kke ;g gq, fd vLi`'; tkfr;ksa ds yksx nhu] nfyr] misf{kr]
vf'kf{kr] vU;k;&vR;kpkj ihfM+r ukSdjh jfgr] [ksrh jfgr] O;kikj m|ksx jfgr vkSj lÙkkghu
gks x;sA
Hkkjrh; lekt dh bl izdkj dh okLrfodrk dks /;ku esa j[kdj MkW- Hkhejko vEcsMdj
us tkfr Hksn u"V djds fgUnw lekt dks laxfBr fd;k ftlls fgUnw lekt vaxzstksa dh xqykeh
ls eqDr rFkk Lora= gks rFkk og ges'kk gh Lora= jgsA bl izdkj MkW- Hkhejko vEcsMdj dk dk;Z
lekt lq/kkj djus okyk vkSj Hkkjrh; lekt dks laxfBr vkSj leFkZ djus okyk FkkA
MkW- vEcsMdj vLi`';ksa esa izfr"Bk dh] lkekftd] lkaLÑfrd] 'kS{kf.kd] oSpkfjd vkSj
lnkpkj dh Økafr djrs jgs vkSj lafo/kku esa detksj oxksZa ds fy, fo'ks"k izko/kku cukdj Hkkjr
gh ugh cfYd fo'o ds le{k ,d dY;k.kdkjh dk;Z izLrqr fd;s ftldk ifj.kke gS fd vkt
gekjk ns'k lqf'kf{kr ns'k gS vU;Fkk 85 izfr'kr nfyr o fiNM+ksa dh vkcknh vkt Hkh fodkl dh
eq[;/kkjk ls vyx gksrhA
MkW- vEcsMdj U;k; dh iwoZorhZ vo/kkj.kkvksa rFkk izkphu Hkkjr dh o.kZ O;oLFkk] ;wuku ds
egku~ nk'kZfud IysVks }kjk izfrikfnr U;k; dh ;kstuk] vjLrq }kjk mYysf[kr O;oLFkk]
izfl)teZu fopkjd uhR'ks }kjk izfrikfnr mRÑ"V vkSj nSoh fl)kUr] e/;;qxhu n`f"Vdks.k] ekDlZ
}kjk izfrikfnr loZgkjk oxZ dk lektoknh fl)kUr vkSj ;gk¡ rd fd xk¡/kh }kjk izfrikfnr
dks Lohdkj ugh djrs gSA
MkW- Hkhejko vEcsMdj dk n`f"Vdks.k gS fd lkekftd U;k; dks vfHkO;fDr djus ls
mi;qZDr ;s lHkh fopkj v/kwjs o ,dkaxh gSa D;ksafd buesa ls dksbZ Hkh fl)kUr nfyr] 'kksf"kr]
ihfM+r vkSj detksj oxZ ds vf/kdkjksa dh lgh odkyr ugha djrk gS MkW- vEcsMdj ds vuqlkj&
lkekftd U;k; dh vo/kkj.kk ,d ,slh O;kid vo/kkj.kk gS ftlesa U;k; ds lHkh i{k Lor%
lekfgr gSa MkW- vEcsMdj dk fpUru vkSj n'kZu iw.kZr% ekuorkoknh gS] ekuo LojU; vkSj ekuo
ds lkeFkZ esa vEcsMdj dh vdwV vkSj vVwV vkLFkk gSA
MkW- Hkhejko vEcsMdj dh ekU;rk Fkh fd euq"; dks u dsoy Hkw[k feVkus ds fy, jksVh
pkfg;s vfirq ekufld larqf"V ds fy, vPNs fopkj Hkh vko';d gSA MkW- lkgc dh n`f"V ls
fopkj vkneh dk vuks[kk vkSj foy{k.k [ktkuk gS bl dkj.k mUgksua s nfyr ,oa fiNM+kas esa fopkj
'kfDr dk lapkj fd;k bl fopkj 'kfDr esa ek= rhu 'kCn Fks vFkkZr~ f'k{kk] laxBu vkSj la?k"kZ
ftuds dkj.k Hkkjro"kZ esa tutkx`fr rFkk ;qxnz"Vk gksusa ds ukrs MkW- vEcsMdj us vke vkneh ds
fpUru izfØ;k dks lqn`<+ fd;k rkfd ,d u;k okrkoj.k cu lds vkSj le; ds lkFk lkekftd
ifjorZu ,oa lkekftd U;k; dk fopkj QyhHkwr gks ldsA5

MkW- Hkhejko vEcsMdj }kjk lkekftd U;k; gsrq fd;s x;s vFkd iz;kl us lEeku iwoZd
thou ds vk/kkj ij cgqr cy fn;k FkkA ekuo lekt esa lkekftd O;oLFkk mlds lalk/ku
mRikndrk] Je dk lgh ewy rFkk O;fDrxr Lora=rk] cqfu;knh vf/kdkj gksrs gSA ;gh tura=h;
iz.kkyh yksdra= dh vko';drk gS] mldh vkRek gS] mldk vfLrRo gS ysfdu vkt ge pkjksa
dh vksj ns[k jgs gSa fd O;kogkfjd :i esa vke vkneh dks thou dk vk/kkj utj ugh vkrkA

36
thou dk vf/kdkj n`f"Vxr ugha gks jgk gSA bldk eq[; dkj.k gS fd vaxzsth le; esa thou ds
vk/kkj ds rkSj ij lalk/kuksa dh vis{kk lEifÙk dks dkuwuh ekU;rk FkhA bl {ks= esa ckck lkgc us
laxBukRed ,oa laoS/kkfud iz;kl fd;sA

1. jÙkw] ukud pUn] MkW- vEcsMdj] dqN vuNq, izlax] 2003] lE;d izdk'ku] ubZ fnYyh]
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& 70

37
lar jfonkl vn~Hkqr izfrHkk ds /kuh FksA ftudk vn~Hkqr fopkj lar jfonkl th ds
fopkjksa ls Hkh esy [kkrk gSa] D;ksafd nksuksa HkDr R;kxh vkSj lPps czáHkDr FksA bu nksukas larksa esa
lekt dks Å¡ij mBkus dk dk;Z fd;k gSA ekuo dks ekuo ds D;k ewY; gSaA bu ewY;ksa ls
ifjfpr djk;k gSA lar jfonkl th us lar dchj dh f'k{kk dks viukrs gq, jfonkl lk[kh esa
mu ewY;ksa dh ppkZ cM+s gh ekfeZd <ax ls djrs gSaA Hkkjr dh lkekftd lejlrk fojklr dh
nsu dgk tkus dk dkj.k ;gk¡ dh lar ijEijk jgh gaSA Hkkjr ds /kjrh ls mRiUu vusd lk/kq
larksa us /kkfeZd izpkj&izlkj] lkekftd ln~Hkko ,oa lkekftd lejlrk c<+kus dk iz;kl fd;s
gSaA lekt dh tfVy ,oa dBksj tkrh; ,oa /kkfeZd cU/kuksa dks <+hyk djds lekt esa ln~Hkko
ykus dk izpkj fd;s gSA mUgksua s viuh ok.kh viuh Ñfr;ksa ls lekt esa QSyh dVqrk dks nwj djus
dk iz;Ru fd;s gaSA ekuo ewY;kasa dks muds }kjk O;Dr fd;s Hkkoksa dks nksgks&
a lf[k;ksa ds ek/;e ls
lekt dks c<+us vkSj le>us dk volj feyk gSA muds fopkjksa esa ,slk tknw gSA fd euq"; dk
fo}s"kq ls Hkjk gqvk] eu ln~Hkko ,oa HkkbZpkjk es cny tkrk gSA lar dchj mPpdksfV ds HkDr
FksA lar dchj dh psruk esa czá&fu:i.k ds lkFk&lkFk vUrZvkRek eas yhu gks tkrs FksAa
ßbdcky nfyr tkfr ds dfo FksA blfy,] muesa cspSuh dk gksuk LokHkkfod FkkA vkSj
pw¡fd bl tkfr ds nyu dk lcls cM+k dkj.k mldh fu'ps"Vrk Fkh] blfy, bdcky us lcls
vf/kd tksj Hkh deZ.;rk ij gh fn;kAÞ2
vFkkZr~ dchj nkl th us dgk fd lekt es izse ds lkFk fgy&fey dj jguk pkfg,
vU;Fkk vfiz; O;fDr dks dksbZ ojnkLr ugha djrkA lalkj es tks uez cu dj jgrk gS] mlh dk
xqtkjk gSA
MkW- jktsUnz izlkn us dgk Fkk fd ßgekjh lkewfgd psruk ,sls uSfrd ewY;ksa ij fVdh gqbZ
gS tks igkM+ ls Hkh T;knk etcwr] vkdk'k ls Hkh T;knk fo'kky vkSj leqnz ls Hkh T;knk xgjh
gSAÞ
dchj ds eq[kkj fcUnq ls lkekftd lejlrk esa la?k"kZ dh Tokyk izTofyr gksrh fn[kkbZ
nsrh gSA os 'kkL=h;rk] ik[k.M] ijEijk oknh mipkj ds nq'eu gSA mUgksaus fgUnw vkSj eqfLye
leqnk;ksa dks lekt es lejlrk dks tksM+us ds fy, [kjh&[kjh ckrs lqukbZ gSA lar dchjnkl us
fgUnw&eqLyekuksa es O;kIr tkfrokn dh cqjkb;ksa vkSj dV~jiaFkh fopkjksa ds iz[kj fojks/kh] larksa esa ls
,d ekus tkus okys lar gS] ftUgksua s dbZ /keksZ dks vkil esa tksM+us dk iz;kl fd;k gS] vkSj

38
mUgksaus dbZ Hkk"kkvksa dks vius fpUru dk vk/kkj cuk;kA ftles Li"V :i ls ifjyf{kr gksrk gS
fd og dbZ /keksZ dks vkilh Vdjko ls vyx djds mudks vkil es tksM+us dk dke lkekftd
lejlrk ds fy, ,d cgqr gh cM+k pqukSrh iw.kZ dk;Z jgk gSA lar dchj us ekuo ek= dks ,d
lekt Lo:i esa Lohdkj fd;k gSA ftleas tkfr] o.kZ] dqy ,oa /keZ bR;kfn etgcksa ls vyx
gVdj ekuo dks ekuo ls tksM+us dk iz;kl fd;k gSA mlh izdkj lar jfonkl dk lekt
lq/kkjdksa vkSj dfo;ksa ds fuxqZ.k HkfDr ds :i esa egRoiw.kZ ekuk tkrk gSA lar jfonkl us ;qx
ifjorZu ds fy, /kkfeZd ik[k.M] tkfrokn] Å¡p&uhp bR;kfn ds fo:) lekurk ds Hkko j[ksaA
lar jfonkl dk tUe laor~ 1433 dks egkiwf.kZek dks cukjl eas gqvk FkkA orZeku le; esa lEiw.kZ
fo'o esa uSfrdrk dh vo';drk izrhr gksrh gSA lar jfonkl us ekuoh; ewY;ksa ds fy, thou
dh vusd leL;kvksa dks lgk thou dh nqfo/kk Hkjs iz'u dks gy dj j[k fn;kA O;fDr fujUrj
izxfr dh vksj c<+uk pkgrk gS lar jfonkl lR;] vfgalk] lnkpkj izse&vuqjkx ds lPps lekt
dks fn'kk nsus okys larksa es vxz.kh ekus tkrs gSaA3 ftUgksaus bruh [kjh ckrksa dks lekt ds lkeus
is'k fd;k gSA mlh izdkj lar dchj Hkh vius fopkjksa ls lkxj ds ikuh dk [kkjk iu de dj
fn;kA bruh [kjh ckrkssa ls gh lekt ds iM+ko dh fn'kk dks fn[kkus dk iz;kl fd;s gSaA lar
jfonkl us Hkh lekt ds lkeus thou ds vusd igyw dks Nwus dk vFkd iz;kl fd;k gSA blh
pfØ; izfØ;k es c<+us ds fy, lkfgR; txr~ esa ekuoh; ewY;ksa dh lrr~ vko';drk izrhr gksrh
gSA fdlh Hkh dk;Z dks djus ds fy, ekuoh; laons uk ds gksus ls O;fDr vius {ks= esa izxfr gh
djrk gSA mldk y{; egRoiw.kZ ekuk tkrk gSA ,slh n'kk esa dqN ewy Hkwr leL;k,sa mHkj dj
lkeus vkrh gSA bldk D;k vFkZ] mÌs'; vkSj vUr D;k gS\ ;g fu;fer gS vFkok vfu;fer
bldh ns[k&js[k vkSj lapkyu djus okyh dksbZ rkdr gS vFkok ;gk¡ ij lc dqN vdLekr vkSj
fu"iz;kstu gS\ ;fn dksbZ bldk mRiknd] fu;ked vkSj lapkyd gS rks gekjs thou dk mlls
D;k lEcU/k gS\ og thou dk vk/kkj iznku djus okyh laoS/kkfud vf/kdkj gSA ftllsa
ekuo&ekuo dks ,d djus dk iz;kl djrh gSA ge viuh 'kkjhfjd] ekufld] vk/;kfRed
izk.kkfy;ksa ds mÙkjnkf;Roksa dks Lohdkj djus dk iz;kl djrs gSaA gekjk thou gekjs gh gksus ls
dke ugha py ldrk gSA lar jfonkl dgrs gSa fd lekt Hkh ekuo ds fopkjksa ds fy, vko';d
gksrk gSA O;fDr ds thou ds mÌs';&iwfrZ D;k ;gha gS ;k ftllsa ekuoh; thou dk mÌs'; iw.kZ
gksrk gksA vFkok fdlh thou esa vusd ?kVukvksa ds lkektL; iw.kZ fLFkfr ls euq"; dk ekuoh;
ewY; fu:fir gksrk gSA4 euq"; dk tUe D;k gS vkSj D;kas ij fuHkZj djrk gSA e`R;q D;k ;g tks
thou ds vfUre mÌs';kas rd ys tkrh gSA gekjh Lora= fØ;kvksa dh gekjs Åij dksbZ izfrfØ;k
vo';aHkkoh gS vFkok ugha os lc izfrfØ;k,¡ rkRdkfyd gSaA

,d
izdkj dk f}rh;d lkekxzh ladyu dk fo"k; gS ftlesa fo'ys"k.kkRed ,oa la'ys"k.kkRed v/;;u
fd;k tk;sxkA bl izLrkfor 'kks/k fo"k; ij foLr`r v/;;u ds fy, fofHkUu fo'ofo|ky;ksa rFkk
jk"Vªh;] vUrjk"Vªh; Lrj ds Hkkjr esa fLFkr 'kks/k laLFkkuksa ds iqLrdky;ksa esa miyC/k xzUFkksa dk
v/;;u vkSj fo'ys"k.k fd;k tk;sxkA 'kks/k izca/k dh 'kks/k izfof/k esa vkRelk{kkRdkj] fo}kuksa dk
ekxZn'kZu izkFkfed L=ksrksa] i= if=dkvksa bR;kfn ek/;eksa ls v/;;u fd;k tk;sxkA

39
lar jfonkl ,oa lar dchj ds lkfgR; esa ekuoh; ewY;kas dh izklafxdrk dks le>us dk
iz;kl gS] ;s lHkh fl)kUr fgUnh lkfgR; dh n`f"V ls fd;s x;s gSa] ftlesa ekuoh; ewY;ksa dks
lkfgR; txr~ dh n`f"V;ksa ls ns[kus dk iz;kl gSA lar dchj ,oa lar jfonkl ds fopkjksa ds
igyw dks /;ku esa j[kdj uSfrd ewY;k dk v/;;u fd;k tk jgk gSA ekuo ds fofHkUu
ifjfLFkfr;ksa esa D;k izHkko ifjyf{kr gksxkA lkekU; vFkksZa esa lkfgR; txr~ esa ekuoh; ewY;ksa ds
fopkj izLQqfVr gksxAsa 5 ekuo ;k O;fDr pkgs og fdlh tkfr ;k fyax] /keZ] lEiznk; ;k er dks
Lohdkj djus okyk gks] ;k xjhc gks ;k vehj] ;k fdlh ns'k ;k jkT; dk gks mls leqfpr
fodkl] laj{k.k vkSj lEeutud thou thus dk vf/kdkj tUe ds lkFk gh izkIr gksuk pfg;saA
ekuo dks lEeku vkSj thou dh lgh fn'kk iznku djus ds fy, vifjgk;Z ,oa vfuok;Z gSA bl
'kks/k dk;Z dk izeq[k mÌs'; gSA bl n`f"Vdks.k ls lar jfonkl ,oa lar dchj ds lkfgR; esa
ekuoh; ewY;kas dh vUrZvkRek ;g lkfgR; ds fo"k; jgsa gSaA6 vr% lkfgfR;d n`f"V ls ekuoh;
ewY;ksa dks le>uk gh ekuo ewY;ksa dk izeq[k mÌs'; gSA bl n`f"Vdks.k ls lar jfonkl ,oa lar
dchj vkSj vU; Hkkjrh; larks dks ns[kus ,oa le>us ij Hkkjrh; n`f"Vdks.k lkeus vkrs gSaA

ls ekuo thou ds uSfrd


ewY;ksa dk izdk'k lEiw.kZ tho txr~ ds fy, mTtfyr gksrk gSA ,slh fopkj /kkj lar jfonkl dh
jgh gSA ftllsa ekuoh; laons uk dk 'kh"kZ lPpkbZ ds :i esa fn[kkbZ nsrk gSA tks izkphu dky esa
dgh xbZ ckrksa dks ekuo Lo;a ds vk/kkj ij ekuk tkrk gSA tks vkt orZeku es ,d foKku dh
rjg iz;ksx tSlk lp fn[kkbZ ns jgk gSA orZeku dks ns[krs gq, lkfgR;d fpUru dh /kkjk
izokfgr gksrh gSA7 ftldk ekuoh; thou esa ,d fpUru djus dh ckr lkeus vkrh gSA og dkSu
lk ;qx FkkA ftlesa larksa ds opu dk lquus ds fy, yksx yykf;r jgrs gSA fdUrq vkt larksa ds
uke ij yksxksa ds eu esa Mj dk Hkko iSnk gks x;k gSA ftles brus egku lar jfonkl] xq:
ukud] dchj vkfn larksa us lekt dh cqjkbZ;ksa vkSj dqizFkkvksa dk fojks/k fd;kA lar jfonkl ds
ledkyhu vusd larksa vkSj egkRekvksa us Hkh ekuo lekt vkSj laLÑfr esa O;kIr dqjhfr;ksa dks nwj
dj ekuoh; ewY;ka ls tksM+us dk iz;kl fd;k gSA ftuesa lar jfonkl] xq:ukud] ukenso] nknw]
ihik ,oa lsu vkfn us ekuo ds ewY;ksa ls ifjfpr djk;k gSA pgs og lkekftd {ks=] gks ;k
vkfFkZd gks] ;k jktuSfrd gksA lHkh txg Qyh vleukrkvksa esa lekurk dk Hkko j[kus esa dksbZ
Hkh dlj ugha NksM+h gSaA ;gk¡ rd ;s lar vius ok.kh ls xq: jfonkl dh ck.kh esa yxHkx
lekurk fn[kkbZ nsrh gSA bUgksusa s lekt dh vuSfrd tSls NwvkNwr] ewfrZiwtk] tkfrizFkk] /kkfeZd
mUekn] ik[k.M bR;kfn dk fojks/k Hkh viuh lkfgfR;d dkO; ok.kh esa djrs gSaA8 ;s lk/kuk HkfDr
ds {ks= esa vUrfjd vkRe lk/kuk dh dh ckrksa dks lkekt ds lkeus j[kus dk iz;kl fd;k gSA
ekuo dh vkUrfjd fØ;k ds ek/;e ls lEiw.kZ lekt ds uSfrd ewY;ksa dh fn'kk fn[kkbZ nsrh gSA

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41
dkfynkl us vius dkO; ,oa ukVdksa esa jktrU= O;oLFkk dk foospu fd;k gS fdUrq lHkh
jktkvksa dks jkt'kkL= dk iw.kZ Kkrk fn[kk;k gSA 'kklu dk lapkyu lnk i{kikr jfgr gksdj
,oa dBksjrk ds lkFk gh fd;k tkrk gSA okLro esa vijk/kh vkSj vokaNuh; rRoksa dks ;fn nf.Mr
u fd;k tk;sxk rks os vf/kd mRikr djsx a As vr% jktk dks vijkf/k;ksa ds lkFk dSlk O;ogkj
djuk pkfg,] bls j?kqoa'k ds izFke lxZ esa jktk fnyhi ds fo"k; esa dkfynkl us bl izdkj
crk;k gS%&
^^vijk/kh dks n.M nsuk jktk dk /keZ gS D;ksafd vijk/kh dks n.M fn;s fouk jkT; Bgj
ugha ldrk gSA vr% jktk fnyhi vijkf/k;ksa dks mfpr n.M nsrs FksA**1
jktrU= 'kklu gksus ij Hkh iztk ds izfr jktk fnyhi ds bl izdkj ds fopkj Fks]
ftldk egkdfo dkfynkl us bl izdkj o.kZu fd;k gS%&
iztkuka fou;k/kkuknz{k.kkn`Hkj.kknfiA
l firk firjLrklka dsoy tUegsro%AA
&j?kq- 1@24
xq# of'k"B us fnyhi ls iwNk fd vki ds jkT; esa lc dq'ky ls gSa\ bl ij jkt'kkL=
osÙkk dkfynkl us jktk ls jkT; ds ije j{k.kh; lkr vaxksa dk bl izdkj o.kZu fd;k gS%&
^^vkidh d`ik ls esjs jkT; esa 1&jktk] 2&eU=h] 3&fe=] 4&jktdks"k] 5&jkT;] 6&nqxZ]
7&lsuk ;s lkrksa vax ifjiw.kZ gSaA vkidh d`ik ls vfXu] ty] egkekjh] vdky e`R;q tSlh nSoh;
foifÙk;ksa rFkk pksj] Mkdw] 'k=q vkfn ekuq"kh vkifÙk;k¡ Hkh Lor% nwj gks x;h gSA**2
jkT; dh lqj{kk ds fy, vPNk jktuhfr dk Kkrk jktk bu lkrksa vaxksa ij iw.kZ /;ku
j[k dj gh vius jkT; dk cgqeq[kh fodkl dj ldrk gSA ,sls 'kkld dks ekuq"kh vkSj nSoh;
vkifÙk;ksa dh fdafpr~ ek= dh Hkh fpUrk ugha gksrh gS D;ksafd jktk ds vPNs jgus ij gh iztk Hkh
vPNh curh gSA 'kkld gh iztk ds le{k vkn'kZ rFkk izek.k gksrk gSA og tSlk dk;Z djrk gS
iztk Hkh oSlk gh dk;Z djrh gSA xhrk esa d`".k us vtqZu dks ,slk gh mins'k fn;k Fkk%&
^^Js"B iq#"k tks&tks vkpj.k djrk gS vU; iq#"k Hkh oSlk gh dk;Z djrs gSaA og Js"B
iq#"k tks izek.k dj ysrk gS vU; yksx Hkh oSlk gh vkpj.k djrs gSa**3
lPph xkS Hkfä dh ijh{kk ysrs le; jktk fnyhi vius lPps jktk gksus dk ifjp; bl
izdkj nsrk gS%&
^^gs flag! {kf=; 'kCn dk vFkZ gh ;g gS fd tks nwljksa dks ladV ls cpkosA ;fn eSaus ;g
dke ugha fd;k rks esjk jkT; djuk rFkk vi;'k ysdj thrs jguk gh fdl dke dk\**
{krkfRdy =k;r bR;qnxz% {k=L; 'kCnks Hkqous"kq #<%A
jkT;su fda rf}ijhro`Ùks% izk.kS#Øks'keyhelSokZAA
&j?kq- 2@53

42
jktk iztk ds fy, vkn'kZ le>k tkrk gSA vr% 'kkld dks cqf)eku] fo}ku~] /kS;Zoku~]
U;k;fiz; vkSj j{kk djus okyk gksuk pkfg,A vU/kdkj dks nwj djus ds fy;s ftl izdkj izdk'k
dh vko';drk gksrh gS] mlh izdkj txr~ ds O;ogkj dks pykus ds fy;s fo|k dh Hkh
ijeko';drk gksrh gSA fo|k;sa Hkh pkj izdkj dh gksrh gS%&
&ftlls U;k;'kkL= vkSj osnkUr dk Kku gksA
&blls rhuksa osnksa ¼1- _Xosn 2- ;tqosZn 3- lkeosn½ dk lEiw.kZ Kku gksrk gSA =;h ls
/keZ&v/keZ] vFkZ&vuFkZ] dke&vdke dk lE;x~ Kku gksrk gSA osnksa ls muds pkj miosn ¼1-
vk;qosZn] 2- /kuqosZn] 3- xkU/koZosn] 4&rU=½ dk Hkh Kku gks tkrk gSA NS% vax ¼1- f'k{kk] 2- dYi]
3- O;kdj.k] 4- fu#ä 5- T;ksfr"k ,oa 6- NUn½ gSaA pkjksa osn] ehekalk] U;k;'kkL=] /keZ'kkL=]
iqjk.kksa ds foLrkj vkfn dks =;h uke ls lEcksf/kr fd;k tkrk gSA
Z&vFkZ vkSj vuFkZ dk Kku okrkZ ds gh }kjk gksrk gS rFkk d`f"k] O;kikj] i'kqikyu] O;kt
ij /ku nsuk ,oa vFkZ&miktZu djus dh fof/k okrkZ gh crkrh gSA izkphu Hkkjrh; vFkZ'kkfL=;ksa us
okrkZ dh ifjHkk"kk bl izdkj dh gS%&
^^lwn ysuk] d`f"k] okf.kT; vkSj xks j{kk djuk bUgsa okrkZ dgrs gSaA okrkZ ls lEié O;fDr
vPNh o`fÙk ikrk gS vkSj Hk; dks izkIr ugha gksrk gSA**4
4&n.Muhfr&;g pkSFkh fo|k 'kklu ds lapkyu esa ijd lgk;d gksrh gSA U;k;&vU;k; rFkk
jktuhfr ds NS% xq.kksa 1- lfU/k] 2- foxzg] 3- ;ku] 4- vkJ;] 5- la'k; vkSj 6- nSoh Hkko vkfn
mik;ksa dks crkus okyh fo|k dks n.Muhfr dgrs gSaA
vkpk;Z dkSfVY; us Hkh fo|k dk egRo jktk ds fy, bl izdkj vius dkSfVY; vFkZ'kkL=
esa Li"V fd;k gS%&
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fn;k gS fd og viuh iRuh ds izfr ,dfu"B jgsa ,oa mls izlUu j[kus ds fy, gj lEHko iz;kl
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14
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15
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45
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pkfg, vkSj lsod dh Hkkafr mldh gj izdkj ls lsok djuh pkfg,A16 lkFk gh og dgrk gS fd
ifr dks Hkh /keZ ds ekxZ dk vuqlj.k djuk pkfg,] vkSj viuh iRuh ls ?k`.kk ;k bZ";kZ ugha djuh
pkfg,A es/kkfrfFk ds vuqlkj ifr&iRuh ds dsoy 'kjhj fHkUu gS mu nksuksa ds vf/kdkj leku gSA
dk;kZsa esa nksuks ,d gSA nksuksa gh dkuwu ds }kjk vius vf/kdkjksa dh j{kk dj ldrs gSA ;fn ifr
iRuh ij vR;kpkj djs rks og jktk dks izkFkZuk i= nsdj vius dks mlds vR;kpkj ls eqDr djk
ldrh gS vkSj iRuh ;fn ifr dks nq%[kh djs rks ifr jktk dks izkFkZuk i= ns ldrk gSA17
es/kkfrfFk vkSj foKkus'oj dk er gS fd ifr dks pkgs lkS iki djus iM+s iRuh dk Hkj.k&iks"k.k
djuk mlh dk dŸkZO; gSA18 og dgrk gS fd ;fn ifr fons'k tk; rks tkus ls iwoZ mls iRuh ds
Hkj.k&iks"k.k dk izcU/k djuk pkfg,A19
iRuh dk Hkj.k vkSj j{k.k iw.kZr% ifr ij fuHkZj djrk FkkA iRuh dk ikyu djuk mldk
ije dŸkZO; FkkA ^^HkrkZ** vkSj ^^ifr** 'kCn dh O;qRifŸk Øe'k% L=h ds Hkj.k djus vkSj ikyu
djus ls gqbZ gSA Hkk";dkjksa us rks ;gk¡ rd dgk gS fd vxj iRuh vius ifr ls }s"k Hkh j[krh gS
rks ifr dk ;g dŸkZO; gS fd mldk iks"k.k djsA20 iRuh dh j{kk djuk Hkh ifr dk vko';d
nkf;Ro FkkA ladV vkSj vkifŸk ds le; iRuh dk ;g vf/kdkj Fkk fd vius ifr }kjk j{kk dh
tk;A
es/kkfrfFk ds vuqlkj pkgs iRuh ls ?k`.kk Hkh djs ifr dks mldk Hkj.k&iks"k.k djuk
pkfg,A tc iRuh dks tkfr ls cfg"—r dj fn;k tk, dsoy mlh n'kk esa ifr mls NksM+ ldrk
gSA21 bl n'kk esa Hkh mlds vyx ?kj esa jgus vkSj mlds Hkkstu oL= dh O;oLFkk djuk ifr
dk dŸkZO; le>k tkrk FkkA22 es/kkfrfFk dk er gS fd ifr dks iRuh dks MkaV dj gh mls Bhd
ekxZ ij ykuk pkfg, bl ij Hkh og Bhd u gks rks ;nk&dnk mls ihVuk pkfg,A23 mlh ds
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dke ds lEcU/k esa fL=;k¡ Lora= ugha gSA vius ifr dh vuqefr ls gh bu dk;kZsa ds fy, os /ku
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^tkfu* Hkh dgh tkrh FkhA dqVqEc dk fodkl vkSj egRo mlh ls FkkA ifr lsok vkSj ifrozr dk
iRuh ds fy, vikj egRo FkkA og viuh ln~o`fŸk;ksa vkSj jhfr;ksa ls ifjokj dks lq[ke; cuk;s

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17
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18
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19
ogh] 9]74
20
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21
es/kkfrfFk] Vhdk euq- 1]70
22
ogh] 10]188
23
ogh] 8]29
24
ogh] 9]84
25
ogh

46
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izfr mldh leqfpr fu"Bk gksrh Fkh vkSj muds izfr vius dŸkZO;ksa dk fuokZg mRlkgiwoZd djrh
FkhA og vius xq.kksa vkSj ln~O;ogkjksa ls lcdh fiz; ik= FkhA
'kqØuhfrlkj ¼rsjgoh lnh bZ-½ esa ifRu ds dŸkZO;ksa dk foospu bl izdkj fn;k gSA mls
ifr ls igys mBuk pkfg, lc crZu lkQ djus pkfg,] ?kj esa >kMw yxkuh pkfg,] ifjokj ds
xq:tuksa dks vfHkoknu djuk pkfg,A fL=;ksa dks Lora= #i esa /keZ] vFkZ vkSj dke ds fy, /ku
O;; djus dk vkf/kdkj ugh gSA iRuh dks eu] opu vkSj deZ ls ifo= gksuk pkfg,A mls vius
ifr dh vkKk dk ikyu djuk pkfg,A Nk;k dh Hkkafr mldk vuqlj.k djuk pkfg, ifr ds
vPNs dk;kZas esa mldk O;ogkj fe= ds leku gksuk pkfg,A mlds vkns'kksa dk ikyu lsod dh
Hkkafr djuk pkfg,A ?kj ij ok.kh e/kqj vkSj O;ogkj esa uezrk gksuk pkfg,A ifr lc dqN nsrk gS
blfy, ifRu dks mldh iwtk djuh pkfg,A iRuh dks laxhr vkSj uez O;ogkj ls vius vius
ifr dks viuh vksj eksfgr djuk pkfg,A26
X;kjgoha rFkk ckjgoha lnh ds Vhdkdkjksa dk er gS fd ifr dks iRuh dks mlds dk;kZsa esa
bru O;Lr j[kuk pkfg, fd mls nwljs iq#"kksa ds fo"k; esa lkspus dk volj gh u feysA ifr
vkSj vU; lEcfU/k;ksa dks iRuh dks oL=] vkHkw"k.k vkSj vPNk Hkkstu nsdj mldk vknj djuk
pkfg,A tc ifr fons'k tk; rks tkus ls igys iRuh ds Hkj.k Hkks"k.k dk izcU/k djuk pkfg,A
ifjR;Drk iRuh ds jgus vkSj Hkkstu dk izcU/k Hkh ifr dks djuk pkfg, vkSj ;fn ifr fcuk
i;kZIr dkj.k ds iRuh dks NksM+ ns rks jktk dks mls vijk/kh dh Hkkafr n.M nsuk pkfg,A27
vr% ge dg ldrs gSa fd ifjokj cuus ds fy, ifr&iRuh dk gksuk vfuok;Z FkkA iwoZ
e/;dkyhu lekt esa ifr&iRuh ds e/; lEcU/k e/kqj gksrs FksA okLro esa ifjokj dh dsUnz&fcUnq
x`fg.kh gksrh FkhA vusd ea= ifr&iRuh ds nkEiR; izse dk mYys[k djrs gSA iRuh ifr dk I;kj
izkIr djus ds fy, vius dks oL=kHkw"k.kksa ls lqlfTtr djrh Fkh vkSj og ifr dh vkKkdkfj.kh
gksrh FkhA ifr vius nkf;Roksa dk leqfpr #i ls ikyu rHkh dj ldrk Fkk tcfd mls iRuh ls
iwjk lg;ksx feysA iRuh ifr ds lkFk /kkfeZd dk;kZsa esa Hkkx ysrh FkhA
iRuh ds #i esa L=h vius ifr ds fy, vR;Ur 'khyorh vkSj fo'oluh; gksrh FkhA og
lq[k vkSj nq%[k esa ifr dk lkFk nsrh Fkh vkSj eS=hiw.kZ thou fcrkrh FkhA iwoZ e/;dky eas
cgqfookg lkekU; dk;Z FkkA oLrqr% ;gh lkekU; #i FkkA ,d ifRu j[kuk viokn FkkA lezkV rks
,d ifRu ls dHkh lUrks"k gh ugha djrk FkkA jktkvksa ds vUr%iqj esa vusd fL=;k¡ jgrh FkhA
izHkkdjo)Zu us cgqr lh fL=;ksa dks eucgyko ds fy, j[kk Fkk ysfdu eq[; jkuh ¼iRuh½ ,d gh
FkhA lk/kkj.k ifjokjksa esa ifRu;ksa dh fLFkfr dkQh vPNh FkhA eq[; leL;kvksa esa iRuh dh lykg
yh tkrh Fkh ysfdu vafre fu.kZ; ifr gh djrk FkkA ;g Li"V mYysf[kr gS] tcfd jkT;Jh ds
fookg ds lEcU/k esa izHkkdjo/kZu viuh iRuh ;'kkserh ls x`goeZu dh ppkZ djrk gS rks og
dgrh gS fd ekrk,¡ viuh iqf=;ksa ds fy, ikfydk ds flok dqN ugha gSA mudks vfiZr djus esa

26
'kqØuhfr] 4] 11&15
27
Le`frpafnzdk 568&70

47
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dŸkZO; vius ifr dh lsok o vkKkikyu djuk gksrk FkkA
fgUnw lekt esa ifr&iRuh dk lEcU/k vR;ar ikou vkSj ifo= ekuk tkrk jgk gSA iRuh
vius ifr dks lPps eu ls lnk ^^nsork** ds #i esa iwtrh jgh gS vkSj ifr viuh iRuh dks
,dfu"B vkLFkk ls ^^iwT;k** ds #i esaA29 nksuksa dk ikjLifjd lEcU/k vkSj Lusg vfofPNUu vkSj
vVwV jgkA iwoZ e/;dky esa Hkh ifr&iRuh dk lEcU/k izkphudky dh gh rjg FkkA 'kqØ ds
vuqlkj ^ifr* ds leku dksbZ ^ukFk* vkSj ^lq[k* ughA30 og loZLo gS ^'kj.k* dk nkrkA vr%
ifr&iRuh ds chp lEcU/k foPNsn tSlh ckrksa dks fcjys dh egRo nsrs FksA vyc:uh fy[krk gS
fd ifr&iRuh dk lEcU/k foPNsn e`R;q }kjk gh gks ldrk gS] D;ksfa d muesa ikFkZD; dh izFkk
ughA31 vyc:uh dk ;g dFku 'kr&izfr'kr lR; gSA vkt Hkh fgUnw lekt esa ifr&iRuh dk
lEcU/k vVwV gSA lH; lekt esa bldh dYiuk ek= dks t?kU; iki le>k tkrk gSA
,slh vusd ifRu;ksa ds mnkgj.k Hkkjrh; lkfgR; esa miyC/k gS tks ifr dh fofHkUu
nqvZoLFkkvksa ds vfrfjDr thou esa mudk lkFk fn;kA lqnpZyk lw;Z esa] 'kph bUnz esa] v:U/krh
ofl"B esa] yksikeqnzk vxLr esa] lkfo=h lR;oku esa] en;Urh lkSnkl esa] dsf'kuh lkxj esa vkSj
ne;Urh uy esAa

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ijc] eqEcbZ 1903] ¼2½ Le`frpfUnzdk&nso.kHkV~V ¼lEik-½ ,y- Jh- fuoklpk;Z] eSlwj] 1914&21 ¼3½
Hkkstpfjr&jktoYyHk d`r] Hkkjrh; KkuihB] dk'kh] 1964 ¼4½ Hkkst izca/k&cYykyd`r ¼lEik-½
txnh'kyky 'kkL=h] 1962

¼1½ feJ] t;'kadj ¼i½ izkphu Hkkjr dk lkekftd bfrgkl] iVuk] 1980 ¼ii½ X;kjgoha lnh dk
Hkkjr] Hkk- fo- izdk'ku] okjk.klh] 1968 ¼2½ mikè;k;] oklqnso&lks'ky fjfytl daMh'ku vkWQ
bafM;k] fnYyh] 1975 ¼3½ vYcs:uh&vYcs:uh dk Hkkjr ¼vuqokn½] bykgkckn] 1967 ¼4½ 'kekZ]
jtuhdkar&vYcs:uh dk Hkkjr] vkn'kZ fgUnh iqLrdky;] bygkckn] 1990 ¼5½ etqenkj] oh- ih-
&lks'kks bdukfed dUMh'ku vkWQ uknZu bafM;k] dydÙkk] 1960 ¼1½
dkiZl balfØI'ku bafMDosje ¼2½ ,uYl vkWQ n Hk.Mkjdj vksfj,.Vy fjlpZ bULaVhV~;wV] iwuk ¼3½
vkdsZ;ksykftdy losZ vkWQ bafM;k fjiksVZ] fnYyhA

28
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30
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48
i;kZoj.k dk vFkZ gSA ifjr% vkfoz;rs vusu vfr i;kZoj.kA ge pkjksa vksj ftlls f?kjs
gksrs gSA og i;kZoj.k dgykrk gSA f{kfr] ty] ikod] xxu] lehj&;s ikWp gh rks i;kZoj.k ds
rRo gSA i`Foh i;kZoj.k dk vk/kkj Hkh gSA vkSj i;kZjo.k dk rRo Hkh gSA ekuo dh laons uk ij
i;kZoj.k vkSj izd`fr dk izHkwr izHkko iM+rk gSA ml izHkko dks gj ekuo&thou vPNh rjg
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49
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51
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ekyrh0 5A17
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idkus ls ftudh esnk;aa *pjch* fxj&fxj jgh gS] ,sls /kwezO;kIr “ko”kjhjksa dks Hkh [khapdj
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izkXHkkxs’kq f’k[kf.Mrk.Mofo/kkS es?kSfoZrkuk¸;rsAA9A15

1- mÙkjjkepfjre~&HkoHkwfr d`fr] MkW yky jek;nqiky flag] “kkjnk iqLrd Hkou]


bykgkckn] 1956-
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52
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fnYyh] 2007
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fnYyh 1775-

53
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izkslsflax ,oa d`f"k dk;Z ij fuHkZj m|ksxksa dh cgqr vf/kd ek=k esa ekuo ds vkfFkZd lqn`<+rk ds
fy, laHkkouk;sa iznku djrk gSA tSls fd fefJr rsy fey] pkoy fey] vxjcÙkh fuekZ.k]
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oxZ ds ckjs esa fopkj djsx a sA D;ksafd ;g izHkqRo oxZ vPNh [kklh jde xjhcksa ds [kwu ilhus ls
ikrk gSA mlls viuk thou cgqr gh vPNh rjg ls pyrk gSA mlds thou esa dksbZ leL;k
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dksbZ oLrq dks mRikfnr djrk gSA vkSj u gh mldks bl ckjs esa irk gh gSA1

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cryk;k Fkk og Bhd ugha FkkA bu rhu oxhZ; iz.kkyh esa tehnkj dk LFkku cgqr gh fof'k"B
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fodkl ds lkFk gh lkFk bu “kCnksa ds egRo es vR;f/kd o`f) gks jgh gSA ;g “kCn m|ksx ls
cuk gSA m|ksx ekuo thou ds vfLRkRo dk egRoiw.kZ vk/kkj jgk gS vkSj blds vHkko es “kk;n
euq’; ftUnk ugha jg ldrk gSA oSls Hkh m|ksx dk lk/kkj.k vFkZ gSS ifjJe djuk ;k iz;kl
djukA iz’u ;g iSnk gksrk gS fd O;fDRk ifjJe D;ksa djrk gS \ mlds thou esa vusd
vko”;drk,¡ gS vkSj bu vko’;drkvksa dh iwfrZ ds fy;as mls ifjJe djuk t:jh gks tkrk gSA
og thou ;kiu ds lk/kuksa dks viukrk gS vkSj ;gh lk/ku m|ksx ds uke ls tkus tkrs gSA
m|ksxksa dks lapkfyr djus ds fy, ;U=ksa dh egRoiw.kZ vko”;drk fufgr gksrh gSA
blh ls ;a=hdj.k dk iznqHkZo gksrk gSA oSls Hkh izR;sd m|ksx ds fy;s e'khuksa dh egrh
vko’;drk gksrh gSA fdUrq e'khuhdj.k ml izfdz;k dks dgrs gaS ftlds ek/;e ls e'khuksa ls
m|ksxksa dk fodkl gksrk gSA vkS|ksxhdj.k dh ifjHkk’kk ihdkax pkx us bl izdkj dh gS

54
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vko';drk gksrh gSA blds vUrxZr os vusd ekSfyd ifjorZu fu:fir gksrs gSaA ftldk euq";
ds thou esa O;kolkf;d lkgl ;k ;a=hdj.k dh fØ;k ls fodflr gksrk gSA3 uohu m|ksx ds
fuekZ.k ls u, cktkj dh LFkkiuk gksrh gSA bl [kkst ds fy, fdlh u, {ks= dk “kks’ k.k gksrk
gSA la{ksi esa vkS|ksxhdj.k ,d lk/ku gS ftldk iz;ksx iw¡thifr etnwjksa ls vf/kd dke ysdj
muds osru dk 'kks"k.k djrk gSA ftlds }kjk iw¡th dk og iw¡thifr foLrkj ,oa fodkl dk;Z
Lo;a esa djrk gSA

'kks/k i= m|ksxksa dk ekuo thou ij vkfFkZd izHkko dk v/;;u ,d izdkj dk f}rh;d


lkexzh ladyu ds vk/kkj ij 'kks/k i= rS;kj fd;k x;k gSaA ftlesa fo'ys"k.kkRed i)fr ds }kjk
v/;;u djus dk iz;kl fd;k x;k gSA 'kks/k izfof/k esa fo}kuksa ds ekxZn'kZu] 'kks/k tuZy] i= ,oa
if=dkvksa ds ek/;eksa ls Hkh v/;;u fd;k x;k gSA blds vusd igywvksa dks Nwus ds fy, lUnHkZ
xzUFkksa ds fy, iqLrdky;ksa vkSj bUVjusV dk Hkh lgkjk fy;k x;k gSA

th-Mh- ,p- dkSy & ßJe&la?k ls vk'k; Jfedksa }kjk ,d vFkok vusd O;olk;ksa esa
cuk, x;s la?k ls gSa tks fo'ks"kr% lnL;&Jfedksa ds izfrfnu ds dk;Z ls lEcfU/kr vkfFkZd&fgrksa
dh lqj{kk vkSj muesa o`f) ds mÌs'; ls cuk;s tkrs gSaAÞ4
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fujUrj ifjorZu vkSj ifjo)Zu gksrs jgrs gSaA ;g xfr”khy “kCn gSA
2- vkS|ksxhdj.k dk lEc/k mRiknu ls gSA m|ksxksa dks fufeZr djus dk ewy mns”; oLrq
dks mRikfnr djuk gSA
3- vkS|ksxhdj.k vkSj e'khuhdj.k nksuksa ,d nwljs ls lEcf/kr gSA e'khuksa ds vHkko es
m|ksxksa dks LFkkfir ugha fd;k tk ldrk gSA
4- vkS|ksxhdj.k dh fn'kk esa uohu m|ksxks dks fufeZr djus dh vko';drk gksrh gSA
5- vkS|ksxhdj.k dh izfØ;k esa izkÑfrd oLrqvks dk vf/kd ek=k esa nksgu fd;k tkrk gSA
6- vkS|ksxhdj.k dh fn'kk esa NksVs m|ksx gks ;k cM+s nksuksa dk mÌs'; iw¡th dk fodkl vkSj
foLrkj djuk gSA
7- vk|ksxhdj.k esa etnwjksa dh vkfFkZd fLFkfr dks /;ku rks fn;k tkrk gSA muds ifjJe ds
cjkoj mUgsa ewY; ugha nsrs gSaA
vkS|ksxhdj.k dh fn'kk izR;sd jk"Vª ds fy, mi;ksxh gSA blh izdkj Hkkjro’kZ es Hkh
bldk foLrkj fdlh Hkh izdkj ls de ugha gSA Hkkjr es vkS|ksxhdj.k dh vko’;drk Hkkjro’kZ
1947 dks LorU= gqvk vkSj ;g¡k ij okLrfod vFkkZs es vkS|ksxhdj.k dh 'kq:vkr LoraU=rk ds
ckn ls gh vkjEHk gksrh gSA Hkkjro’kZ esa vkS|ksxhdj.k dh egRoiw.kZ vo’;drk fufgr gksrh gSA

55
oh-oh- fxfj] & ßJfed&la?kka ls gekjk vk'k; ,sls laxBuksa ls gS ftudk fuekZ.k ,sfPNd
:i esa lkewfgd&'kfDr ds vk/kkj ij] Jfedksa ds fgrksa dh j{kk ds fy, fd;k tkrk gSaAÞ5 vkfFkZd
n`f’V l Hkkjr dks lEi+Uurk vU; ns’kkaas dh rqyuk esa dgha de gSA ns’k ds laUrqyu esa vkfFkZd
fLFkfr dk egRoiw.kZ ;ksxnku gksrk gSA blh esa ns'k dk fodkl fufgr gSA bUgha fodkl ds dkj.k
vkS|ksxhdj.k dh fo'ks"k vo”;drk gksrh gSA Hkkjr d`f’k iz/kku ns’k gSA fdUrq ;gk¡ ds lk/ku]
gy] cSy]cht] i’kq vR;Ur gh fiNM+h voLFkk ds gSA lkFk gh fdlku :f<+oknh vkSj
vU/kfo”oklh gSAmls [ksrh ds fy;s izd`fr ij vkfJr jguk iM+rk gSA Hkkjr esa d`f’k dh mUufr
ds fy, vkS|ksxhdj.k vko’;d gSA
vkj- ,y- LVhosUlu egksn; ds erkuqlkj %& ßlQyrk vR;Ur ljy gS] fdUrq gesa dfBu
ifjJe djuk iMsx + k ,oa fo'okl ik= cuuk iMsx + kA O;fDr dks fcuk ihNs dh vksj ns[ks gq,
6
fujUrj vkxs gh c<+rs pys tkuk pkfg,AÞ
vkS|ksxhdj.k dk tula[;k ij Hkh izHkko iM+rk gSA Hkkjr esa tula[;k es rhoz xfr ls
o`f) gks jgh gSS vkSj bl o`f) dks jksdus ds fy, vkS|ksxhdj.k vfuok;Z gSA vkS|ksxhdj.k gksus ls
vkt tula[;k ds dkj.k pksjh] vxtuh vkfn vijk/kksa ls O;fDr dks NksVs&cM+s jkstxkj izkIr gks
tkrs gSA ftudksa bu vijk/kksa ds fy, le; Hkh ugha feyrk gSA ftllsa budh dqN vko';drkvksa
dh iwfrZ gks tkrh gSA Hkkjr es csjkstxkjksa dh la[;k es Hkh o`f) gks jgh gSSA vkS|ksxhdj.k ds
ifj.keLo:Ik yksxksa dh vkenuh esa Hkh o`f) gksrh gSA vkS|ksxhdj.k ds ek/;e ls u, m|ksxksa dh
LFkkiuk dh tk ldrh gSA vusd O;fDr;ksa dks jkstxkj fn, tk ldrs gaSA Hkkjr es lkefjd
n`f’V ls Hkh vkS|ksxhdj.k dk vR;f/kd egRo gSaA vUr esa vkS|ksxhdj.k ds ek/;e ls gh Hkkjr
dk lokZxh.k fodkl fd;k tk ldrk gSA vkS|ksxhdj.k ds ek/;e ls fo’kky m|ksxksa vksSj y?kq
m|ksxksa easa lkeUtL; LFkkfir fd;k tk ldrk gSA blds }kjk ;q) lekxzh dk mRiknu fd;k tk
ldrk gSA Hkkjro’kZ esa tgk¡ y?kq m|ksxksa dh vf/kdrk gSA] vkS|ksxhdj.k vR;Ur gh egRoiw.kZ gSA
vUr es] nwljs ns’kksa dh rqyuk esa Hkkjr esa vkS|ksxhdj.k dh vko”;drk ls vf/kd gSA bldk
dkj.k ;g gS fd Hkkjr esa izkd`frd lk/ku vf/kd gS] vFkZ O;OkLFkk fodkl dh izfdz;k es vkSj
lkekU; turk dk jgu&lgu dk Lrj fuEu gSA bu lc dh O;ofLFkrk izxfr ds fy, Hkkjr esa
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Hkkjr dh Lora=rk ds i'pkr~ Hkkjrh; lykgdkjksa us xzkeh.k fodklksa vkSj m|ksxksa dks
fodflr djus ds fy, gj txgksa esa iapo"khZ; ;kstukvksa dk lapkyu dj xzkeh.k fodkl ds
fofHkUu dk;ZØeksa dks izkjaHk fd;s x;sA tks lu~ 1977 esa xzkeh.k {ks=ksa ds xjhc vkSj etnwjksa gsrq
dk;Z iznku djus ds mÌs'; ls ßdke ds cnys vukt ;kstukÞ7 izkjEHk dh xbZ FkhA vkS|ksfxd
uhfr ,oa fØ;kUo;u dh ;kstukvksa esa FkzLV lsUVj dh vksj izHkko fn[kkbZ nsrk gSA vkS|ksxhdj.k
ds ifj.keLo:Ik ,d LFkku ij m|ksxksa dh LFkkiuk gksrh gSA Ñf"k midj.k] vc FkzLV lsDVj esa
vkVkseksckby] Ñf"k u;s midj.k ds }kjk u;s chtksa dk l`tu gksus ls O;fDr eas vk/kkfjr m|ksx
,xzhdYpj ,fEIyesaVl] [kfut ij vk/kkfjr m|ksxksa] thou j{kd vkS"kf/k;ksa ,oa [kk| m|ksx
fi'ksdfuax] vkVksa eksckby] dEiksusUVl] OgkbV xqM~l] nwj lapkj rFkk js'ke m|ksx lfEefyr gSaA
iz'kkfud fu.kZ; gS fd FkzLV lsDVj ds m|ksxksa dks fo'ks"k lqfo/kk;sa iznku dh tkosxhA fdUrq ;fn

56
xgjkbZ ls ns[kk tk, rks vkS|ksxhdj.k vkSj uxjhdj.k es dksbZ vUrj ugh gSA cfYd mUgs ,d gh
oLrq ds nks igyw dgs rks dksbZ vfr”;ksfDr ugh gksxh ,d dh vkHkko ess nwljs dk vFkZ vLi’V
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fodkl gqvk ogh uxjks dk Hkh fodkl gqvkA vusd uxj ,sls Hkh gSA ftldk fodkl fdlh [kkl
m|ksxksa ds dkj.k ugh gqvk gSA fdUrq ogk¡ m|ksxks dk Lo:Ik gks gh tkrk gSA tgk¡ ,d m|ksx
dh LFkkiuk gksrh gSA bathfu;fjax] jlk;fud moZjd] bysDVªkfuDl] [kk| lalk/ku IykfLVd] ,oa
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ldrk gSA

;g m|ksx tgka ,d vksj ekuo thou dh vusd mi;ksfxrkvksa ds fy, fufgr gksrh gSA
ogk¡ ij etnwjh dh etnwjh gsrq Hkh egRoiw.kZ ekuk tkrk gSA ogk¡ ij fo’kky tula[;k ,d
LFkku esa fuokl djus yxrh gSAbl tula[;k dh vo’;drkvks dh iwfrZ ds fy, vusd m|ksxks
dh LFkkiuk gks tkrh gSA fo’kky tula[;k ds ifj.kkeLo:Ik vusd izdkj dh laLFkkvksa dk TkUe
vkSj fodkl gksrk gSA bl izdkj uxjhdj.k dh izfdz;k iwjh gksrh gSA fuokfl;ksa ds thou Lrj
dks mUufr djrs gS ogh nwljh vksj vis{kkd`r de iw¡th esa jkstxkj ds volj miyC/k djus ,oa
mRiknu esa egRoiw.kZ ;ksxnku iznku djrs gSA

1- ih-lh- xqIrk ,oa lh-,y- prqosZnh] O;olkf;d okrkoj.k ,oa m|ferk] Jh egkohj cqd
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57
ekuoh; vkSj i;kZoj.kh; HkkSxksfyd :i ls ekuo thou ds fy, mi;ksxh gSA euq’; dk
fuekZ.k i;kZoj.k es ik;s tkus okys rRoksa ls gqvk gSSA euq’; dk fuekZ.k ikap rRoksa ls feykdj
gqvk gSA feV~Vh] ty] ok;q] vfXu] vkdk’k ls gqvk gSA lkFk gh lEiw.kZ Ik;kZoj.k euq’; ds
dY;k.k ds fy, gh fd;k x;k gSA euq’; viuh Kkurkol vius vusd Ik;kZoj.kh; dk;Z izR;{k
u lgh vizR;{k :Ik ls ogkW dgh&u&dgh ekuo dY;k.k djrk gSA euq’; vkSj Ik;kZoj.k dk
n’kZu euq’; ds uSfrd ewY;ksa ,oa drO;Z cks/k dh vksj /;ku fnykrk gSA euq’; tc&tc Ik;kZoj.k
dh vis{kk fd;k mldk loZuk’k gqvkA euq’; dh vVwV “kfDRk i;kZoj.k dh ,d lk/kkj.k pksV Hkh
ugh lg~ ldrh gSA

Hkkjr esa euq’; dks Ik;kZoj.kh; pqukSfr;k¡ fey jgh gSA ftldk lcls egRoiw.kZ dkjd
euq’; dks Bgjk;k tk jgk gSA gekjs lkeus lcls cM+h pqukSrh tula[;k dh vf/kdrk dks lhfer
djuk gSSA ;g ugh gS fd tula[;k fu;a=.k Lor% fodkl djsxk ijUrq fodkl tula[;k o`f)
njksa esa gkL; djsxkA Hkkjr es tula[;k xjhch vkSj Ik;kZoj.k ijLij lacfa /kr gS Hkkjr izk;% xjhc
yksxksa ls le`) Hkwfe gSA xjhch vkSj Ik;kZoj.kh; fuEuhdj.k ds chp lECkU/k vfr n`<+ gSa ;g eq[;
eqÌk vkSj lcls cM+h pqukSrh gSA ouks dh vU/kk&/kqU/k dVkbZ vkSj ty Lrj dk fxjrk xzkQ
ftldk ifj.kke ns[kk tk jgk gS fd ufn;ksa esa cka/k cuk dj taxy dks mtkM+k tk jgk gS
ftldk Ik;kZoj.kh; izHkko ekuo ij iM jgk gSA

izLrkfor “kks/k i= dh izof` Ùk lkS)kfUrd gS vr% fo’k;@’kks/k leL;k ds vuq:Ik rF;


ladyu ds f}rh;d L=ksrks dk iz;ksx v/;;u ds nkSjku fd;k x;k gSA ftlesa lUnHkZ xzU Fk
iqLrdky; i=&if=dkvksa ,oa usV ds ek/;e ls v/;;u lkekxzh dk p;u dj rF; fo”ys’k.k
dk iz;kl fd;k x;k gSA

euq’; vkSj Ik;kZoj.k n’kZu vkt Ik;kZoj.k esa vR;vko’;d n’kZu dk fo’k; cu x;k gSA
ftlus lEiw.kZ ekuo lekt dks bl rF; ij xgjkbZ ls fopkj djuk gksxk dh vkt gekjs thou
lqjf{kr dSls jgs\

Ik;kZoj.kh; lek/kku dk fodkl bl izdkj gksuk pkfg, ftlls thou dh xq.koRRkk rFkk
Ik;kZoj.k dks dksbZ gkfu u gks Hkkjr esa bls xaHkhjrk ls ys ldrs gSA

58
Ekuq’; bZ’oj dh loksZd`’B d`r gSA LFkypj] ty pj ,oa uHkpjksa es ls euq’; dks lcls
Js’B bZ”oj us cuk;k gSA dsoy euq’; gh og d`r gSA ftlesa lkspus le>us fu.kZ; ysus vkfn
dh “kfDr izkIr gS euq’; dk fuek.kZ Ik;kZoj.k es ik;s tkus okys rRoksa ls gqvk gSA *fNr ty
ikod xxu lehjk] iap :fpr vfr v/ke “kjhjk* vFkkZr~ ekuo “kjhj dk fuekZ.k vkRek lfgr
feV~Vh] ty] vfXu] gok] vkdk’k ls gqvk gSA lkFk gh lEiw.kZ Ik;kZoj.k euq’; ds dY;k.k ds
fy, gh fd;k x;k gSA euq’; viuh Kkurk ol vius vusd Ik;kZoj.kh; tcfd izR;{k u lgh
vizR;{k :i ls ogkW dgh&u&dgh ekuo dY;k.k djrk gSA tSls& fgald i’kq gekjs Qlyks ds
fy, nq’eu “kkdkgkfj;ksa dks [kkdj Ik;kZoj.kh; lUrqyu cuk;s j[krs gSA “kiZ] euq’; ds fy,
gkfudkjd ekurs gSA fdUrq pwgksa tSls gekjs fy, uqd’kku nk;d tkuojksa dks [kkdj euq’; ds
fy, ykHknk;d fl) gksrk gSA euq’; ,oa Ik;kZoj.k ,d gh flDds ds nks igyw gSA nksuks esa ls
euq’; vius d`R;ksa ls Ik;kZoj.k laj{k.k ,oa lqj{kk djrk gSA vkSj euq’; gh Ik;kZoj.k dks uqd’kku
igqpkrk gSA vFkkZr~ euq’; vkSj i;kZoj.kh; izfrfdz;k “kq: gks tkrh gSA vkSj rks euq’; dks
uqd’kku mBkuk iMrk gSA gekjs ikSjkf.kd] lfgR;ks]a yksddFkkvkssa ,oa fdonfUr;ksa esa dgh&u&dgh
;g ckr dgh xbZ gSa fd euq’; tc Ik;kZoj.k ds lkFk NsM+NkM djrk gSA rks Ik;kZoj.k Hkh viuk
jkSnz :[k fn[kkdj euq’; dks izrkf.kr djrk gSAekyFl us tula[;k o`f) dh ?kkrd crkrs gq,
dgk gS fd ;fn euq’; tula[;k o`f) dks uSfrd rjhdksa ls ugh jksdrk rks izkd`frd izdksi iSnk
gksrs gSA tSls & ck<+] lw[kk] vdky] egkekfj;kW rwQku] ;q) ,oa HkwdEi bR;kfnA ns[kk rks ogka
rd x;k gS fd euq’; Lo;a i;kZoj.kh; laUrqyu cuk ysrk gSA tSls& tula[;k o`f) gksus ij
lÙkk ds fy, la?k’kZ egkHkkjr dky bldk Tokyar mnkgj.k gSA oSKkfud izxfr us euq’;
Ik;kZoj.k dks u /;ku ns dj v/kk /kqU/k fodkl dh gksM es vkxs c<+us dks rkRi;Z jgrk gSA
ifj.kke lkeus gS fo’kSyh xSls mRiUu gksrh gSA ty iznwf’kr gksrk gSA /ofu izn’w k.k gksrk gSA
dkj[kkuks ds ikl HkhM+ mRiUUk gksrh gSA tks nq?kZVuk vkSj vijk/k dk dkj.k curh gSA eqEcbZ dh
pky ,oa psUubZ dh psjh xUnh ofLr;k¡ Ik;kZoj.kh; laUrqyu foxkMus esa rkRi;Z jgh gSA ftl
dkj.k ;kSu vijk/k] Uk’kk [kksjh] vijk/k izo`fÙk ,oa fcekfj;k¡ cMs+ iSekus ls ikbZ tkrh gSA vusd
;kSu jksx bUgh ofLr;ksa dk ifj.kke gSA o`{kks dh vU/kk&/kqU/k dVkbZ lM+ds] ,oa ugj vkS|ksfxd ,oa
vkoklh; ofLr;ksa dks clus es fd;k tkrk gSA ftldk nq’ifj.kke vo’kkZ] vdky] ,oa Xykscy
okfeZx ds :I es fn[kkbZ nsrk gSA okrkoj.k esa dkcZu MkbZ vkDlkbM dh vf/kdrk tks m|ksxksa
,oa okguksa ds /kqvksa ls mRiUu gksrk gSA okrkoj.k dks xeZ djus es lgk;d gksrk gSA ftldk
ifj.kke gS dh vkt] o’kkZ okyk {ks= ysfdu vo’kkZ okys {ks= Hkh’k.k o’kkZ ,oa ck<+ dk f’kdkj gks
jgs gSaA lkFk gh /kqvksa dk oQZ fi?ky dj eSnkuh ufn;ksa esa ikuh dh vf/kdrk iSnk dj jgk gSA
ftlls lkeqUnz dk ty Lrj Å¡pk mB jgk gSSA ftldk ifj.kke leqUnz ds fdukjs clus okyh
cfLr;ksa dks ty esa lek nsus es gks x;k A lqukeh bldk mnkgj.k gSA
dhMs&+ edksMs dks ekjkus ds fy, dhVuk”kd nckb;ksa ds fuekZ.k ls Ik;kZoj.k iznwf’kr gks
jgk gSA ps;j uscy w ,oa Hkksiky xSl dk.M bldk mnkgj.k gSSA
v/kk&/kqU/k dkj[kkuksa dh LFkkiuk ls ufn;ksa dk ty dkj[kkuksa ds fudyus okys dpus ls
iznfw ’kr gks jgk gSA ftlls ty tho lekIr gks jgs gSA ufn;ksa dk iznwf’kr ikuh u tkuojksa ds
mi;ksx ds fy, ugh gh d`f’k ds fy, mi;ksxh gSA vkxjk ,oa dkuiqj ds twrs dEifu;ksa ls
fudyus okyk dpjk xaxk dks csgn nwf’kr dj fn;k gSA vkt ;gh gkyr vU; ufn;ksa dk gSA

59
Ik;kZoj.kh; vlUrqyu dk ifj.kke gS fd euq’; dh izo`fÙk;k¡ nq’o`fÙk;ksa es ifjofRrZr gks tkrh gSA
vR;f/kd tula[;k osjkstxkjh iSnk djrh gSA tks vijk/k dks izksRlkfgr djrh gSA vkSj euq’;
vuSfrd ewY;ksa dks egRo nsus yxrk gSA Hk’Vªkpkj xou vkfn] izo`fÙk;k¡ bl ckr dk }Sord gsA
euq’; vkSj Ik;kZoj.k ;fn vius&vius lhekvksa es jgdj vius drO;ksa dk fuokZgu djrs
gaSA u rks euq’; dk uqd’kku gksrk ugh Ik;kZoj.k dk gksrk Ik;kZoj.k vpsru gS oks vius rjQ ls
dksbZ igy ugh djrk Ik;kZoj.k dks NsMus ,oa vlaUrqfyr djus ds fy, euq’; gh djrk gSA
vius LokFkZ vkSj egRokdka{kh LokFkZ ds fy, fdlh ij fopkj ugh djrk vUUkr% uqd’kku euq’;
dks gh mBkuk iMrk gSA
vr% euq’; vkSj Ik;kZoj.k dk n”kZu euq’; ds uSfrd ewY;ksa ,oa dÙkO;Z cks/k dh vksj
/;ku fnykrk gSA euq’; tc&tc Ik;kZoj.k dh mis{kk fd;k mldk loZuk’k gqvkA euq’; dh
vVwV “kfDRk i;kZoj.k dh ,d lk/kkj.k pksV dks ugh lg~ ldrhA euq’; dk drO;Z gS fd
i;kZoj.k dks viuk lg;ksxh ekus mldk laj{k.k djsA ,oa mls ekrk&firk tSlk ntkZ nsA
Ik;kZoj.k lcls ljy vFkksZ esa gekjk ifjos’k gh Ik;kZoj.k gSA Hkkjr o’kZ gh ,slk ns’k gS
fd tgk¡ Ik;kZoj.k ls lacaf/kr Kku u;k ugh vfirq ,d /kjksgj gS i`Foh dks ekrk ekuus dk
n`f’Vdks.k gekjs thou es vrhr ls fo|eku jgk gSA Ik’pkR; vko/kkj.kk ges Ik;kZoj.k lacU/kh
?kVdksa dks oSKkfud i= ls Kkr djokrh gSA fd Hkkjrh; n’kZu esa Ik;kZoj.k ds oSKkfud i= ds
Kkr djokrh gSA fd Hkkjrh; n’kZu esa Ik;kZoj.k ds oSKkfud i{k ds lkFk blds laj{k.k ds uSfrd
nkf;Ro Hkh lkSis x;s gSA izkphu dky ls ysdj vktrd] fo”ks’k rkSj ij fiNyh lfn;ksa esa vU;
thoksa dh rqyuk esa ekuoh; xfrfof/k;ksa ls Ik;kZoj.k lokZf/kd izHkkfor gqvk gSaA ekuo thou dh
xfrfof/k;ksa ds fy, mldh ewyHkwr vko’;drkvksa dh iwfrZ ds fy, vko’;d FkhA ijUrq vf/kdka’k
xfrfof/k;k¡ ekuo dks vf/kd lq[kh cukus ,oa foykflrk iw.kZ thou O;krhr djus ds fy, FkhA

euq’; vkSj Ik;kZoj.k dk n’kZu f'k{kk fodkl dh /kqjh gS fodflr lekt dk mÌs”;
mlesa vf/kd ls vf/kd O;fDr;ksa dk f’kf{kr gksuk gSA fodkl ds fy, lekt ds izR;sd o.kZ dks
f'k{kk ds vf/kd volj miyC/k gksuk pkfg,A fodkl’khy ns’kksa esa fofHkUu {ks=ksa es fo’ks’kKrk
dh vo’;drk gksrh gSA tks f’kf{kr O;fDr;ksa ds dMh la[;k esa gksus ls vkrh gSa] ysfdu f'k{kk
dk mÌs’; flQZ fMxzh /kkjdksa dks iSnk djuk ugha] cfYd O;fDr;ksa dks vPNk thou ;kiu djus
es l{ke cukuk gksuk pkfg,A f'k{kk O;fDr;ksa dks mfpr fu.kZ; ysus vius vf/kdkjks ds izfr ltx
cukus vkSj muds dRrkZO;ksa dks djus ;ksX; cukrh gSA f'k{kk ,slh gks tks O;fDr;ksa dks vius
Hkfo’; vkSj vkus okyh ih<+h ds lEcU/k es lkspus ;ksX; cuk,A f'k{kk dk mÌs’; lkekftd
ln~Hkko vkSj lekurk ykuk pkfg,A ftlls i;kZoj.k ekuo vkSj n’kZu dk cpk;k tk ldsA
t:jrksa vkSj foykflrk dh ekU;rk,a Hkh O;fDr&O;fDr] leqnk; vkSj ns’kksa ds fglkc ls cnyrh
gSA gks ldrk gS fd dqN yksx cqfu;knh t:jrks dks thus ds fy, t:jh le>s rks dqN yksx
reku lqfo/kkvksa dks cqfu;knh t:jrsa le>sA gesa ;g /;ku esa j[kuk gh gksxk fd vfr tula[;k
vkSj vfrmiHkksx] nksuksa dk Ik;kZoj.k ij vlj iM+rk gSA u nksuksa eqn~nksa dh iM+rky vkSj mudk
lek/kku bls /;ku esa j[kdj gh <w<a k tkuk pkfg,A

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61
fdlh ns'k ;k izn's k ds vkfFkZd fodkl ds fy, m|ksx ,oa O;kikj dh fLFkfr vPNh gksxh
vko';d gSA m|ksx ls miHkksx o iw¡thxr oLrqvksa dk mRiknu gksrk gSA ftlls izkÑfrd o
ekuoh; lalk/kuksa dk leqfpr nksgu] jkstxkj volj esa o`f)-gksrh gS ogha O;kikj }kjk oLrqvksa
miHkksDrkvksa rFkk leqfpr fooj.k {kerk ,oa fooj.k o foØ; lk/kuksa dk leqfpr fodkl gksrk
gSA
e/;izn's k ,oa izkÑfrd lalk/kuksa ls ifjiw.kZ jkT; gSA vkfFkZd dkj.kksa ,oa f'k{kk&
tkx:drk dh deh ds dkj.k vkS|ksfxd o O;kolkf;d xfrfof/k;k¡ xfr ugha idM+ ldhA
'kkldh; ;kstukvksa dks iwjk djus ds fy, okf.kfT;d dj /ku dh miyC/krk fu/kkZfjr
djrk gSA uksVoUnh ds i'pkr~ ;g vk'kadk O;Dr dh x;h Fkh] fd vkS|ksfxd o O;kolkf;d
xfrfof/k;k¡ izHkkfor gksxh] fdUrq ,slk ugha gqvk ofYd vizR;{k dj ds vUrxZr vkus okys lHkh
djksa miyC/krk esa o`f) gqbZ gSA dfri; dfBukbZ;k¡ gS ftudk fujkdj.k fn;s x;s lq>koksa ds
vey ls fd;k tk ldrk gSA
izn's k dk vkS|ksfxd o O;kolkf;d xfrfof/k;k¡ fnu izfrfnu ldkjkRed :i ls vkxs c<+
jgh gSA vk'k; gS] izns'k dk prqeqZ[kh fodkl gksxkA

m|ksx ,oa O;kikj fdlh ns'k o izn's k ds vkfFkZd fodkl ds vk/kkj gksrs gSaA m|ksxksa ls
yksxksa dks miHkksx dh tkus okyh oLrqvksa o iw¡thxr oLrqvkas dk mRiknu gksrk gSA rFkk O;kikj
}kjk nwj&nwj rd ns'k o fons'kksa esa oLrqvksa dk forj.k gksrk gSA oLrqvksa dh miyC/krk] jkstxkj
l`tu] lalk/kuksa dk iz;ksx] izkÑfrd lk/kuksa dk nksgu rFkk yksxksa dk thou Lrj esa lq/kkj gskrk
gsA ns'k dh Lora=rk ds ckn m|ksx o O;kikj c<+kus ds fy, ;kstukvksa esa foÙkh; izko/kku fd;s
x;s] yksxksa dks tkx:d fd;k x;k 1991A dh vkfFkZd lq/kkj esa ykbZlsflax izFkk dks lekIr dj
bUlisDVj jkt ,oa vU; ykyQhrk 'kkgh ds dkj.k gksus okys Hkz"Vªkpkj o foyEcrk dks lekIr
dj fn;k x;kA m|ksx ,oa O;kikj dk lapkyu djus ds fy, cSdksa ,oa vU; foÙkh; laLFkkvksa
}kjk vklku _.k iznku djus gsrq izko/kku fd;s x;s lkFk gh _.kksa ij lClhMh] fctyh] ikuh]
Hkwfe o dPps eky vkfn dh iwfrZ lLrs nj djus dh O;oLFkk dh x;h] ftldk ifj.kke ;g gqvk
fd dei<s& + fy[ks o lk/ku&foghu yksxksa] efgykvksa] fodykaxksa o f'kf{kr csjkstxkjksa dks m|ksx
O;kikj pykus ds volj izkIr gq, rFkk lekt dk vkfFkZd] lkekftd fodkl rsth ls gksus yxkA
e-iz- {ks= dk izkÑfrd ,oa ekuoh; lalk/kuksa ls lEiUu jkT; gSA f'k{kk o tkx:drk ds vHkko
ds dkj.k fiNM+k gqvk FkkA fdUrq 'kkldh; iz;klksa ds dkj.k jkT; dk rsth ls fodkl gqvk gSA
'kkldh; jktLo esa Hkh o`f) gqbZ gS] ftldk mi;ksx izn's k ds lexz fodkl esa fd;k x;k gSA

62
'kks/kdk;Z dks iwjk djus ds fy, 'kks/k fof/k;ksa dk iz;ksx fd;k x;kA vk¡dM+ksa dk laxzg.k
f}rh; fof/k ls fd;k x;kA m|ksx o O;kikj foHkkx] okf.kfT;d dj foHkkx ls izkIr vk¡dM+s ,oa
lekpkj i=ksa esa izdkf'kr lwpukvksa dks vk/kkj cuk;k x;kA oxhZdj.k] lkj.kh;u ,oa fo'ys"k.k
fof/k }kjk fu"d"kZ fudkyus dk iz;kl fd;k x;k gSA

 e-iz- dk vkS|ksfxd o O;kikfjd fodkl i;kZIr ugha gqvk gSA


 uksV cUnh ls m|ksx o O;kikj dks >Vdk yxk gSA
 m|ksx o O;kikj ls izkIr djksa esa deh vkbZ gSA
 m|ksx o O;kikj esa fujk'kk dk okrkoj.k mRiUu gqvk gSA

'kks/k dk;Z gsrq vusd mÌs';ksa dks lEeq[k jD[kk x;k gSA
 e-iz- dh m|ksx o O;kikj dh fLFkfr dk v/;;u djukA
 uksV cUnh ds ckn m|ksx o O;kikj ls izkIr gksus okys okf.kfT;d dj dh fLFkfr dk irk
yxkukA
 izn's k dh m|ksx o O;kikj ds Vªs.M Kkr djukA
 okf.kfT;d dj dh leL;kvksa o dfBukbZ;ksa dk v/;;u djukA
 leL;kvksa ,oa dfBukbZ;ksa ds lek/kku ds mik; lq>kukA

e-iz- {ks=Qy dh n`f"V ls ns'k dk nwljk cM+k izn's k gSA izkÑfrd lalk/kuksa esa moZjk Hkwfe]
ou&lEink] [kfut lEink ¼dks;yk ,oa pwus dk iRFkj bR;kfn½
ty ls iwfjr ufn;k¡] ,oa i;ZVu LFky i;kZIr ek=k esa miyC/k gSA f'k{kk] flpkbZ]
LokLF;] ;krk;kr] lapkj o fo|qr lsokvksa dk i;kZIr fodkl gqvk gSA ifj.kke LokLF; izns'k dk
vkfFkZd fodkl rsth ls lapkfyr gqvk gSA 'kklu }kjk m|ksx&O;kikj dks c<+kus gsrq ;kstuk,sa
cukbZ x;h gSaA
uoEcj 2017 dh uksV cUnh dh ?kks"k.kk ds ckn ;g Hk; O;kIr gks x;k Fkk fd dgha
bldk izHkko izn's k ds m|ksx&O;kikj ij _.kkRed u iM+sA 'kkldh; foHkkxksa] O;kikj&okf.kfT;d
laLFkkvksa ,oa cSadksa dh vkfFkZd xfrfof/k;ksa dh iM+rky dh x;hA okf.kfT;d dj foHkkx }kjk
fofHkUu dj L=ksrksa dk v/;;u dj rF; izkIr fd;s x;s ,oa mudk izn'kZu lkj.kh ds ek/;e ls
oxhZdj.k i'pkr~ fd;k x;k gSA

63
1 oSV 19252-67 21950-00
2 lh,l Vh- 1118-33 1130-00
3 izos'k dj 308-1 3810-12
4 izksQls uy 316-36 325-05 3456 14-5 %
VSDl
5 euksjatu o 121-25 130-00
foKkiu dj

mi;qZDr lkj.kh ls Li"V gS fd izns'k esa izk;% lHkh djksa esa 2015&16 dh rqyuk esa
2016&17 esa o`f) gqbZ gSA jkT; esa ,d o"kZ dh dqy dj o`f) 3456 djksM+ :- gqbZ o o`f) nj
14-5 izfr'kr jghA fu"d"kZ :i esa dgk tk ldrk gS fd izns'k esa uksV cUnh dk izHkko csvlj
jgkA djksa ls izkIr jktLo dk vFkZ m|ksx O;kikj esa gksus okyh o`f) ls gSA izns'k m|ksx&O;kikj
esa mUufr fujUrj cuh gqbZ gSA
pkyw o"kZ 2017&18 esa foxr pkj ekgksa dk v/;;iu djus ij izkIr vk¡dM+s fuEu lkj.kh
esa iznf'kZr gSA

1 2016 928-20 2222-0 2198-0 2131-24


2 2017 1000-13 2551-7 2574-0 2294-5 932-00 13 %

mi;qZDr lkj.kh ls Li"V gS fd 2016 o 2017 ds pkj ekgks]a vizSy] ebZ] twu o tqykbZ
ekgksa ds dj jktLo ds rqyukRed v/;;u ls djus ls lHkh ekgksa esa 2016 dh rqyuk esa 2017 ds
lEcfU/kr ekg esa jktLo esa o`f) gqbZ gSA ;g o`f) 932 djksM+ :- o o`f) dh nj 13 izfr'kr jgh
gSA Li"V gS fd izns'k esa uksV cUnh dk vlj ugha izrhr gksrk gSA

64
 vusd m|ksx o O;kikj ls lEcfU/kr vk¡dM+s miyC/k ugha gks ikrsA
 ys[kk iqLrdksa dk lapkyu mfpr izdkj ls ugha fd;k tkrkA
 dj pksjh dh Hkh leL;k lgh lwpukvksa dh izkfIr esa lk/kd gSA
 Hkz"Vkpkj o ykyQhrk 'kkgh Hkh foHkkx esa lfØ; gSA

 lHkh vkS|ksfxd o O;kikfjd ?kjkuksa ds [kkrksa dk fof/kor lapkyu djuk pkfg,A


 lwpuk,¡ dEI;wVj esa ntZ gksuh pkfg, ,oa ys[kksa dh vkfMV le;&le; ij gksuh pkfg,A
 'kkldh; e'khujh dks lfØ; gksuh pkfg,A dj&pksjh o fglkc&fdrkc dh tk¡p
le;&le; ij gksuh pkfg,A
 dj dh nj Hkh dj pksjh dks izksRlkfgr djrh gSA vr% dj dh nj de dh tkuh
pkfg,A
 lHkh O;olkf;;ksa dks dj nk;js eas ykus dk iz;kl gksus pkfg,A

vusd dfBukbZ;ksa ,oa dherksa ds ckotwn izn's k esa okf.kfT;d dj fofHkUu L=ksrksa ls c<+k
gSA uksV&cUnh ls vk'kadk Fkh fd m|ksx&O;kikj foijhr fn'kk esa izHkkfor gksxs] fdUrq ,slk ugha
gqvkA bl {ks= esa i;kZIr lq/kkj dh xqtkabl gSA fn;s x;s lq>koksa ij vey djus ij i;kZIr dj
jktLo izkIr gksxk] ftldk mi;ksx izns'k ds lokZxh.kl fodkl esa gksxkA

1- bdksukfed losZ 2016&17


2- okf.kfT;d dj e-iz- fjiksVZ&2016&17
3- fjtoZ cSd vkWQ bafM;k] cqysfVu] 2016&17
4- lekpkj i=&if=dk,sAa

65
vkS|ksfxd f'k{kk dk vkfFkZd egRo gSA blh izdkj Hkkjro’kZ es Hkh bldk egRo fdlh Hkh
izdkj ls de ugh gSA Hkkjro’kZ 1947 dh Lora=rk ds ckn ls vkS|ksfxd f'k{kk dk egRo c<+rk
x;kA ftllsa O;fDr dks vkS|ksfxd f'k{kk ds fy, vkfFkZd fLFkr dks lqn`<+ djus dh vko';drk
eg'kwl gksus yxrh gSA tks ekuoh; lalk/kuksa ds ifj.kke Lo:i ;g f'k{kk vke vkneh ds ijs
FkhA ftllsa O;fDr dh xjhek dk iw.kZ /;ku j[k ikuk fdlh O;fDr ds cl dh ckr ugha FkhA
okLrfod vFkkZs es vkS|ksxhdj.k dh izfdz;k LoraU=rk ds ckn ls gh izkjEHk gksrh gSA Hkkjro’kZ esa
fuEudkj.kksa ls vkS|ksxhdj.k dh vo”;drk gSA ftlesa f'k{kk lcls egRoiw.kZ ekuh tkrh gSA tks
,d Hkkjr ,d fodkl'khy jk"Vª gSaA1 ftlds lkFk&lkFk lkekftd vkfFkZd vkSj jktuSfrd igyw
dks tksM+k tk ldrk gSA vkfFkZd n`f’V ls Hkkjr dks lEi+Uu ns”k ugha dgk tk ldrk gSA ns”k
ds laUrqyu vkfFkZd fodkl ds fy, vkS|ksxhd f'k{kk dh vR;Ur gh vo”;drk gSA Hkkjr d`f’k
iz/kku ns”k gSA fdUrq ;gk¡ ds ewy lk/ku] gy] cSy] cht] vkSj i”kq gh ekus tkrs gSA ftlls
;gk¡ dh vkoknh dk vf/kd Hkkx vR;Ur gh fiNM+h voLFkk eas ik;k tkrk gSA lkFk gh fdlkuksa
dh :f<+oknh ijEijk vkSj vU/kfo”oklksa dh ckxM+ksj us mUgas vf/kd :iksa esa fopfyr dj fn;k
gSA ftlds vk/kkj ij bl ns'k esa vkS|ksfxd f'k{kk dh rjQ cgqr gh de /;ku fn;k x;k gSA
D;ksafd vkS|ksfxd f'k{kk iz.kkyh cgqr gh eg¡xh gSA

'kks/k i= vkS|ksfxd f'k{kk dk vkfFkZd egRo uked ;g 'kks/k i= ,d izdkj dk f}rh;d


lkexzh dk iz;ksx fd;k gSA ftlesa fo'ys"k.kkRed i)fr dks vk/kkj ekuo dj bl bl i= dk
fu:fir djus dk ,d lQy iz;kl gSA 'kks/k izfof/k ds vUrxZr vusd fo}kuksa ds ds lq>ko]
'kks/k if=dk] ,oa vU; if=dkvksa ds ek/;e ls v/;;u fd;k x;k gSA blds lkFk&lkFk vusd
n`f"Vdks.kksa ds lkFk f'k{kk ij vf/kd tksj fn;k x;k gSA D;ksafd vkt Hkh ekuoh; thou esa euq";
21 lnha ds Hkkjr esa Hkh vkS|ksfxd f'k{kk ls oafpr eglw'k dj jgk gSA ftldk eq[; dkj.k
vkfFkZd igyw gSA bu vkfFkZd igyw ds fy, lkekftd vk/kkj ij thou dh vusd fn'kkvksa ls
fudyus okys 'kSf{kd laUnHkksZa dks v/;;u dk vk/kkj cuk;k x;k gSA blds lkFk iqLrdky;ksa ,oa
bUVjusV dh Hkh lkexzh dk iz;ksx bl rF; dks le>us ds fy, iz;ksx fd;k x;k gSA

vkS|ksfxd f'k{kk ds fodkl esa v/kkslajpukRed lalk/kuksa dh Hkwfedk dk egRoiw.kZ ;ksxnku


jgk gSA ftlls lkekftd vkSj vkfFkZd :iksa esa ekuoh; thou dh vusd dlkSfV;ksa ls O;fDr
tw>rk jgrk gSA ftldh fopkj/kkjk ls vkfFkZd fodkl ls ekuo lekt dh lgHkkfxrk lqfuf'pr
djkus esa f'k{kk dk egRoiw.kZ ;ksxnku jgk gSA m|ksx ds ek/; ls tgk¡ ,d vksj csjkstxkjh de
gksrh gSA2 ogha nwljh vksj lEiw.kZ ekuo lekt dh vk; esa o`f) gksrh tk jgh gSA ftlls 'kSf{kd
:i lsa vkfFkZd fLFkfr;k¡ vkM+s vk jgh gSaA ogha vxj esa nwljs rF;ksa dks ns[kus dk iz;kl djrs gSa

66
rc irk pyrk gSA fd ekuo lekt ds iw¡thifr;ksa dh o`f) gks jgh gSaA tc f'k{kk dh fLFkfr
etcwr gksxh ogk¡ 'kSf{kd vkSj vkfFkZd thou Lrj Hkh c<+ksÙkjh djsxkA bUgha mÌs';ksa ds vk/kkj ij
ljdkj ;kstukvksa ds }kjk vkS|ks;ksfxd Lrj dks Å¡pk mBkus dk iz;kl dj jgk gSaA
vkS|kfxd vk/kkj ij tula[;kk es rhoz xfr ls o`f) gks jgh gSSA blh dkj.k 'kSf{kd
fodkl nj Hkh c<+us ds LFkku ij iw¡thifr vkSj fu/kZu dk cVckjk gksrk pyk tk jgk gSA ftlds
dkj.k ekuoh; fopkj/kkjk ds vk/kkj ij bl o`f) dks jksdus ds fy, vkS|ksxhdj.k vfuok;Z gSA
tc ns'k l'kDr gksrk gSA ogk¡ dh tula[;k ds fy, f'k{kk egRoiw.kZ ;ksxnku nsus ds fy, rS;kj
gksrh tkrh gSA3 ftlds ifj.kke Lo:i O;fDr dh fopkj/kkjk dk ewy gh vkfFkZd raxh ds dkj.k
og f'k{kk ls oafpr gks tkrk gSA vkt Hkkjrh; leL;k dk fodjky :i esa csjkstxkjksa gSA tgk¡
ij i<+s fy[ks yksxksa dh la[;k dk fodkl ugha gksus ls vkfFkZd izxfr ds fy, lk/kd dh txg
ck/kd yx jgh gSaA tc u;s m|ksxksa dh LFkkiuk gksxh mlls u;s ;ksX; O;fDr;ksa dh ek¡x Hkh
c<+xs hA ftlls vkfFkZd xjhcksa vkSj iw¡thifr;ksa ds chp dk la?k"kZ de gksus yxrk gSA ;gk¡ ij
vkfFkZd folaxfr;ksa dks jksdk rks ugha tk ldrk fdUrq mUgsa vkxs c<+us dh izxfr esa ck/kj Hkh
dksbZ ugha cu ldrk gSA vkS|ksfxd f'k{kk ls f'kf{kr ;qok dks vU; yksxksa ls vkenuh gksxhA ftl
izdkj ls vkbZ-Vh-vkbZ- djds fudyk gqvkA O;fDr og Lo;a jkstxkj [kksy ldrk gSA ftldh
fopkj/kkjk Lo;a esa gh esy [kus yxrh gSA og Lojkstxkj [kksydj vU; yksxksa dks jkstxkj ns
ldrk gSA blls ljdkjh ra= dks Hkh csjkstxkjh dk cks> ugha >syuk iM+sxkA blls lkekftd
fLFkfr;ksa ds fy, euq"; Lo;a ftEesnkj gh ugha ekuoh; fØ;k Hkh mlds fy, mÙkj nk;h gksus
yxrh gSA xzkeh.k fodkl gsrq vkt Hkh yksxksa dh 'kSf{kd fLFkfr fgUnh ek/;e ls gksus ds dkj.k
tks izkFkZuk i= vaxzsth Hkk"kh gksus ij vke vkneh etnwjh vkSj dkjhxj ml i= dh Hkk"kk ugha
le> ikrs gSaA blds lEcU/k esa vU; O;fDr;ksa ls lgk;rk gsrq HkVdus iM+rs gSaA ,slh n'kk esa
dkjhxjksa dh fLFkfr fnuksa fnu vkS|ksfxd e'khuhdj.k gksus ls O;fDr esa dkQh ifjorZu utj vk
jgk gSaA4 vkxs pydj vkS|ksfxd f'k{kk dks izkIr djus okys v/kZdq'ky dkjhxj dks dkQh fnuksa
rd ljdkjh dk;kZy;ksa esa HkVduk iM+rk gSA vusd foHkkxksa ds dk;kZksa ds dk;Z {ks= fuf'pr ugha
gksrs ogk¡ mlsa cgqr gh uqd'kku Hkh mBkuk iM+rk gSA m|ksx foHkkx] [kknh xzkeks|ksx foHkkx]
lgdkfjrk foHkkx ,oa rglhy vkSj fodkl[k.Mksa dh dk;ksZa dh xfrfof/k;ksa esa iw¡thifr;ksa vkSj
nykyksa dks teckM+k jgrk gSA bu dk;Zfof/k;ksa esa fdlh izdkj dk lkeatL; ugha gksrk gSA vr%
v/kZdq'ky dkjhxj vusd foHkkxksa esa pDdj yxkus ds ckn og ?kj esa vkdj cSB tkrk gSA ,slh
n'kk esa euq"; dk thou vkfFkZd fLFkfr ls vkSj vf/kd ttZj gksrk tkrk gSA ftlesa dksbZ Hkh
O;fDr dYiuk ugha dj ldrk gSA vkS|ksfxd :i ls izkIr djus okys O;fDr f'k{kk ds :iksa esa
fu:fir gksrs tkrs gSaA ftldh ge dYiuk Hkh ugha dj ldrs gSaA ;gk¡ rd fd xzkeh.k fodklksa
ds {ks=ksas esa 'kgjh {ks=ksa esa vkdj vius dk;Z dh 'kq:vkr dj nsrk gSA5 mls NksVs m|ksxksa ls mlesa
ifjofrZr gksus dh izfdz;k izkjaHk gks tkrh gSA ges 'kgjhdj.k dh izfØ;k ls mUgsa thou dh vusd
fLFkfr;ksa dk irk py tkrk gSA mlds dk;Z esa NksVs dkjhxj Hkh vkdj viuk isV ikyus yxrs
gSaA bl izfØ;k ds pyrs gh xzkeh.k thou dh vksj ls og 'kgjh bykdksa dh vksj iyk;ku dj
tkrk gSA xk¡o dh tul[;k dh vkfFkZd lajpuk ij xgjk izHkko fn[kkbZ nsrk gSA blh vuqikr ls
xzkeh.k vkoknh vkt 'kgjksa dh vksj vkS|ksfxd f'k{kk vkSj dkjhxjh dks ysdj cgqr gh rhoz xfr
ls c<+ jgh gSA

67
vkS|ks;ksfxd vkSj 'kgjhdj.k ds thou esa ?kfu’V lEcU/k gSA bUgha lEcU/kksa ds vk/kkj ij
thou dks vR;kf/kd izHkkfor fd;k tkrk jgk gSA la{ksi esa vkS|ksfxd vkSj 'kSf{kd ifj.kke Hkh
vusdksa izHkkoksa dks Hkh fn[kkbZ nsrs gSaA ftudh fopkj/kkjk dks dkSu ugha tkurk gSA vkS|ksfxd :iksa
ns'k dh iztkrkaf=d lektokn dks lQy cukus esa bu m|ksxksa dh 'kSf{kd Hkwfedk jgh gSA ;gk¡
rd vkfFkZd lÙkk ds :i esa fodsUnzhdj.k dks dq'ky dkjhxjksa ds :i esa foHkkftr djds mUgsa
lekt dh eq[; /kkjk esa ykus gsrq bu m|ksxksa dk fo'ks"k LFkku jgk gSA ;gh dkj.k gS fd
vkS|ksfxd f'k{kk vkt ljdkj ds }kjk lapkfyr dj O;fDr dks csjkstxkjh ls eqfDr dk ,d
dne ls dne feykus dh ,d fe'kky dgha tk ldrh gSA6 bUgha m|ksxksa ds izfr ekuo tkx:d
vkSj laons u'khy gSA vkS|ksfxd f'k{kk dh izxfr us Hkfo";xkeh fØ;kvksa esa mudh fLFkfr vaxM+kbZ
ysus ds leku izrhr gksrh tk jgh gSA vkS|ksfxd fopkj/kkjk dks tksM+us ds uke ij mUgas
lkekftd lajpuk dh n`f"V lekt vkSj jk"Vª dh izxfr Hkh 'kSf{kd etcwrh ij gh fuHkZj djrh
gSA vc euq"; dks LQwfrZ ds lkFk buds fodkl dk;Z dks djus gsrq tqV tkuk pkfg,A D;ksafd ;s
m|ksx cM+s iSekus esa vkS|ksfxd :iksa euq"; dks /;ku ugha gVkuk pkfg,A fdUrq O;fDr dks y?kq
,oa dqVhj m|ksxksa dh vykspuk djuk vFkZO;oLFkk dks [krjs esa Mkyus tSlk izrhr gksrk gSA
orZeku esa f'k{kk ifjokj] lekt] rFkk jk"Vª dh egRoiw.kZ vko';drk gSA fdlh Hkh ifjokj dh
mUufr vkSj cgqeq[kh fodkl ds fy, ml ifjokj dk f'kf{kr gksuk cgqr gh egRoiw.kZ gSA ftlesa
ifjokj vkSj f'k{kk ds vVwV lEcU/k ds vusd igyw tqM+s gq, gaSA7 ;fn ifjokj ml ?kj dk ,d
O;fDr Hkh f'kf{kr gksxk rks mlds ifjokj esa f'k{kk dh miyfC/k dk Lrj Hkh Js"B gksxkA
vkS|ksfxd :i ls vxj ge ckr djrs gSa rks f'kf{kr vkSj vf'kf{kr ifjokjksa dh vis{kk f'kf{kr
ifjokjksa ds Nk=ksa dh 'kS{kf.kd miyfC/k mUufr dh vksj gksrh gSA ftlesa vfodflr vFkZ O;oLFkk
esa O;fDr dh iw¡thoknh O;oLFkk Je lk/; O;fDr;ksa muds dk;Z ds ewY;ksa esa ck/kk mRiUu djrs
gSaA O;fDr ds thou esa f'kf{kr ifjokj esa iz/kku gLrdyk m|ksxksa dh fLFkfr esa vfr'k; o`f) ds
dkj.k vkt izfrLi/kkZ dh fn'kk vf/kd n;uh; gksrh tk jgh gSA y?kq ,oa dqVhj m|ksxksa esa yxs
ykskxksa dks Hkh vusd :iksa ls 'kSf{kd :i ls etcwr gksus dh vko';drk gksrh gSA tSls rsy?kkuh
ds dkj[kkus LFkkfir djus ls rsy feyksa dks Hkh vfr'k; o`f) gksrh gSA ftlesa rsy] dh fdLe ij
,d iM+& s fy[ks dh ftKklk vkSj ,d vui<+ O;fDr dh ftKklk dk iz'u gh cM+k xw<+ gks tkrk
gSA xzkeh.k Lrj ij f[kykSus ds fuekZ.k ds LFkku ij vkt vk/kqfud :i ls IykfLVd ds f[kykSus]
O;fDr ds gkFkksa esa vk x;s gSaA8 gkFkksa ls /kku dh dqVkbZ dh txg] pDdh ;k feyksa dh LFkkiuk
gks xbZ gSA ftllas O;fDr dh LFkkuh; vko';drk rks rqjUr iwfrZ gks tkrh gSA ij mldh
fopkj/kkjk dk ewy dkj.k gS fd vf/kd la[;k csjkstxkjh ls Hkh tqM+rh tk jgh gSA vk/kqfud ;a=
dk iz;ksx vfrvko';d gSaA fdUrq blds lkFk f'k{kk vkSj csjkstxkjh dks Hkh de djuk pkfg,A
gkFkksa }kjk fufeZr dk;kZsa dh fofo/krk dks vf/kd :iksa esa ifjofrZr djrk gSA vkt dk m|ksx
D;ksafd vkS|ksfxd :iksa esa O;fDr dh fopkj/kkjk dk ewy :i gh e'khuhdj.k ij fuHkZj gks x;k
gSA dkj[kkuksa ds }kjk fufeZr crZuksa us viuk LFkku ysd s j [kqyh izfrLi/kkZ esa vxz.kh gksrs tk jgs
gSaA bu m|ksxksa dks pykus esa yksxksa us vusd izdkj ds dqVhj m|ksx gks ;k y?kq m|ksx ftlesa
O;fDr dh 'kSf{kd fLFkfr ds vk/kkj ij bUgsa ljdkjh lgk;rk izkIr gksrh gSA tks ifjokj vf'kf{kr
gS mlesa ;g ns[kus dks feyrk gS fd mldksa ljdkjh iSlk fudyokus esa nykyksa Hkh chp esa

68
ywVikV djrk gaSA xjhc etnwj O;fDr ds gkFkksa us flQZ dtZ yxrk gSA mlds vusd ek/;eksa ls
;s iw¡thifr vkSj nyky] lkjs iSls dks gte dj tkrs gSA y?kq vkSj dqVhj m|ksx ds uke ij
mlds ikl flQZ dtZ cprk gSA ckdh dqN Hkh ugha bllsa csjkstxkjh vkSj xjhch c<+rh tk jgh
gSaA blds lEcU/k esa O;fDr pfj=oku gqvk rks mldk Hkfo"; mTtoyrk ls O;fDr dk O;fDr dk
Hkko Lo fufeZr gks tkrk gS mlh rjg vkfFkZd {ks= esa vlhe lqfo/kkvksa ds dkj.k iznku gksus okys
vkS|ksfxd fodkl dh fn'kk Lor% lafnfHkZr gksrh tkrh gSA bl dkj.k vkS|ksfxd fodkl dh
ewyHkwr lqfo/kkvksa ds fy, f'k{kk dk vf/kd egRo gSA blds lkFk&lkFk mi;qDr Hkwfe] nwjlapkj]
;krk;kr] ty iznk;] dq'ky Je] ,oa v/kZdq'ky Jfedksa dh vko';drk gksrh gSA ßvFkZ'kkL= vkSj
Ýkalhlh lektoknh rFkk Ýkalhlh Økafrdkjh fl)kUr vFkkZr~ ftls ekDlZokn dgk tkrk gSAÞ9
ftlls 'kfDr ,oa usr`Ro Hkh ekuo thou dks lapkfyr djus esa egRoiw.kZ Hkwfedk fuHkkrh gSA

orZeku ;qx esa fu;kstu tSls ;qx dk fodkl gksrk tk jgk gSA bl ;qx esa fu;kstu dks
vR;f/kd egRo fn;k x;k gSA ftllsa lHkh jk"Vª dh izxfr dk vk/kkj vkfFkZd mUufr gSA ,slk
vk'k; yxk;k tk ldrk gS fd ;fn fdlh Hkh dk;Z dh ;kstuk c) rjhds ls fd;k tkrk gSA
ogk¡ lQyrk vo'; gh feyrh gSA bu ;kstuk ds dkj.k og dk;Z iw.kZ ugh gks ldrk gSA blds
lkFk&lkFk mlesa vk”kkrhr lQyrk ds laUns'k izkIr gksrs gSaA ftllsa fo”o dh vlhe fLFkfr
dk izpyu Hkh ns'k dh vkfFkZd fn'kk dh vksj vxzlj djrh gSA ftlesa f'k{kk egRoiw.kZ :iksa esa
ekuh tkrh gSA fdlh Hkh ns'k ds fu;kstu ds egRo dks Lohdkj djrs gSaA og pkgs lkE;oknh
fopkj/kkj dks ekuus okys gks] ;k iwthoknh fopkj dks Lohdkj djus okys gks ;k fdlh vU;
O;oLFkkvksa ds lapkyu esa fo”okl j[kus okys gksA

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69
iUuk ftys ds oukPNkfnr J`a[kyk,sa gSA ftuds dkj.k iUuk ftys dh lkSUn;kZRed NBk
fn[kkbZ nsrh gSA izFker% iUuk ftyk ghjk mRiknu dh [kkuksa ds uke ls Hkh ns'k esa izfl) gSA
;gk¡ vusdksa HkO; efUnj gksus ds dkj.k ;gk¡ dh je.kh;rk dk n`'; gh vyx gSA ;gk¡ dk
izkÑfrd lalk/kuksa ds ek/;e ls Hkh ekuoh; thou dh vusd laLFkk,sa Hkh lapkfyr gSA bldh
lhek Hkh mÙkj izns'k ds cknk ls rFkk if'pe esa e/;izns'k ds Nrjiqj] neksg] nf{k.k esa dVuh ,oa
iwohZ fn'kk esa lruk vkfn ftys LFkkfir gSA iUuk ftys ds fudV gh [ktqjkgksa Hkh i;ZVu dk
dsUnz gSA tgk¡ cgqr gh la[;k esa i;ZVd vkrs gSaA iUuk esa egkefr izk.kukFk dk efUnj gSA
ftlds n'kZukFkZ vusd txgksa ls yksx n'kZu gsrq vkrs jgrs gSaA iUuk lcls T;knk ghjk dh [kku
ds dkj.k izfl) gSA blds lkFk&lkFk ;gk¡ ?kfM+;ky Hkh ik;k tkrk gSA1 ;gk¡ vH;kj.; Hkh cgqr
gh fo[;kr gSA
;gk¡ cYnso th dk eafnj gS tks LFkkiR; esa iwjh rjg ls yanu fxfjtk?kj o gEih ds
eafnjksa dk izfr:i gSA tks vf}rh; gS ,oa tqxqy fd'kksj tSu eafnj J)k o HkfDr dk vuqie
dsUnz gSA ftys ds ik¡p vuqHkkx@fodkl[k.M vkSj rglhy fLFkr gSaA ;gk¡ vkokxeu dk i;kZIr
lk/ku u gksus ds dkj.k ;g ftyk m|ksx vkSj fodkl dk iz;kl fd;k x;k FkkA ysfdu orZeku
esa ;gk¡ ,d&nks bdkbZ;ksa dks NksM+dj 'ks"k lHkh cUn ds dxkj esa gks x;s gSaA ftyk eq[;ky; ds
fLFkr ikl esa gh mFkyh ghjk [kkuksa ds mR[kuu rFkk e>xok¡ esa ,u-,e-Mh-lh- }kjk vk/kqfud
fof/k ls mR[kuu gksrk gSA
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dk iz;ksx djrs gSaA ftysa esa feyh tqyh laLÑfr gS] ;gk¡ lHkh Hkkjrh; ijEijkxr R;kSgkj lHkh
lEiznk; ds yksx fey tqy dj eukrs gSaA bUgha izeq[k R;kSgkjksa esa dbZ LFkkuksa ij esys dk Hkh
vk;kstu gksrk gSA
fl)ukFk eafnj %& lysgk ds ikl gh fudV ou {ks=ksa dk leUo; gS ftlds dkj.k ,d
je.kh;rk dk LFkku ekuk tkrk gSA fl)ukFk dks fgUnw ekU;rk ds vuqlkj nsokf/knso egf"kZ vxLr
dh riksLFkyh ds :i esa tkurs gSA fl)ukFk eafnj esa nsokf/knso Hkxoku Hkksys'oj viuh reke
peRdkfjd 'kfDr ds :i esa izfr"Bkfir gSA fl)ukFk eafnj efrZdyk o f'kYidyk dk mRÑ"V
vkSj vkSfpR; iw.kZ inki.kZ izLrqr gksrk gSA2

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iqLrdky; i=&if=dkvksa ,oa usV ds ek/;e ls lkekxzh dk fo”ys’k.k fd;k x;k gSA ekuo ds
fy, i;ZVu dh vko';drk gksrh gSA D;ksafd ekuoh; thou esa euq"; vius eu dh 'kkafr gsrq Hkh
i;ZVu dk iz;ksx djrk gSA ftllsa vkt ;g lcls egRoiw.kZ fo"k; cu x;k gSA ftleas i;ZVd

70
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iM+rk gSA

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lEHkkoukvksa dks ns[krs gq, lajf{kr Lekjdksa dh lwph Hkh fufgr gksrh gSA izkphu f'ko eafnj ds
vuq:i ;gk¡ ds i;ZVu dh vkf/kd lEHkkouk,sa gSA
;gk¡ fgUnw ir egy gS ftlesa okLrqdyk dk izrhd cqUnsyh esa fgUnwir egy iUuk ls
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fgUnwir us 18 oha lnh ds mÙkjk)Z esa djk;k FkkA egy dk fuekZ.k oxkZdkj :i esa fd;k x;k
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HkO; izeq[k njoktksa ds nksukas vksj lqj{kk lSfudksa dh cfx;k gSA nqxZ ds ihNs vR;f/kd fjDr LFkku
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igkM+h ij tkrh gSA igkM+h dh Å¡pkbZ lkekU; /kjkry ls 500 gS ftlds e/; eas xqQk gS ftldks
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tydq.M ls gksdj gh yksx Hkxoku dks ty vfiZr djrs gSaA ftlesa dq.M ds nkfguh vksj jke
tkudh dk efUnj Hkh fLFkr gSA ok;h vksj tequkth gSA vkSj blds Åijh Hkkx esa lhrk dk jlksbZ
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dk ;K ekuk tkrk gSA4
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i;ZVu dh vusd laHkouk,sa fo|eku gSA

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izdkj ds lqUnj o`{k izikr dh 'kksHkk dks vkSj vf/kd c<+krs gSA ;g izikr vf/kd xgjk gksus ds
dkj.k vusd NksVs cM+s eafUnj vkSj xqQk;sa fufeZr gSA ;g ty izikr dsu unh dh ty dh
fo'kkyrk dks iznf'kZr djrh gSA bl jkf'k ds if'peh fn'kkvksa dh vksj ls vkdj mÙkj&iwoZ dh
vksj cgrh gSA ftldh lhek js[kk dks feyku djus ds fy, ea.Myk ds fudV dh izikr dk
fuekZ.k djrh gSA ;gk¡ dh mRÑ"B izfrekvksa esa fo".kq vkSj yodq'kk vkfn xkseos vfEcdk vkfn
_f"k;ksa dks egRoiw.kZ ekuk tkrk gSA

iUuk uxj ls 15 fd-eh- nwj ij ,sfrgkfld xqQk gSA cjkN xk¡o ds lehi vkSdsyk dk
izkxSfrgkfld dky esa ekuo ds jgus ds fy, fLFkr fpUg fn[kkbZ nsrs gSA ;gk¡ ds xs: jax dh
/kwlj yky fHkfÙk ds fp=ksa ls xqQkvksa esa jgus okys O;fDr;ksa ds fuokl dk izek.k feyrk gSA

71
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ftudh fo'ks"krk dk eq[; dkj.k jgk fd dqN taxyh tkuojksa dk f'kdkj djrs FksA5

iUuk vkSj Nrjiqj ftys dks lhek ij ogus okyh dsu unh ds nksuksa vksj fLFkr ouksa dh
lqUnjrk vkSj muesa ik;s tkus okys oU; izk.kh dk vkd"kZ.k dk dsUnz jgk gSA ftldh fo'kkyrk
vkSj oU; izkf.k;ksa ds j{kk dk vkJ; dsUnz jgk FkkA bldk lcls igys xxÅ uke ls bldk
izfrosnu gqvkA vH;kj.; ds uke ls foKIr fd;k x;kA lu~ 1977 bZ- esa xxÅ uke ls fo[;kr
fd;k x;k gSA tks vxs pydj jk"Vªh; m|ku ds uke ls fo[;kr gvk gSA blds lkFk 1981 dks
iUuk dk jk"Vªh; m|ku ?kksf"kr fd;k x;kA iUuk jk"Vªh; m|ku esa iUuk ftys ds rsjg xzkeksa dks
,oa Nrjiqj ftys ds vU; xzkeksa dks feykdj 539-9044 oxZ fd-eh- yxHkx dk vHk;j.; {ks=
fodflr gSA
iUuk jk"Vªh; m|ku esa vusdksa phrk vkSj 'ksj ik;s tkrs gSaA bl m|ku esa Hkkyw] phrk]
lkaHkj] pkSfl?kk] fpdkjk] ghj.k] uhyxk; vkSj blds lkFk&lkFk vU; izdkj ds NksVs&cM+s tkuokjksa
dk lajf{kr {ks= gSA

iUuk ftys dh igkM+h [ksM+k ekxZ ij fLFkfr dqN nwjh ij l?ku ouksa ds lkSUn;Z ds chp esa
c`gLifr dq.M gSA ;g dsu unh ds fdukjs esa fLFkr gSA ;g ?kkVh yxHkx 800 fQV dh xgjkbZ
esa fufeZr gksrh tk jgh gSA ;gk¡ ij vusd dq.M gSA bl ?kkVh esa mrjus vkSj izo's k djus ds fy,
cgqr gh [krjukd ekxZ gSA ftlls mrj dj ty izikr dh fLFkr LFkku ij tk;k tk ldrk
gSA ;g izxSfrgkfld dky ds f'kyk ys[kksa ds ek/;e ls Hkh bldh lajpuk Hkh vyx fdLe dh
yxrh gSA blfy, ;gk¡ ij vkus okys i;ZVdksa dk teckM+k yxk jgrk gSA ;gk¡ ds xjhcksa dk
lcls cM+k euksjatd vkSj eksgd i;ZVu dk dsUnz cu x;k gSA6 tgk¡ og fcuk iSlk [kpZ fd;s gq,
vklkuh ls igq¡p ldrs gSaA ftldh fopkj/kkjk dk ifj.kke gh vusd izdkj dh folaxfr;ksa ls
fufeZr gksrk gSA c`gLifr dq.M dh vkykSfdd NBk] LoPNrk rFkk 'kkfUr dk izrhd ekuk tkrk
gSA ;gk¡ ij vusd rjg dh eafUnjksa vkSj ouksa dk fo'kkyrk fn[kkbZ nsrh gSA ;gk¡ ij J)kyqvksa
dks ikjykSfdd vkuUn dh vuqHkwfr ls voHkwr gksrs gSaA ,slk fo'okl ekuk tkrk gSA fd Hkxoku
c`gLifr dk n'kZu Hkxoku jke us ;gk¡ fd;k FkkA ,slk ekuk tkrk gSA blh dkj.k bldk uke
c`gLifr dq.M j[kk x;k FkkA ;gk¡ ds dq.M dk ikuh cgqr gh LoPN vkSj fueZy jgrk gSA

i;ZVu ds egRo dks ns[kus ls irk pyrk gS fd iUuk dh lkSUn;Z vkSj vHk;kj.; ds
ek/;e ls iw¡thifr gh ugha ;gk¡ ij xjhcksa dks Hkh i;ZVu dk vkuUn izkIr gksrk gSA D;ksfa d og
Hkkjh Hkjde iSlk nsdj i;ZVu dk vkuUn ugha mBk ldrk gSA i;ZVu ds fy, fu/kkZu ds fy,
;k=kO;; cgqr Hkkjh gksus ls bu lkSUn;Z dks ns[kus dh ykylk gh [kRe gks tkrh gSA i;ZVu dk
egRo c<+ jgk gSA bldk dkj.k fd vkt O;fDr dh O;oLrrk ds dkj.k og vusd txgksa esa
tkus ds fy, le; fudky dj vius fnekxh O;Lrrkvksa ls Lo;a ds thou dks vyx djus dh

72
igy djrk gSA ftlls O;fDr ds fnekx esa izkÑfrd lkSUn;Z dh vuqHkwfr ls og ekufld 'kkafr
dk vuqHko djrk gSA

1- e/;izn's k i;ZVu foHkkx] ifjogu ,oa lapkj foHkkx ea=ky;] ubZ fnYyh] 1958] i`"B 89
2- MkW- v:.k j?kqoa'kh ,oa MkW- pUnzys[kk] j?kqoa'kh] i;kZoj.k iznw"k.k] e-iz- fgUnh xzUFk
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14
5- ds-,y- vxzoky] Hkkjr ds lkaLÑfrd dsUnz] [ktqjkgksa fn eSdfeyu dEiuh] ubZ fnYyh]
1980] i`"B 64
6- MkW- ch-ih- flag] i;ZVu fodkl leL;k,¡ ,oa lEHkkouk,¡] vk'kk ifCyf'kax dEiuh] vkxjk]
2013&14] i`"B 225

73
i;ZVu ekuo thou ds lkSUn;Z iw.kZ thou thus dk euksjatd LFkku gSA tgk¡ ekuo dks
;k=k ds nkSjku gjh Hkjh /kjrh vkSj i;ZVu esa m|ksxksa dk izpyu gksrk gSA ftl izdkj ekuo
izkÑfrd vkd"kZ.k ds dsUnzkas dks ns[kus dk ,d fo'ks"k egkSy jgrk gSA HkkSfrd vko';drkvksa ds
fy, m|ksxksa dk gksuk vko';d gksrk gSA ftlls O;fDr dks i;ZVu LFky essa tkus ij mls
mi;ksxh lkexzh vklkuh ls miyC/k gks tkrh gSA ÞHkkSfrd Lo:i esa fofHkUurk;sa n`'; lkSUn;Z
i;ZVu LFkyksa ds vkd"kZ.k dk vk/kkj gSAÞ1 LoHkko ls gh ekuo dh ftKklk izÑfr ds vusd
{kBkvksa vkSj n`';ksa dks ns[kus dh gksrh gSA ftl izdkj ls ckS) Lrwi nsmj dksBkj esa ik;s tkus
okyh gfj;kyh vkSj Lrwiksa dk ifjn`'; fn[kkbZ nsrk gSA bldh vusd fofo/krkvksa dks tkuus ds
dkj.k ml izÑfrd egkSy dks O;fDr ns[kus ds fy, mRlqd gksrk gSA blh fy, izÑfr ds }kjk
fufeZr LFkku dks i;ZVu ds :i esa O;fDr ml fodkl dh fn'kk dk vkuUn ysrk gSA i;ZVu
O;fDr ds fy, ,d ,slh euksjatd ;k=k o`rkar gSA ftls O;fDr vuqHko ds mÌs';ksa ls i;ZVu dh
vksj ;k=k djrk gSA i;ZVd mls dgrs gS tks ;k=k djrs le; vius lkekU; okrkoj.k ds cká
LFkkuksa esa jgus ds fy, i;ZVd T;knk ls T;knk la[;k esa vkrs gSA ogk¡ ,d lky ds fy, O;kikj]
m|ksxksa dks Hkh LFkkfir djrs gSA
ßi;ZVu ,d ,slh ?kVuk o laca/kksa dk feJ.k gS tks fdlh LFkku ij vfuokfl;ksa dh ;k=k
vkSj muds ogk¡ Bgjus ls mRiUu gksrk gS rFkk ftlds vUrxZr O;fDr mu LFkku ij u rks LFkk;h
:i ls clrk gS vkSj u /ku dekus ds fy, dksbZ dk;Z djrk gSAÞ2
i;ZVu ekuo ds chp vkilh lEcU/kksa dks etcwr djrk gSA vU; jkT;ksa vkSj ns'kksa ls
vkus okys O;fDr;ksa dks Bgjus dh lqfo/kkvksa dks Hkh iznku djrk gSA ;g :dus dk LFkku dqN
fo'ks"k fnuksa ;k eghuksa ds fy, gksrk gSA ftlesa dgk tkrk gS fd ;g O;fDr fdlh Hkh fo'ks"k
ifjfLFkfr;ksa esa T;knk fnu rd u :dsxk vkSj u gh dekus ds mÌs';ksa ls dksbZ m|ksx gh LFkkfir
djsxkA vxj ge lkekftd vkSj vkS|ksfxd n`f"V ls ns[ks rks i;ZVu dk vFkZ gksrk gSA fd ;g
,d euksjatd LFkku gSA ftlds vUrxZr ,d LFkku ij ukxfjdksa dks vftZr /ku dks nwljh txgksa
ij fd;s x;s ;k=k ij [kpZ fd;k tkrk gSA blds lEcU/k esa MkW- ftokÌhu us dgk gS fd ß;g]
vkjke] euksjatd rFkk lkaLÑfrd vko;drkvksa dh larqf"V ds n`f"Vdks.k ls ,d lkekftd lapj.k
gSAÞ3 ßvUrjkZ"Vªh; i;ZVu ;k fons'kh i;ZVu] blesa yksx ,d ns'k ls nwljs ns'k dk Hkze.k djrs gSa
vkSj blh dkj.k fofHkUu eqnzkvksa dk iz;ksx fofue; ds ek/;e ds :i esa djrs gSaA vyx&vyx
eqnzkvksa ds gksus ds dkj.k vUrjkZ"Vªh; i;ZVu dk Hkqxrku lUrqyu ij izHkko iM+rk gSAÞ4

'kks/k i= e/;izns'k esa i;ZVu m|ksx dk vkfFkZd v/;;u ,d izdkj dk f}rh;d lkexzh
ladyu dk fo"k; gSA ftlesa fo'ys"k.kkRed i)fr ls v/;;u dks viuk;k x;k gSA 'kks/k izfof/k
esa lk{kkRdkj] fo}kuksa ds ekxZn'kZu izkFkfed L=ksrksa ,oa 'kks/k tuZy] i= ,oa if=dkvksa ds ek/;eksa

74
ls Hkh v/;;u fd;k x;k gSA blds lkFk&lkFk lUnHkZ xzUFkksa gsrq iqLrdky;ksa bUVjusV dk Hkh
lgkjk 'kks/k i= rS;kj djus esa fy;k x;k gSA

'kks/k i= dk mÌs'; e/;izn's k esa i;ZVu m|ksx dk vkfFkZd v/;;u dks le>us dk
iz;kl gS] ;s lHkh fl)kUr i;ZVu esa vkus okys i;ZVdksa dh n`f"V dks ns[krs gq, gSa] i;ZVd
Lons'kh gks ;k vU; ns'k dk ukxfjd gks og viuh ekuoh; ftKklkvksa dh iwfrZ gsrq ;k=k djrk
gSA bl ;k=k ds fy, okf.kT;d vkoklh;] /keZ'kkykvksa] gksVyksa ,oa eqlkfQj [kkuksa vkfn esa
Bgjrk gSA og fdlh fo'ks"k iz;kstu gsrq ;k=k forkUr djrk gSA ftlesa /kkfeZd LFky ds :i esa
Hkh og ,d jkr ;k pkSfcl ?kaVksa ds fy, og rhFkZ ;k=k t:j djrk gSA ßukWjcy us i;ZVd dh
O;k[;k djrs gq;s fy[kk gS fd izR;sd O;fDr tks fons'k esa LFkk;h fuoklh djus ds fy;s ugha
vkrk vFkok ogk¡ fujUrj dk;Z djus ugha vkrk rFkk tks ns'k esa vius vLFkk;h fuokl ds nkSjku
vU; LFkku ij vftZr eqnzk dks [kpZ djrk gS ogha i;ZVd gSAÞ5
%&
vkfFkZd n`f"V ls i;ZVu dh fLFkfr vkSj mlds foÙkh; O;oLFkkvksa ds dk;Z dks tksM+us gsrq
i;ZVd vius lk/kuksa dh n`f"V ls viuh ek¡x dks iwfjr djrk gSA ;g i;ZVd ckgj ls vkus okys
i;ZVd rFkk futh LFkkuksa ls vkus okys Hkh i;ZVd lkfey gksrs gSA tks i;ZVd futh ml jkT;
ds gksus ds dkj.k og m|ksx Hkh LFkkfir djrs gSaA ftlds dkj.k vkfFkZd fLFkfr ml m|eh dh
lq/kjrh gSA nwljh ckr jk"Vªh; vFkZO;oLFkk dks Hkh ykHk gksrk gSA dqN i;ZVd 'kSf{kd mÌs';ksa ls
vkrs gSaA muds fy, vkfFkZd vk/kkj gksuk cgqr egRoiw.kZ gksrk gSA ftlls muds 'kks/k ;k i;ZVu
esa jgus] [kkus ds fy, gksVy vkfn ls Hkh vkfFkZd L=ksra ksa dh tkudkjh izkIr gksrh gSA blesa
lkekftd i;ZVd Hkh vkrs gSaA mlds vk/kkj ij mudk Hkko vk; fuEu gksus ds dkj.k og ifjokj
viuh vko';drkvksa dks iwjk u dj ikus dh n'kk esa og i;ZVu LFky ij QqVikFk ij vius
thfodksia ktZu gsrq nqdku Mkyrk gSA bl rjg ds lkekftd i;ZVu ls jk"Vªh; vFkZO;oLFkk dks Hkh
ykHk izkIr gksrk gSA
e/;izn's k esa i;ZVu m|ksx dk vkfFkZd vk/kkj Hkh ns'k fons'k ls vius okys i;ZVd gh
gksrs gSaA ßtc lhfer lk/kuksa okys O;fDr i;ZVu esa fgLlk ysrs gSa vFkok muds fy;s izsj.kknk;d
mik; viukus tkrs gSa rks mls lkekftd i;ZVu dgrs gSaAÞ6
i;ZVu ds fo'ks"k :i esa etnwj Hkh lkfey gksrs gSa ftudh vkenuh dk L=ksra cgqr gh
de gksrk gSA ftl dkj.k mUgsa i;ZVu dh eg¡xh oLrqvkas dks Ø; ugha dj ikrs gSaA muds fy,
i;ZVu flQZ ,d n`'; dh rjg gksrk gSA dqN i;ZVu jkT; 'kklu vkSj xSj ljdkjh :i ls
lajf{kr gksrs gSaA mlesa deZpkfj;ksa] etnwjksa vkfn ds vk/kkj ij cuk;s x;sa la?kksa ds ek/;e ls
pyrs gSaA ßvUrjkZ"Vªh; i;ZVu ;k fons'kh i;ZVu] blesa yksx ,d ns'k ls nwljs ns'k dk Hkze.k
djrs gSa vkSj blh dkj.k fofHkUu eqnzkvksa dk iz;ksx fofue; ds ek/;e ds :i esa djrs gSaA
vyx&vyx eqnzkvksa ds gksus ds dkj.k vUrjkZ"Vªh; i;ZVu dk Hkqxrku lUrqyu ij izHkko iM+rk
gSAÞ7

75
i;ZVu esa i;ZVdksa ds fy, ;g LFkkuh; nqdkuksa ds ek/;e ls NksVh&eksVh oLrqvksa dks izkIr
djus dk ek/;e Hkh O;olkf;d izfr"Bku gksrs gSaA buds egRoiw.kZ ?kVdksa ds vk/kkj ij ;gk¡
nqdkus Hkh lajf{kr dh tkrh gSA tks nqdkus O;kolkf;d :i ls i;ZVdksa dks lqfo/kk,sa iznku djrs
gSaA
i;ZVd fodkl fuxe dh lgk;rk ls vkS|ksfxd {ks=ksa eas Hkh cgqr ls vUrjk"Vªh; Lrj ij
vk;s gq, i;ZVd ml i;ZVu dh vkfFkZd O;oLFkk ij :fp j[krs gSaA ftl izdkj ls Lekfjd
lEifÙk;k¡ gks ldrh gSA tSls ckS) Lrwi dh Lekfjdk,¡] fgUnw /keZ dh /kkfeZd izFkk dks ekuus okys
O;fDr;ksa ds fy, nsorkvksa dh izfrek,sa] bLyke lEiznk; dks Lohdkj djus okys O;fDr;ksa ds fy,
etkj] vkfn Lekfjdk,sa izpfyr gksrh gSA ftlls ogk¡ vkus okys i;ZVu esas i;ZVdksa dks vkfFkZd
lqfo/kkvksa gsrq m|ksx] t:jriw.kZ ewfrZ;k¡ bR;kfn lkekxzh Hkh vklkuh ls izkIr gks tkrh gSA tks
jk"Vªh; vk; dks c<+kok nsrk gSA ;g i;ZVu yxHkx vkt fo'o O;kikj ds :i esa viuk :i
fn[kk;s tk jgk gSA ftlls fu;kZr izR;sd nl o"kZ esa nqxuq k gksrk tk jgk gSA
Þcgqr ls ns'kksa us i;ZVu dks fu;kZr m|ksx ds :i esa fodflr djus dk fu'p; fd;k gS
ftlls fd jk"Vª vkS|ksfxd midj.k izkIr djus esa lQy gksAa cktkj dh O;kidrk] mRiknuksa dh
fofo/krk] oLrqvksa dh vR;f/kd la[;k rFkk bu lHkh ds Åij foÙkh; miyfC/k ds dkj.k i;ZVu
,d ize[q k vkfFkZd fØ;k rFkk fons'kh fofue; vtZu dk egRoiw.kZ L=ksr cu pqdk gSAÞ8

e/;izn's k jkT;ksa esa mu lsokvksa ds ek/;e ls i;ZVu dh lqfo/kk miyC/k djrs gSaA ftlesa
izR;{k vkSj vizR;{k :i ls i;ZVu dks ykHk izkIr gksuk pkfg,A ftlls i;ZVdksa dks i;ZVu esa
vkus ls oafpr u gksuk iM+sAa tksfd jk"Vªh; Lrj ij i;ZVu ,d viuk LFkku cuk pqdk gSA
ftlls izR;sd le; esa i;ZVd ogk¡ euksjatd vkuUn ysus vkrs gSaA i;ZVdksa ds dkj.k ;krk;kl
ls Hkh jk"Vªh; vk; dks ykHk izkIr gksrk gSA ogk¡ ds m|ksxksa dks Hkh vk; izkIr gksrh gSA blls ;g
lkfcr gksrk gS fd dksbZ Hkh ns'k ;g pkgs fd i;ZVdksa dk vf/kd ls vf/kd vkxeu gks rks mls
vkus okys vU; jkT;ksa ;k ns'k ls vkxUrqdkas dk fu"Bk iw.kZ Lokxr djsAa ftllsa muds eu esa
fdlh izdkj dh xyr HkzkfUr;k¡ u iSnk gksA blls Hkh jk"Vªh; vk; dks Qk;nk gksrk gSA i;ZVu esa
dqN ckrs fo'ks"k :i ls gksuh pkfg,A pksjh ls cpus ds fy, fo'ks"k lqfo/kk gksuh pkfg,A vLirky
gksuh pkfg,A ftlls vk;s gq, fdlh i;ZVd dks LoLF; ykHk izkIr gks ldsA lM+d ekxZ
lqO;ofLFkr gksus pkfg,A lapkj ds lk/ku] dkjikfdZx] Bgjus dh lqHky O;oLFkk gksuh pkfg,A
LoPN ty] Hkkstu] ukLrk ds lkFk&lkFk lqj{kk dh fo'ks"k O;LFkk gksus ls i;ZVd dks vlqfo/kk dk
lkeuk ugha djuk iM+rk gSA ftlls i;ZVu dsUnzksa esa vkus ds fy, i;ZVd ges'kk yykf;r jgrs
gSaA9

76
1-
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2013&14] i`"B 31
2-
Swiss Professor Hunziker and Krapf, Quoted by : Negi JMS : Tourism &
Hoteliering : A world-wide Industry : Gitanjali Publishing House, New Delhi
1982 Page 22.
3-
Dr. Zivaddin Javiace artical on tourism and geography in the International travel
and Recreation Journal No. 3 P, 23 Quoted by - Negi JMS, Tourism &
Hoteliering, A World Wide Industry, Gitanjali Publishing House, New Delhi -
1982, P 23.
4-
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i`"B 24
5-
A. J. Norval, Tourist Industry, Quoted by kaul R.N., Dynamics of Tourism, A
Trilogy , Vol. I The Phenomenon, Sterling Publishers Private Limited, New
Delhi-1985, Page 2.
6-
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7-
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i`"B 24
8-
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i`"B 32&33
9-
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CONTRIBUTORS OF THIS ISSUE

 डॉ. देर्राज ससरसवाल, सहायक प्राध्यापक (दर्शनर्ाि), राजकीय स्नात्तकोत्तर कन्या


महासवद्यालय, सेकटर -११, चांडीगढ़

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